नवादा–पावापुरी रेल परियोजना के खिलाफ एकजुट होने लगे किसान, गांव-गांव शुरू हुआ जनसंपर्क अभियान

Nawada News: प्रस्तावित नवादा–पावापुरी रेल परियोजना के लिए संभावित भूमि अधिग्रहण के विरोध में किसानों ने जनसंपर्क अभियान शुरू कर दिया है. प्रभावित गांवों में बैठकें कर आंदोलन और संयुक्त रणनीति की तैयारी की जा रही है.

Nawada News: प्रस्तावित नवादा–पावापुरी रेल परियोजना के लिए कृषि भूमि अधिग्रहण की संभावना को लेकर प्रभावित गांवों के किसानों ने आंदोलन की तैयारी शुरू कर दी है. किसानों को एक मंच पर लाने के उद्देश्य से विभिन्न गांवों में सघन जनसंपर्क अभियान चलाया जा रहा है. इस अभियान के दौरान ग्रामीणों को परियोजना से जुड़े विभिन्न तकनीकी पहलुओं की जानकारी देने के साथ-साथ वजूद को बचाने के लिए आगे की रणनीति पर भी विस्तृत चर्चा की जा रही है. किसानों का कहना है कि उपजाऊ जमीनों के चले जाने से उनके समक्ष भुखमरी की स्थिति पैदा हो जाएगी.

विभिन्न राजनीतिक दलों और पैक्स प्रतिनिधियों का मिला साथ

इसी कड़ी में पूर्व पैक्स अध्यक्ष अजय कुमार, गिरियक प्रखंड कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राजेश रौशन, भाकपा के अंचल सचिव सुरेश प्रसाद सिंह, अनुग्रह प्रसाद सिंह, राम लखन यादव, कारू कुमार एवं अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पुरी, दशरथपुर, पुरनविगहा और इसुआ गांवों का सघन दौरा कर प्रभावित किसानों से सीधी मुलाकात की. नेताओं ने भूमि अधिग्रहण से प्रभावित होने वाले रैयतों की राय जानी और संभावित कानूनी व आर्थिक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की. इस अभियान को लेकर प्रभावित ग्रामीण किसानों में काफी एकजुटता देखी जा रही है.

प्यारेपुर, मरकट्टा और सतौआ गांवों तक बढ़ेगा अभियान का दायरा

भाकपा अंचल सचिव सुरेश प्रसाद सिंह ने सांगठनिक जानकारी देते हुए बताया कि इस जनसंपर्क अभियान का दायरा जल्द ही प्यारेपुर, मरकट्टा और सतौआ गांवों तक व्यापक रूप से बढ़ाया जाएगा. इन सभी नए गांवों के किसानों के साथ भी बैठक कर एक साझा और मजबूत रणनीति तैयार की जाएगी, ताकि प्रभावित किसान पूरी तरह संगठित होकर अपनी जायज मांगों को जिला प्रशासन और राज्य सरकार के समक्ष मजबूती से रख सकें. उन्होंने स्पष्ट किया कि किसानों के हितों की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से धरना-प्रदर्शन सहित अन्य आंदोलनों की रूपरेखा तैयार की जा रही है.

विकास का विरोध नहीं, बल्कि हक की लड़ाई है यह आंदोलन

जनसंपर्क अभियान में शामिल प्रबुद्ध लोगों और किसान नेताओं का साफ कहना है कि इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य किसी भी सरकारी विकास कार्य का अंधा विरोध करना बिल्कुल नहीं है, बल्कि प्रभावित होने वाले गरीब किसानों की ज्वलंत समस्याओं और मांगों को उचित प्रशासनिक मंच तक पहुंचाना है. उनकी मांग है कि किसानों की उपजाऊ कृषि भूमि और आजीविका से जुड़े हितों का सरकारी स्तर पर पूरा ध्यान रखा जाए. जब तक किसानों की चिंताओं का कोई संतोषजनक समाधान नहीं होगा, तब तक यह अभियान जारी रहेगा. हालांकि, इस प्रस्तावित रेल परियोजना और किसानों के विरोध को लेकर स्थानीय प्रशासन की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.

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Published by: Vikas Jha

विकाश झा प्रभात खबर में सीनियर कंटेंट राइटर हैं. डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में छह वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ उन्होंने पटना यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन में स्नातक तथा माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की है.

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