पुलिया बन गई, रास्ता बनाना भूल गए… पूर्वी चंपारण में मनरेगा योजना पर उठे सवाल

Motihari Approach Road: पताही में मनरेगा से बनी 8 लाख की पुलिया बिना एप्रोच पथ के मिली. पीओ की जांच में मामला उजागर हुआ. अब फाइल, एमबी और भुगतान की जांच कर रिपोर्ट वरीय अधिकारियों को भेजी जाएगी.

मोतिहारी के पताही से विकास कुमार सिह की रिपोर्ट

Motihari Approach Road: पूर्वी चंपारण के पताही प्रखंड में करीब 8 लाख रुपये की लागत से बनी मनरेगा की पुलिया लोगों के लिए फिलहाल बेकार साबित हो रही है. वजह यह है कि पुलिया तो बन गई, लेकिन उससे जुड़ने वाला एप्रोच पथ ही नहीं बनाया गया. शिकायत मिलने पर मनरेगा पीओ ने जांच की, जिसमें पहली नजर में एप्रोच पथ नहीं मिलने की पुष्टि हुई. 

“पुलिया बनी, लेकिन रास्ता अधूरा” 

पुलिया तैयार है, लेकिन दोनों ओर एप्रोच पथ नहीं होने के कारण लोगों को इसका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है. हालांकि, पीओ के मौके पर पहुंचने से पहले पुलिया के एक हिस्से पर कुछ मिट्टी डाली गई थी, लेकिन इससे एप्रोच पथ तैयार नहीं माना जा सकता. इस लापरवाही के कारण पुलिया का पूरा लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है.

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मनरेगा पीओ ने किया निरीक्षण

यह पुलिया पताही प्रखंड की परसौनी कपूर पंचायत के रामपुर मनोरथ से फेनहारा जाने वाली सड़क पर मनरेगा योजना के तहत बनाई गई है. बुधवार को मनरेगा पीओ ब्रजेश त्रिपाठी स्थल पर पहुंचे और पुलिया का निरीक्षण किया. इस दौरान उन्होंने आसपास के ग्रामीणों, जूनियर इंजीनियर (जेई) और रोजगार सेवक से भी जानकारी ली.

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अब किन बिंदुओं की जांच होगी?

  • एप्रोच पथ क्यों नहीं बना?
  • एमबी कैसे तैयार हुई?
  • भुगतान हुआ या नहीं?
  • जिम्मेदारी किसकी है?

रिपोर्ट जाएगी वरीय अधिकारियों को

मनरेगा पीओ ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर वरीय अधिकारियों को भेजी जाएगी. यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही सामने आती है तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी. 

जांच रिपोर्ट आने के बाद यह साफ होगा कि यह सिर्फ लापरवाही थी या नियमों का उल्लंघन.

योजना एक नजर में

  • योजना: मनरेगा
  • स्थान: परसौनी कपूर पंचायत
  • लागत: लगभग 8 लाख रुपये
  • स्थिति: पुलिया बनी, एप्रोच पथ नहीं
  • जांच: मनरेगा पीओ ने की
  • अगला कदम: रिपोर्ट वरीय अधिकारियों को

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By Aniket kumar

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अपने पत्रकारिता करियर में उन्होंने उत्तर प्रदेश विधानसभा उपचुनाव और बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को जमीनी स्तर पर कवर किया है. प्रभात खबर के साथ बिहार विधानसभा चुनाव कवरेज के दौरान उन्होंने करीब 50 विधानसभा क्षेत्रों का दौरा किया, जहां मतदाताओं से सीधे संवाद किया और प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में चौपाल कार्यक्रम किए. नेताओं से सीधे सवाल पूछने के साथ उन्होंने जनता के बीच जाकर कई जमीनी मुद्दों को वीडियो रिपोर्ट के जरिए सामने रखा. चुनाव के दौरान अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में समय बिताने और लोगों के बीच रहकर रिपोर्टिंग करने के अनुभव उन्हें डेस्क पर खबरों को बेहतर संदर्भ के साथ समझने और प्रस्तुत करने में मदद करते हैं.

प्रभात खबर से पहले वे राजस्थान पत्रिका और न्यूजट्रैक जैसे मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुके हैं. उन्होंने शुरुआती शिक्षा मुजफ्फरपुर में अंग्रेजी माध्यम से प्राप्त की और इसके बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की.

बदलते मीडिया परिदृश्य और AI के दौर की पत्रकारिता को समझने में भी उनकी लगातार रुचि है. वे नए AI टूल्स और तकनीकों को सीखते हैं और उन्हें पत्रकारिता के काम में उपयोग करने के तरीकों पर लगातार प्रयोग करते रहते हैं. खाली समय में साहित्यिक किताबें पढ़ना और वीडियो बनाना उन्हें पसंद है. उनके लिए पत्रकारिता एक लगातार सीखने और बेहतर करने की प्रक्रिया है.

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