राजद की रैली : कुछ ऐसे वोटरों को बांधे रखने की जद्दोजहद करते रहे लालू प्रसाद
Updated at : 28 Aug 2017 8:20 AM (IST)
विज्ञापन

मिथिलेश पटना : भ्रष्टाचार के सवाल पर राज्य सत्ता से बेदखल हुए राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने रैली के सहारे अपने लिए संजीवनी तलाशने की कोई कसर नहीं छोड़ी. लालू कुनबे को रैली में आये तमाम नेताओं का खुल कर साथ मिला. रेलवे टेंडर घोटाले में आरोपी बने लालू प्रसाद के आवास पर सीबीआइ की […]
विज्ञापन
मिथिलेश
पटना : भ्रष्टाचार के सवाल पर राज्य सत्ता से बेदखल हुए राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने रैली के सहारे अपने लिए संजीवनी तलाशने की कोई कसर नहीं छोड़ी. लालू कुनबे को रैली में आये तमाम नेताओं का खुल कर साथ मिला.
रेलवे टेंडर घोटाले में आरोपी बने लालू प्रसाद के आवास पर सीबीआइ की छोपमारी के बावजूद रैली में उपस्थित नेताओं ने यह माना कि केंद्र सरकार लालू समेत अपने सभी विरोधियों को मुकदमों से डरा रही है. पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी, यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश प्रसाद यादव और कांग्रेस के नेता गुलाम नबी आजाद ने खुल कर लालू प्रसाद का समर्थन किया. दूसरी ओर लालू प्रसाद ने रैली के बहाने यह जताने की भी कोशिश की कि 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ कांग्रेस समेत समूचे विपक्ष के लिए उनके बिना राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन बनाना संभव नहीं है.
रैली में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के रिकार्ड किये गये और उपाध्यक्ष राहुल गांधी के लिखित भाषण ने भाजपा के खिलाफ लालू के साथ रहने का सीधा संकेत दिया. रैली में लालू प्रसाद ममता बनर्जी और शरद यादव के साथ अखिलेश यादव व वाम दलों के नेताओं का भी साथ लाने में सफल रहे.
हमें याद आ रहा है दो साल पहले 30 अगस्त, 2015 को आयोजित परिवर्तन रैली का दृष्य. जदयू, राजद और कांग्रेस की इस परिवर्तन रैली में उमड़ी अनुशासित भीड़ ने एक नया कीर्तिमान बनाया था. ऐतिहासिक गांधी मैदान का वहीं मंच. मंच से सोनिया गांधी, नीतीश कुमार, लालू प्रसाद और शरद यादव ने भाजपा के खिलाफ हुंंकार भरा था.
उस समय लोकसभा चुनाव में भाजपा की आंधी में कांग्रेस, राजद और जदयू व समाजवादी पार्टी चित हो गयी थी. बिहार में तीन दलों के महागठबंधन ने भाजपा के अश्वमेघ का घोड़ा रोक दिया था. अब 20 महीने बाद लोकसभा चुनाव होने हैं, एक बार फिर गांधी मैदान भाजपा के खिलाफ विपक्षी जुटान का गवाह बना. फर्क सिर्फ इतना था कि इस बार मंच पर जदयू नहीं था.
लालू ने रैली तो भाजपा के खिलाफ आयोजित की थी, लेकिन उनके कुनबे के हर शख्श के चेहरे पर सत्ता से बेदखल होने की टिस साफ झलक रही थी. लालू प्रसाद जानते हैं कि आने वाले दिनों में उनकी मुश्किलें और भी बढ़ने वाली है. ऐसे में माय समीकरण खास कर यादव मतदाताओं को बांधे रखने की चुनौती भी उनके सामने खड़ी है. मुकदमों के बोझ तले दबे लालू परिवार का हर सदस्य मंच पर मौजूद था.
यही कारण था कि लालू परिवार ने अपने भाषण में यादव मतदाताओं को बांधे रखने की हर संभव कोशिश की. आम तौर पर रैली और सार्वजनिक तौर पर भाषण से परहेज करने वाले लालू-राबड़ी के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने खुल कर अपनी जाति का भी नाम भी लिया. उन्होने अपने को अहिर मानते हुए जब मंच पर पगड़ी बांधी तो गांधी मैदान में उपस्थित युवाओं ने खूब तालियां बजायी.
रविवार की राजद की रैली कुछ अलग अंदाज में रही.गोपालगंज से आये एक साठ वर्षीय बुजूर्ग रामाशीष यादव ने यह पूछने पर कि आप यहां क्यों आये हैं, उन्होंने कहा-लालू जी बुलइले बाड़ें. वह अपने साथ हाथ में एक मुट्ठी मिट्टी भी लाये थे. उनकी चिंता थी कि इस मिट्टी को क्या करना है उन्हें बताया नहीं गया था.
राजद की सरकार के दिनों में एक कहावत प्रचलित था, खाता न बही- जो लालू कहें वही सही. राजद की रैली में इसका स्वरूप बरकरार रहा. शरद यादव और ममता बनर्जी जैसी वरिष्ठ नेताओं के भाषण के बाद अचानक तेज प्रताप यादव प्रकट हो गये. तेज प्रताप का नाम भाषण करने वालों की सूची में नहीं था. अंतिम समय में तेज प्रताप ने पिता के सामने पुरजी भिजवायी कि वह शंखनाद करना चाहते हैं. शंख बजाने माइक पर आये तो अपने मन की बात भी कह डाली.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Tags
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




