बैर न कर काहू सन कोई…रामकृपा विषमता खोई, नहीं दरिद्र कोऊ दुखी न दीना
पटना : बैर न कर काहू सन कोई रामकृपा विषमता खोई। नहीं दरिद्र कोऊ दुखी न दीना।। आध्यात्मिक दृष्टि से श्री राम यदि आनंद सिंधु हैं, सुख धाम हैं, तो भगवती सीता मूर्तिमति शांति की प्रतीक हैं. व्यक्ति के अंत:करण में हृदय के सिंहासन पर जब सुख के साथ शांतिरुपी रामसीता विराजमान होंगी, तभी रामराज्य […]
पटना : बैर न कर काहू सन कोई रामकृपा विषमता खोई। नहीं दरिद्र कोऊ दुखी न दीना।। आध्यात्मिक दृष्टि से श्री राम यदि आनंद सिंधु हैं, सुख धाम हैं, तो भगवती सीता मूर्तिमति शांति की प्रतीक हैं. व्यक्ति के अंत:करण में हृदय के सिंहासन पर जब सुख के साथ शांतिरुपी रामसीता विराजमान होंगी, तभी रामराज्य व्यक्ति के अंदर और बाह्य जीवन में होगा.
ये बातें रामकथा के दौरान दीदी मां मंदाकिनी श्री रामकिंकर ने मानस के प्रतिद्वंदी पात्र श्री राम और रावण अयोध्या और लंका के जीवन दर्शन का तुलनात्मक विवेचन बड़ी सूक्ष्मता से करके श्रोताओं का दिल जीत लिया. पाटलिपुत्र के उमंग हॉल में हो रहे आयोजन में दीदी जी का माल्यार्पण एवं स्वागत न्यायाधीश न्यायमूर्ति मिहिर कुमार झा लोकायुक्त, बिहार और पद्म श्री डॉ गोपाल प्रसाद सिन्हा द्वारा किया गया. अतिथियों का स्वागत प्रो डॉ जनार्दन सिंह ने किया. कथा के बाद प्रसाद वितरण किया गया. समिति ने बड़े उत्साह से समस्त पटना वासियों को निमंत्रित किया है कि अधिक-से-अधिक संख्या में उपस्थित होकर इस ज्ञान गंगा से लाभान्वित हो.
दीदी जी ने रामचरितमानस का बखान करते हुए कहा कि रामराज्य की स्थापना, रामराज्य का नाम आज भी एक आदर्श राज्य के रूप में लिया जाता है.
