नवादा से अनिल कुमार के रिपोर्ट
Nawada News : विद्यालय शिक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों को ज्ञान, अनुशासन और समान अवसर प्रदान करना होता है. लेकिन जब विद्यालय प्रशासन नियमों के नाम पर कठोर और अमानवीय रवैया अपनाता है, तो शिक्षा का मूल उद्देश्य प्रभावित होता है. ऐसा ही एक मामला प्रखंड मुख्यालय स्थित इंटर विधालय अकबरपुर से सामने आया, जहां विद्यालय के प्रधानाध्यापक प्रमोद कुमार ने पचास से अधिक बच्चो को ड्रेस नहीं पहनकर आने वाले छात्र को परीक्षा में बैठने से रोक दिया और परीक्षा से निष्कासित कर दिया. बीईओ विधानंद कुमार ने बताया कि विद्यालय में निर्धारित समय पर वार्षिक परीक्षा आयोजित की जा रही थी.
परीक्षा से रोके जाने पर छात्रों का विरोध, 112 टीम पहुंची मौके पर
सभी छात्र परीक्षा देने के लिए समय पर पहुंचे. इसी दौरान दर्जनों छात्र निर्धारित विद्यालयी ड्रेस के बजाय सामान्य कपड़ों में परीक्षा केंद्र पहुँचा. आनन्द राज, रवि कुमार छात्र ने बताया कि ड्रेस का राशि नही मिलने के कारण वह नई ड्रेस नहीं खरीद सका. उसने विद्यालय प्रशासन से परीक्षा में शामिल होने की अनुमति देने की अपील भी की, लेकिन प्रधानाध्यापक ने उसकी बात सुनने के बजाय उसे परीक्षा कक्ष से बाहर कर दिया.इस घटना के बाद छात्रो में भारी नाराज़गी देखने को मिली. छात्रो ने 112 टीम को खबर कर दिया 112 के टीम ने सभी छात्रो को थाना लाया.
थाने पहुंचा यूनिफॉर्म विवाद, पुलिस ने स्कूल प्रशासन से छात्रों को परीक्षा दिलाने को कहा
थानाध्यक्ष रुपेश कुमार सिन्हा ने सभी बच्चो को समझा बुझा कर तथा प्रधानाध्यापक से विधालय मे परीक्षा देने को कहा. छात्रों का कहना है कि विद्यालय का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को शिक्षा देना है, न कि केवल ड्रेस के आधार पर उन्हें परीक्षा से वंचित करना. उनका आरोप है कि प्रधानाध्यापक ने मानवीय संवेदनाओं की अनदेखी करते हुए अपने पंचायत के बलिया बुजुर्ग पंचायत के स्कूल मे रहकर मनमाना निर्णय लिया करते है. जिससे छात्र का पूरा शैक्षणिक वर्ष संकट में पड़ गया.
स्थानीय लोगों ने उठाए सवाल तो बीईओ ने नियमों का किया बचाव
घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोग ने भी विद्यालय प्रशासन के रवैये पर सवाल उठाए. उनका कहना है कि अनुशासन आवश्यक है, लेकिन किसी छात्र को केवल ड्रेस नहीं होने के कारण परीक्षा से रोकना उचित नहीं कहा जा सकता. शिक्षा के अधिकार और विद्यार्थियों के भविष्य को देखते हुए ऐसे मामलों में संवेदनशीलता और विवेक का परिचय दिया जाना चाहिए. वहीं, बीईओ विधानंद कुमार ने अपने पक्ष में कहा कि विद्यालय में सभी छात्रों के लिए ड्रेस पहनना अनिवार्य है और नियमों का पालन सभी को समान रूप से करना चाहिए.
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