पर्यटक स्थल पावापुरी स्टेशन पर दानापुर और मोकामा तक का ही टिकट होता है उपलब्ध
रिजर्वेशन की व्यवस्था नहीं
बिहारशरीफ : आम लोगों के लिए देश भर में घूमने के लिए रेल की यात्रा सबसे सुखद और आरामदायक मानी जाती है. ज्यादातर लोग ट्रेन में ही सफर करते हैं, मगर आप ट्रेन पकड़ने के लिए किसी स्टेशन पर जायें और बारिश आ जाये अथवा कड़ी धूप से बचने की कोई व्यवस्था नहीं हो, तो आप कैसा महसूस करेंगे. यही हाल है पर्यटक स्थल पावापुरी स्टेशन का. 2014 के पूर्व पावापुरी स्टेशल को हाल्ट का दर्जा था, मगर करीब दो वर्ष पूर्व इसको स्टेशन का दर्जा मिल गया. स्टेशन का दर्जा मिलने के बाद इस स्टेशन का उपयोग करनेवाले यात्रियों के अलावा आसपास के गांवों के लोगों में इसके विकास व सुविधाएं बढ़ने की उम्मीद बढ़ी थी. करीब दो साल बीत गये, मगर आज तक इस स्टेशन की बुनियादी सुविधाओं में इजाफा नहीं हुआ. पावापुरी स्टेशन पर शौचालय, वेटिंग रूम, यात्री शेड का अभाव है. पेयजल के लिए दो चापाकल हैं, जिसमें एक खराब पड़ा है.
चलती हैं 10 अप व 10 डाउन गाड़ियां : इस रूट पर बुध पूर्णिमा एक्सप्रेस, श्रमजीवी एक्सप्रेस, इंटरसिटी, डीएमयू, राजगीर-दानापुर, राजगीर-दनियावां, बाख्तियारपुर-गया समेत करीब दस अप व दस डाउन गाड़ियां चलती हैं. यात्रियों से प्रतिदिन 20 से 25 हजार की आमदनी होती है. कंप्यूटरीकृत टिकट की व्यवस्था होने पर आय में काफी वृद्धि हो सकती है.
कंप्यूटरीकृत टिकट की व्यवस्था नहीं आज भी मिल रहा है कूट का टिकट
यहां पर्यटकों का होता है आना-जाना
पावापुरी स्टेशन पर आज भी कंप्यूटरीकृत टिकट की व्यवस्था नहीं है. यहां आज भी आदम जमाने का कूट का टिकट मिलता है. वह भी दानापुर ओर मोकामा तक ही. इससे आगे जाने वाले रेलयात्रियों को दूसरे स्टेशन से टिकट लेना पड़ता है. इस स्टेशन पर रिजर्वेंशन की भी व्यवस्था नहीं है. पर्यटक स्थल होने के कारण यहां देश भर के पर्यटकों का आना-जाना लगा रहता है. कंप्यूटरीकृत टिकट व रिजर्वेंशन की व्यवस्था नहीं होने से ऐसे पर्यटकों को फजीहत झेलनी पड़ती है.
सुरक्षा की व्यवस्था नहीं : स्टेशन पर सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है. पुलिस के नहीं रहने से इस स्टेशन पर चेन स्नैचिंग, पॉकेटमारी की घटनाएं अक्सर होती रहती हैं. जैन धर्मावलंबियों का इस स्टेशन पर आना- जाना अधिक होता है. सुरक्षा की व्यवस्था नहीं रहने से इन पर्यटकों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है.
