पटना : प्रतिबंधित चाइनीज केमिकल से ट्रक में रखे-रखे ही पकाये जा रहे हैं फल
Updated at : 13 Aug 2018 6:39 AM (IST)
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आपको बीमार कर सकते हैं ऐसे फल, खाने से बचें पटना : बाजार में बिकने वाले अधिकतर फल चाइनीज केमिकल से पकाये जा रहे हैं. एथिलीन राइपनर, इथेफोन, इथीरेक्स और जिंकोफर आदि नामों के चाइनीज केमिकल बाजार में पाबंदी के बाद भी बेचे जा रहे हैं. भारत सरकार ने इन्हें मानव स्वास्थ्य के लिए घातक […]
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आपको बीमार कर सकते हैं ऐसे फल, खाने से बचें
पटना : बाजार में बिकने वाले अधिकतर फल चाइनीज केमिकल से पकाये जा रहे हैं. एथिलीन राइपनर, इथेफोन, इथीरेक्स और जिंकोफर आदि नामों के चाइनीज केमिकल बाजार में पाबंदी के बाद भी बेचे जा रहे हैं. भारत सरकार ने इन्हें मानव स्वास्थ्य के लिए घातक मानते हुए इन पर पाबंदी लगायी है.
बावजूद इन रसायनों के सस्ते होने की वजह से फुटकर दुकानदार से लेकर थोक व्यापारी तक फलों को पकाने के लिए इनका धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहे हैं. बड़े कारोबारियों को तो खुद इसके प्रयोग की जेहमत तक नहीं उठानी पड़ रही, क्योंकि जहां से भी विशेष रूप से केला या आम रवाना होता है, ट्रक में ही इन खतरनाक केमिकलों का स्प्रे (छिड़काव) कर दिया जाता है. 20 से 24 घंटे के रास्ते में ही फल पक कर एकदम चमकदार पीले हो जाते हैं.
प्रभात खबर ने पटना में बीती रात केले से भरे ट्रक में घातक स्प्रे का उपयोग करते पाया था. इसके बाद बाजार का सर्वे किया. पड़ताल में कई अहम बातें सामने आयीं, जिनसे पता चला कि किस तरह स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है. जिम्मेदार सरकारी एजेंसियां हाथ पर हाथ रख बैठी हैं.
कैल्शियम कार्बाइड किस तरह करता है काम
दरअसल आम हो या कोई और फल, पकने की एक जैव रासायनिक प्रक्रिया हाेती है. कैल्शियम कार्बाइड या कोई दूसरा रसायन खुद फल नहीं पकाता है. वह केवल एथिलीन गैस बनाने में उत्प्रेरक की भूमिका निभाता है.
जैविक रूप में एथिलीन एक पादप हार्मोन होता है. वह गूदे को पकाता है. एसिटिलीन नाम का रसायन भी उपयोग में लाया जाता है जो छिलके को पका देता है. यह गैस व्यावसायिक तौर पर वेल्डिंग करने में उपयोग में लायी जाती है. कैल्सियम कार्बाइड पानी के संपर्क में आने के बाद एसिटिलीन गैस बना देता है.
जानकारों के मुताबिक चीनी रसायनों की खासियत यह है कि वह फलों को एकदम चमकदार और पीला बना देते हैं. इसके अलावा कई दूसरे प्रतिबंधित रसायन जैसे कैल्सियम कार्बोनेट आदि हैं, जिनसे कम समय में फल पकाये जा रहे हैं. ये दोयम दर्जे के रसायन हैं, जिनसे फलों का गूूदा आधा कच्चा रह जाता है और छिलका आधा पीला एवं कुछ हरा रह जाता है.
भारतीय खाद्य एवं मानक प्राधिकरण (एफएफएआई) ने फलों को पकाने के लिए इथिलीन गैस के अलावा दूसरे रसायनों के इस्तेमाल को प्रतिबंधित कर रखा है. भारतीय बागवानी बोर्ड के मुताबिक फलों को पकाने के लिए कैल्सियम कार्बाइड की जगह इथिलीन का प्रयोग किया जा रहा है. इसके लिए निश्चित तापमान और जगह जरूरी है.
ऐसे की जा सकती है पहचान
रसायनों से पके आम पानी में डूबते नहीं है. जबकि पेड़ का पका आम या नेचुरल तरीके से पके आम पानी में डूब जाते हैं.
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