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अगले वर्ष से सभी स्कूलों में मनेगा ‘पृथ्वी दिवस’ : सुशील मोदी

Updated at : 09 Aug 2017 4:37 PM (IST)
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अगले वर्ष से सभी स्कूलों में मनेगा ‘पृथ्वी दिवस’ : सुशील मोदी

पटना : ‘बिहार पृथ्वी दिवस’ पर आयोजित कार्यक्रम को विशिष्ट अतिथि के तौर पर संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि अगले वर्ष से बिहार के सभी सरकारी और गैरसरकारी स्कूलों में ‘पृथ्वी दिवस’ का आयोजन किया जायेगा. उन्होंने कहा कि आज से 75 वर्ष पहले महात्मा गांधी ने नौ अगस्त को […]

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पटना : ‘बिहार पृथ्वी दिवस’ पर आयोजित कार्यक्रम को विशिष्ट अतिथि के तौर पर संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि अगले वर्ष से बिहार के सभी सरकारी और गैरसरकारी स्कूलों में ‘पृथ्वी दिवस’ का आयोजन किया जायेगा. उन्होंने कहा कि आज से 75 वर्ष पहले महात्मा गांधी ने नौ अगस्त को ही ‘अंगरेजो भारत छोड़ो’ का नारा दिया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी आज से स्वच्छ भारत, भ्रष्टाचार मुक्त भारत का नारा दिया है. महात्मा गांधी ने कहा था कि ‘यह पृथ्वी, वायु, जल और जमीन विरासत में नहीं, बल्कि अपने बच्चों से कर्ज के रूप में मिला है, जिसे हमें उन्हें वापस करना है.

उन्होंने कहा कि पृथ्वी को हमने मां के रूप में स्वीकार किया है. पौधा लगाना और एक मां की तरह उसकी रक्षा करना हम सब का दायित्व है. जल संरक्षण आज की जरूरत है. जल की बरबादी से सभी को बचना चाहिए. प्रकृति से सामंजस्य बनाने की सीख भारतीय संस्कृति में काफी पहले से विद्यमान है. पहली रोटी गाय और आखिरी कुत्ते को देने तथा चींटी को भी बताशा खिलाने की हमारी परंपरा रही है. यह सृष्टि केवल मनुष्यों के लिए ही नहीं, बल्कि समस्त जीव-जंतु और प्राणियों के लिए है. प्रकृति के अत्यधिक दोहन से ही आज कई संकट उत्पन्न हुए हैं.

हमें तय करना है कि हम कैसी दुनिया चाहते हैं. हमें ‘थिंक ग्लोबली, एक्ट लोकली’ के तर्ज पर काम करने की जरूरत है. हम जहां रहते हैं, वहां अपने आसपास स्वच्छता रखें. जल और पानी को प्रदूषण से बचाएं. नदी, तालाब, पोखर को गंदा होने से बचाएं. अधिक से अधिक पौधा लगाएं. पेड़ों की रक्षा करें. साइकिल का प्रयोग करें. अमेरिका जैसे देश में साइकिल के लिए अलग ट्रैक बने हुए हैं. कागज के उपयोग में भी सावधानी बरतने की जरूरत है. ए-4 साइज के 20 हजार पेज का अगर हम इस्तेमाल करते हैं, तो इसके लिए एक पेड़ की बलि देनी होती है. पृथ्वी को नहीं, खुद को बचाने के लिए प्रकृति के संरक्षण की जरूरत है.

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