बैंकों की आय बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाते गोल्ड लोन

Gold loans : गोल्ड लोन ने बीते वर्षों में बैंकों को महत्वपूर्ण लाभ पहुंचाया है. इससे लोन पोर्टफोलियो बढ़ने के साथ ही ब्याज आय में भारी वृद्धि हुई है. साथ ही, प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (पीएसएल) लक्ष्यों को पूरा करने में भी मदद मिली है.

Gold loans : पिछले दो वर्षों में सोने की कीमत में हुई बढ़ोतरी और भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों में बदलाव के कारण गोल्ड लोन में 100 प्रतिशत से अधिक की तेजी देखी गयी है. अब ये नियम अधिक सुरक्षित और पारदर्शी हो गये हैं. स्वर्ण ऋण मूल्य (एलटीवी) की संरचना को स्तरीकृत किया गया है, सोने की मूल्यांकन प्रक्रिया पारदर्शी और कड़ी कर दी गयी है. गोल्ड मेटल लोन की अवधि 180 दिनों से बढ़ाकर 270 दिनों की कर दी गयी है. ये बदलाव गोल्ड लोन को अधिक आसान और सुरक्षित बनाते हैं, जिससे गोल्ड लोन वितरण में तेज वृद्धि दर्ज हो रही है. गोल्ड लोन पोर्टफोलियो का विस्तार इतना बढ़ गया है कि यदि इसे अन्य ऋण पोर्टफोलियो से अलग कर दिया जाये, तो कई बैंकों की वास्तविक ऋण वृद्धि 100 से 400 आधार अंकों तक कम हो सकती है.


गोल्ड लोन ने बीते वर्षों में बैंकों को महत्वपूर्ण लाभ पहुंचाया है. इससे लोन पोर्टफोलियो बढ़ने के साथ ही ब्याज आय में भारी वृद्धि हुई है. साथ ही, प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (पीएसएल) लक्ष्यों को पूरा करने में भी मदद मिली है. इसके अतिरिक्त, गोल्ड लोन के बढ़ते पोर्टफोलियो से गैर निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) का प्रतिशत कुल ऋण में कम हुआ है. गोल्ड लोन एक सुरक्षित ऋण है, जो 18 से 24 कैरेट सोने के बदले दिया जाता है. इसमें सोने के आभूषणों को गिरवी रखा जाता है. जब तक ऋण की पूरी राशि नहीं चुकायी जाती, तब तक बैंक सोने के आभूषणों को मुक्त नहीं करता.

आम तौर पर यह ऋण चुकौती एकमुश्त की जाती है. अप्रैल, 2026 से गोल्ड लोन को और सुरक्षित बनाने के लिए ऋण राशि के आधार पर नया लोन टू वैल्यू (एलटीवी) तय किया जायेगा. उदाहरण के लिए, 2.5 लाख रुपये तक एलटीवी 85 होगा, यानी मार्जिन 15 प्रतिशत. वहीं, 2.5 से पांच लाख रुपये तक एलटीवी 80 प्रतिशत रहेगा और पांच लाख से ऊपर यह 75 प्रतिशत होगा. ऋण राशि को एलटीवी से जोड़ने का मुख्य उद्देश्य है कि यदि सोने की कीमत गिरती है, तो एलटीवी इसे कवर कर सके और बैंक को नुकसान न हो.

हाल के वर्षों में करूर वैश्य बैंक, सिटी यूनियन बैंक, फेडरल बैंक और साउथ इंडियन बैंक जैसे बैंकों में गोल्ड लोन का हिस्सा काफी बढ़ गया है. आज इन बैंकों के कुल कर्जे में से एक बड़ा हिस्सा केवल गोल्ड लोन से जुड़ा है. वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी के लोकसभा में दिये बयान के अनुसार, मई, 2025 तक गोल्ड लोन की कुल राशि बढ़कर 2.51 लाख करोड़ रुपये हो गयी, जो मई, 2024 में 1.16 लाख करोड़ रुपये थी.


एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर, 2025 तक गोल्ड लोन पोर्टफोलियो 15.6 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, क्योंकि इसकी कीमत में वृद्धि ने बैंकों को इस सुरक्षित क्षेत्र में अधिक निवेश करने के लिए प्रेरित किया है. नवंबर, 2025 में गोल्ड लोन पोर्टफोलियो में 42 प्रतिशत की वृद्धि देखी गयी. इन्वेस्टमेंट इनफॉर्मेशन एंड क्रेडिट रेटिंग एजेंसी (इक्रा) ने भी अनुमान लगाया है कि मार्च, 2026 तक संगठित गोल्ड लोन बाजार 15 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है. सोने की कीमत में वृद्धि और भारतीय रिजर्व बैंक की असुरक्षित ऋणों पर सख्ती के कारण गोल्ड लोन पोर्टफोलियो बढ़ रहा है.

बीते वर्ष की तुलना में इस वर्ष गोल्ड लोन का वितरण 91 प्रतिशत तक बढ़ गया है. वर्ष 2026 की शुरुआत में सोने की कीमतें बढ़ीं, लेकिन कुछ सप्ताह बाद मुनाफावसूली और वैश्विक घटनाओं के कारण इसमें गिरावट आयी. वर्तमान स्थिति को देखते हुए प्रतीत होता है कि 2025 में मजबूत वृद्धि के बाद, 2026 में सोने का रिटर्न मध्यम हो सकता है. हालांकि, अनिश्चितता के कारण इसकी कीमत उच्च स्तर पर स्थिर रह सकती है. गोल्डमैन सैक्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 2026 के अंत तक सोने की कीमत लगभग 5,400 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है, जिससे भारत में इसकी कीमत 1.7 लाख से 1.9 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के बीच रह सकती है.


अमेरिका-ईरान संघर्ष, फेडरल रिजर्व की नीति, भू-राजनीतिक तनाव और केंद्रीय बैंकों की सोने की निरंतर खरीदारी समग्र सोने की कीमतों को उच्च स्तर पर बनाये रख सकती है. गौरतलब है कि सोने की कीमत में गिरावट बैंक के लिए नुकसानदायक हो सकती है, क्योंकि, इससे बैंकों के सोने की गारंटी वाले ऋण प्रभावित हो सकते हैं. बैंक मार्जिन मनी के आधार पर गोल्ड लोन देते हैं, और यदि सोने की कीमत मार्जिन मनी से नीचे गिर जाती है, तो बैंक को नुकसान उठाना पड़ेगा. इससे ऋण प्रक्रिया धीमी हो सकती है, एनपीए बढ़ेगा, और लाभ पर दबाव आयेगा.

फिलहाल, कर्ज के मुकाबले सोने की कीमत या मार्जिन मनी अधिक होने के कारण बैंक का लोन सुरक्षित है. अंत में, गोल्ड लोन बैंकों के कारोबार में वृद्धि और उनकी आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, पर इसकी स्थिरता काफी हद तक सोने की कीमत पर निर्भर है. यदि कीमत गिरती है, तो इससे एनपीए के स्तर, कर्ज की रफ्तार और बैंकों की आय सीधे तौर पर प्रभावित हो सकती है. बहरहाल, वर्तमान परिदृश्य में सोने की कीमतों में गिरावट आने लगी है. बैंकों को संभावित नुकसान से बचने के लिए सावधानी बरतने की जरूरत है.
(ये लेखक के निजी विचार हैं.)

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