बिहार : मुझे लोकतंत्र की खातिर बोलने की सजा मिली : शरद यादव

नयी दिल्ली : वरिष्ठ समाजवादी नेता शरद यादव ने राज्यसभा की सदस्यता से अयोग्य ठहराये जाने के बाद कहा है कि उन्हें लोकतंत्र की खातिर बोलने की सजा मिली है. यादव ने राज्यसभा के सोमवार के फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि उन्हें बिहार में बने महगठबंधन को तोड़ने संबंधी अपनी पार्टी के फैसले […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | December 6, 2017 6:55 AM
नयी दिल्ली : वरिष्ठ समाजवादी नेता शरद यादव ने राज्यसभा की सदस्यता से अयोग्य ठहराये जाने के बाद कहा है कि उन्हें लोकतंत्र की खातिर बोलने की सजा मिली है. यादव ने राज्यसभा के सोमवार के फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि उन्हें बिहार में बने महगठबंधन को तोड़ने संबंधी अपनी पार्टी के फैसले की खिलाफत करने के कारण संसद की सदस्यता गंवानी पड़ी है. उन्होंने ट्वीट किया है, मुझे राज्यसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित किया गया है.
बिहार में राजग को हराने के लिए बने महागठबंधन को 18 महीने में ही सत्ता में बने रहने के मकसद से राजग में शामिल होने के लिए तोड़ दिया गया. यदि इस अलोकतांत्रिक तरीके के खिलाफ बोलना मेरी भूल है तो लोकतंत्र को बचाने के लिए मेरी ये लड़ाई जारी रहेगी. राज्यसभा के सभापति ने जदयू से राज्यसभा सदस्य यादव और अली अनवर को सदन की सदस्यता से अयोग्य घोषित कर दिया था. राज्यसभा में जदयू संसदीय दल के नेता आरसीपी सिंह ने पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के कारण यादव और अनवर की सदस्यता रद्द करने की सभापति से अनुशंसा की थी. यादव ने पार्टी विरोधी गतिविधि में शामिल होने के बारे में कहा कि मुझे राज्यसभा के लिए अयोग्य घोषित किया गया है, क्योंकि मैंने लोकतांत्रिक
मूल्यों का सम्मान किया है, पार्टी के संविधान का पालन किया और बिहार के 11 करोड़ लोगों के महागठबंधन के पक्ष में दिये गये जनादेश का सम्मान किया. मैं इस सिलसिले को न सिर्फ बिहार बल्कि देश की खातिर जारी रखूंगा. सभापति ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद सोमवार की देर शाम यह फैसला दिया है. शरद गुट के नेता जावेद रजा ने कहा कि उन्हें कल देर रात इस फैसले की प्रति मिली है. इसके कानूनी पहलुओं पर आज विशेषज्ञों से विचार विमर्श कर आगे की रणनीति तय की जायेगी.
सदस्यता गंवाने के लिए शरद खुद जिम्मेदार : वशिष्ठ
पटना : जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ सिंह ने कहा है कि राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू का फैसला आया है उसके लिए शरद यादव स्वयं जिम्मेदार हैं. उन्होंने कहा कि शरद पर कार्रवाई होनी ही थी. वह पार्टी के निर्देशों का उल्लंघन कर रहे थे. कई लोग पार्टी से संपर्क में हैं.
अच्छे काम से लोग प्रभावित हो रहे हैं. राजनीतिक और सामाजिक रूप से जनाधार वाले लोग भी जदयू में आने की तैयारी में हैं. पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि पार्टी सर्वोपरि होती है. पार्टी से बड़ा कोई व्यक्ति नहीं होता. पार्टी के निर्देश के बावजूद शरद यादव कार्यक्रमों में शामिल नहीं हुए. ऐसा कर उन्होंने स्वेच्छा से दल का त्याग कर दिया. यह पूछे जाने पर कि क्या उनके अलग होने से पार्टी को नुकसान होगा, वशिष्ठ ने कहा कि जनाधार नहीं होने के बावजूद उन्हें पार्टी द्वारा सम्मान दिया गया. जब उन्होंने स्वयं इसका उल्लंघन किया तो नुकसान किस बात का.
पहले होना चाहिए था निर्णय : मोदी
पटना : उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने शरद यादव और अली अनवर की राज्यसभा सदस्यता समाप्त करने के निर्णय का स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि यह निर्णय पहले आना चाहिए था.
मोदी ने मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि दोनों नेताओं ने जदयू के साथ धोखा किया था. भ्रष्टाचारियों से जाकर हाथ मिला लिया था. जदयू नीतीश कुमार के साथ है. शरद यादव के दावा का कोई मतलब नहीं था. मोदी ने सवालिया लहजे में यह भी कहा कि क्या अब कांग्रेस शरद यादव को राज्यसभा में भेजेगी.