नवादा का ऐतिहासिक शोभनाथ मंदिर : 1931 में खुदाई के दौरान मिले थे पंचमुखी महादेव, साल में रचती हैं 10 हजार शादियां

Nawada news : नवादा मुख्यालय (मनोज मिश्रा की रिपोर्ट). नवादा नगर के शोभनाथ मंदिर का इतिहास काफी पुराना और गौरवशाली है. वर्ष 1931 में स्थापित यह मंदिर आज लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का एक बड़ा केंद्र बन चुका है.

Nawada news : नवादा मुख्यालय (मनोज मिश्रा की रिपोर्ट). नवादा नगर के शोभनाथ मंदिर का इतिहास काफी पुराना और गौरवशाली है. वर्ष 1931 में स्थापित यह मंदिर आज लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का एक बड़ा केंद्र बन चुका है. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से की गई पूजा-अर्चना से हर मुराद पूरी होती है, जिसके कारण प्रतिदिन यहाँ श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है. हाल ही में इस मंदिर को बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड ने अपने अधीन कर लिया है, जिससे अब इसके भव्य विकास और सुंदरीकरण की उम्मीदें काफी बढ़ गयी हैं. यहाँ के पंचमुखी महादेव की आराधना का विशेष महत्व है और यही वजह है कि यह मंदिर शादियों के लिए पूरे क्षेत्र में विख्यात है, जहाँ हर वर्ष 10 हजार से अधिक जोड़े परिणय सूत्र में बंधते हैं.

सड़क निर्माण के दौरान प्रकट हुए थे पंचमुखी महादेव

नवादा-गया पथ पर भदौनी पशु हाट के समीप अवस्थित इस मंदिर का इतिहास बेहद चमत्कारी है. बताया जाता है कि वर्ष 1931 में नवादा-हसुआ पथ पर सड़क निर्माण का कार्य चल रहा था. इसी दौरान दक्षिण से उत्तर की ओर बहने वाले एक गहरे नाले के पास खुदाई करते समय लोगों को एक अद्भुत पंचमुखी शिवलिंग के दर्शन हुए. तत्कालीन संवेदक (ठेकेदार) ने काम रुकवाकर इस अलौकिक शिवलिंग की श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना की और फिर निर्माण कार्य शुरू कराया. शिवलिंग प्रकट होने के बाद कार्य में आ रही सारी बाधाएं दूर हो गयीं और काम तेजी से पूरा हुआ. उसी समय से यहाँ मंदिर बनाने का संकल्प लिया गया, जो आज एक विशाल मंदिर के रूप में तब्दील हो चुका है.

सस्ती शादियों और ‘चट मंगनी पट ब्याह’ के लिए मशहूर

वैसे तो यहाँ प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए आते हैं, लेकिन प्रत्येक माह की पूर्णिमा, सावन की सोमवारी और महाशिवरात्रि के अवसर पर यहाँ विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें दूर-दूर से शिवभक्त आते हैं. इसके अलावा यह मंदिर जिले में बेहद कम खर्च में और सुलभ शादियों के लिए मशहूर है. विवाह का लग्न शुरू होते ही यहाँ ‘चट मंगनी पट विवाह’ की तर्ज पर शादियां रचायी जाती हैं. हर साल हजारों गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चे यहां आकर भगवान शिव को साक्षी मानकर दांपत्य जीवन की शुरुआत करते हैं.

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Published by: Jitendra kumar

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