मुहिम. टीबी बीमारी पर काबू पाने की पहल
दवा स्ट्रीप पर अंकित नंबर पर मरीज करेंगे डायल
डायल करते ही पता चल जायेगा विभाग
बिहारशरीफ : अब दवा खाने के साथ ही मरीजों को कॉल करनी होगी. दवा स्ट्रीप पर अंकित नंबर पर ही मरीज डायल करेंगे. नंबर डायल करते ही पता चल जायेगा कि मरीज दवा खा ली है. जी हां यह व्यवस्था बहुत जल्द ही टीबी विभाग में होने जा रही है. यह नयी व्यवस्था इसलिए की जा रही है कि यक्ष्मा बीमारी पर पूरी तरह से काबू पायी जा सके और मरीज इलाज पूर्ण होने के बाद पुन: डिफॉल्टर नहीं हो पाये. इस नयी व्यवस्था से मरीजों को कई फायदे होंगे. साथ ही, विभाग को टीबी पर काबू पाने में आसानी होगी.
चार अंकों का होगा नंबर
टीबी मरीजों को दी जाने वाली जीवनरक्षक दवा की स्ट्रीप के अंदर चार अंकों का नंबर अंकित दर्ज होगा. जैसे ही मरीज दवा खाने के लिए स्ट्रीप खोलेंगे तो उस स्ट्रीप पर अंक अंकित होगा. संबंधित अंक पर मरीज नंबर डायल करेंगे तो वह अंक जिला यक्ष्मा केंद्र के सिस्टम पर आ जायेगा. उस नंबर को सिस्टम अपनी अधीन कर लेगा. यानी की सिस्टम पर नंबर पंजीकृत हो जायेगा. इससे जिला यक्ष्मा केंद्र के कर्मी समझ जायेंगे की संबंधित रोगी ने दवा खाली है. विभाग इतना ही नहीं संबंधित रोगी की निगरानी उसके परिजनों को करने की जिम्मेवारी देगी. ताकि सही रूप से पता चल सके की रोगी ने दवा खा ली है.
वजन के मुताबिक दी जायेगी दवा
टीबी के मरीजों को अब उसके शरीर के वजन के मुताबिक ही दवा का डोज दिया जायेगा. ताकि रोगी अच्छी तरह से दवा पचा सके. मरीजों के शरीर के वजन करने के लिए जिले के सभी पीएचसी, रेफरल व अनुमंडलीय व सदर अस्पतालों में वजन मशीन जिला यक्ष्मा विभाग की ओर से उपलब्ध करा दी गयी है. चिकित्सक की देखरेख में टीबी के मरीजों का वजन किया जायेगा. वजन के मुताबिक उसे टीबी बीमारी से ठीक होने के लिए दवा का डोज दिया जायेगा. यह दवा मरीजों को विभाग की ओर से नि:शुल्क उपलब्ध करायी जायेगी. यह मशीन जिला यक्ष्मा केंद्र में भी उपलब्ध है. यहां आने वाले मरीजों का वजन इस मशीन से किया जायेगा.
अब रोजाना खानी होगी दवा
टीबी से पीड़ित मरीजों को कुछ महीनों बाद अब हर रोज दवा खानी पड़ेगी. अभी मरीज एक दिन बीच कर इसकी दवा खाते हैं. लेकिन मरीजों को डिफॉल्टर होने से बचाने के लिए विभाग ने अब मरीजों को रोज दवा खिलाने की व्यवस्था करने जा रही है. इससे मरीजों को पुन: इस बीमारी की चपेट में आने से संभावना कम हो जायेगी. यानी की इस विधि से दवा का सेवन करने से टीबी के कीटाणु पर पूरी तरह से काबू पायी जा सकती है.
पांच राज्यों में पायलट प्रोजेक्ट होगा शुरू
फिलहाल यह व्यवस्था पायलट प्रोजेक्ट के तहत की जा रही है. बिहार राज्य के साथ-साथ पांच राज्यों में यह व्यवस्था पहली बार होगी. इन राज्यों में यह व्यवस्था सफलीभूत होने पर अन्य राज्यों में भी लागू किया जायेगा. बिहार के अलावा,महाराष्ट्र, केरल,हिमाचल प्रदेश व सिक्किम में की जा रही है. सरकार की योजना है कि लोगों को टीबी बीमारी से मुक्त बनाना.
क्या कहते हैं अधिकारी
यह नयी व्यवस्था हाल के महीनों में की जायेगी. इसकी प्रक्रिया चल रही है. मरीजों को रोज दवा खाने से बीमारी पर पूरी तरह से काबू पायी जा सकती है. मरीज डिफॉल्डर नहीं हो सकेंगे.
डॉ रविंद्र कुमार,जिला यक्ष्मा पदाधिकारी,नालंदा
