बिहार का सबसे ऊंचा बौद्ध स्तूप बनेगा ईको-टूरिज्म का केंद्र, सरकार ने तैयार किया मास्टर प्लान

विश्व के सबसे ऊंचे केसरिया स्तूप को ईको-टूरिज्म के एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी जोर-शोर से चल रही है. निर्माण कार्यों और विकास योजनाओं की समीक्षा की गई है, जिसमें सरोत्तर झील को भी पर्यटन सर्किट में जोड़ने की योजना है.

केसरिया स्तूप: विश्व के सबसे ऊंचे और ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण बौद्ध स्तूपों में शामिल केसरिया स्तूप को अब ईको-टूरिज्म के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी तेज हो गई है. पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर ने अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक और स्थलीय निरीक्षण कर विकास योजनाओं की समीक्षा की. इस दौरान स्तूप और उसके आसपास के क्षेत्र को एक समग्र पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित करने की रूपरेखा तैयार की गई.

निर्माण कार्य और प्रस्तावित स्थलों का लिया जायजा

अपर मुख्य सचिव ने केसरिया स्तूप के निकट चल रहे निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया और विकास के लिए प्रस्तावित स्थलों का भी दौरा किया. इस दौरान पूर्वी चंपारण के डीएम सौरभ सुमन यादव, क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक (मुजफ्फरपुर), वन प्रमंडल पदाधिकारी अमित कुमार, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधिकारी और अन्य विभागीय पदाधिकारी मौजूद रहे.

सरोत्तर झील को भी पर्यटन सर्किट में जोड़ने की तैयारी

समीक्षा बैठक में जिला प्रशासन ने केसरिया स्तूप के समग्र विकास के लिए भूमि उपलब्धता के विभिन्न विकल्पों पर चर्चा की. साथ ही, निकट स्थित सरोत्तर झील को भी पर्यटन सर्किट का हिस्सा बनाने का प्रस्ताव रखा गया. वन प्रमंडल पदाधिकारी ने बताया कि सरोत्तर झील को आर्द्रभूमि (वेटलैंड) घोषित करने का प्रस्ताव पहले ही भेजा जा चुका है. यहां ईको-टूरिज्म की व्यापक संभावनाएं हैं और भविष्य में पहुंच मार्ग विकसित करने की योजना है.

एएसआई के नियमों के अनुसार होगा विकास

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधिकारियों ने बताया कि स्तूप की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 100 मीटर की परिधि में किसी भी प्रकार का निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा. वहीं 100 से 200 मीटर के दायरे में केवल सात मीटर ऊंचाई तक के निर्माण की अनुमति होगी. अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर ने निर्देश दिया कि विकास कार्यों में ऊंची कंक्रीट इमारतों के बजाय ईको-फ्रेंडली हट्स बनाए जाएं. साथ ही पूरे परिसर में हरित क्षेत्र विकसित करने और बेहतर लैंडस्केपिंग पर विशेष ध्यान दिया जाए.

जैन पार्क और विपासना केंद्र का भी प्रस्ताव

पर्यटकों को आकर्षित करने और केसरिया स्तूप की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक पहचान को मजबूत करने के लिए बैठक में कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए. क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक ने परिसर में जैन पार्क विकसित करने का प्रस्ताव रखा, जबकि चकिया के अनुमंडल पदाधिकारी ने यहां आने वाले पर्यटकों के लिए विपासना केंद्र की गतिविधियां शुरू करने का सुझाव दिया. अधिकारियों का मानना है कि इन योजनाओं के पूरा होने के बाद केसरिया स्तूप इतिहास, प्रकृति और आध्यात्म का अनूठा संगम बनकर देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करेगा.

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By Intejarul haq

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