World Population Day: जनसंख्या नियंत्रण को लेकर स्वास्थ्य विभाग के द्वारा जिले भर में अनेकों कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है. 2011 की जनगणना के अनुसार नवादा जिले की कुल जनसंख्या 22 लाख 19 हजार 146 है. वहीं सरकारी आंकड़ों के अनुसार जिले में 88.53% हिंदू, 11.01% मुस्लिम और 0.46% अन्य समुदाय के लोग निवास करते हैं. लिटरेसी (साक्षरता दर) के मामले में जिला वर्तमान में 59.76% पर है.
शिक्षा और बाल विवाह बाधा
स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी किए गए जनसांख्यिकीय आंकड़ों के अनुसार, जिले में प्रति 1000 पुरुषों पर महिलाओं की संख्या 939 है. विभाग के उच्चाधिकारियों का कहना है कि जनसंख्या नियंत्रण की राह में बाल विवाह के साथ-साथ शिक्षा का अभाव भी एक बहुत बड़ी बाधा बनकर सामने आ रहा है. समाज को पूरी तरह शिक्षित करते हुए ही बढ़ती जनसंख्या को प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जा सकता है.
प्रजनन काल बढ़ने से समस्या
बाल विवाह एवं किशोरावस्था में मातृत्व जैसी गंभीर चुनौतियां राज्य में परिवार नियोजन कार्यक्रम की प्रासंगिकता को और अधिक महत्वपूर्ण बनाती हैं. कम उम्र में विवाह होने से महिलाओं का शारीरिक प्रजनन काल काफी बढ़ जाता है, जिससे उनके जीवनकाल में बच्चों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि होती है. इसके अलावा, आधुनिक परिवार नियोजन के साधनों के अभाव से अवांछित गर्भधारण की संभावना बनी रहती है.
निशुल्क साधन करा रहे उपलब्ध
जनसंख्या नियंत्रण को लेकर स्वास्थ्य विभाग की ओर से समय-समय पर अनेक तरह के सघन अभियानों को संचालित किया जा रहा है. जिले के सभी प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में महिला बंध्याकरण एवं पुरुष नसबंदी सेवाएं निर्धारित विशेष शिविरों के माध्यम से निशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं. इसके अतिरिक्त कंडोम, माला-एन, छाया और अंतरा इंजेक्शन जैसी गर्भनिरोधक सामग्रियां भी बांटी जा रही हैं.
नसबंदी और बंध्याकरण है कारगर
जिले के सदर अस्पताल, हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर और शहरी स्वास्थ्य केंद्रों पर जनसंख्या नियंत्रण को लेकर सभी जरूरी सुविधाएं पूर्णतः मुफ्त उपलब्ध करायी जाती हैं. जनसंख्या नियंत्रण में पुरुष नसबंदी एवं महिला बंध्याकरण सबसे ज्यादा कारगर साबित हो रहा है. इस अभियान को बढ़ावा देने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रत्येक जागरूक महिला व पुरुष को निर्धारित योजनाओं के तहत आर्थिक लाभ भी दिया जाता है.
क्या कहते हैं विभागीय आंकड़े
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में जिले भर में कुल 34,759 बच्चों का जन्म सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हुआ है. इसमें सबसे ज्यादा सदर अस्पताल में 7,893, दूसरे नंबर पर पकरीबरावां में 3,027 और तीसरे नंबर पर 2,600 बच्चों के साथ कौवाकोल और वारसलीगंज प्रखंड संयुक्त रूप से रहे. वहीं सबसे कम 931 बच्चों का जन्म मेसकौर प्रखंड में हुआ है.
जिले का प्रखंडवार जन्म ब्योरा
वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रखंडवार दर्ज किए गए बच्चों के जन्म के आंकड़ों की विवरणी इस प्रकार है:
- नवादा सदर: 7,893
- पकरीबरावां: 3,027
- कौवाकोल: 2,600
- वारिसलीगंज: 2,600
- अकबरपुर: 2,544
- रजौली: 2,308
- नारदीगंज: 2,302
- हिसुआ: 2,288
- रोह: 2,259
- सिरदला: 2,190
- नरहट: 1,470
- काशीचक: 1,226
- गोविंदपुर: 1,111
- मेसकौर: 931
अधिकारियों ने की सजग अपील
जनसंख्या नियंत्रण को लेकर नवादा के डीएम एंड ईओ अरविंद कुमार ने बताया कि विभाग द्वारा शहरों से लेकर सुदूर गांवों तक लगातार जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है. गर्भवती महिलाओं के लिए समय-समय पर प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व योजना के तहत जांच शिविर लगाए जाते हैं और उन्हें दवाइयां दी जाती हैं. हम सभी नागरिकों को बढ़ती हुई जनसंख्या के खतरों को लेकर खुद जागरूक होना होगा.
सिविल सर्जन का कड़ा संदेश
नवादा के सिविल सर्जन डॉ. विनोद कुमार चौधरी ने बताया कि जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों में प्रत्येक महीने प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व योजना के तहत विशेष परामर्श सत्र आयोजित किए जाते हैं. इसमें लोगों को बढ़ती जनसंख्या की रोकथाम के विभिन्न व्यावहारिक उपायों के बारे में विस्तार से बताया जाता है. बाल विवाह और अशिक्षा इसके दो प्रमुख कारण हैं, जिन पर सामाजिक नियंत्रण पाना बेहद जरूरी है.
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