मोतिहारी में बैटरी डाउन होने के बाद भी चलेंगे इलेक्ट्रिक वाहन

अब अगर रास्ते में इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी डिस्चार्ज होती है तो परेशान होने की जरूरत नहीं है.

By RANJEET THAKUR | January 11, 2026 10:04 PM

मोतिहारी. अब अगर रास्ते में इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी डिस्चार्ज होती है तो परेशान होने की जरूरत नहीं है. अब प्रशासन ने इसके लिये जिले के 18 स्थानों पर चार्जिंग स्टेशन बनायेगा. शहर के प्रमुख चौराहों व हाइवे के किनारे पेट्रोल पंपों की तरह ही इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन खोले जायेंगे. इससे मोतिहारी सहित राज्य के करीब 18 नगर निगमों में लगेंग चार्जिग स्टेशन. इसको ले राज्य परिवहन विभाग के सचिव राजकुमार ने मोतिहारी सहित प्रदेश के सभी प्रमुख करीब 18 नगर निगमों के नगर आयुक्तों को पत्र भेजकर उपयुक्त जमीन /लोकेशन चिन्हित करने का निर्देश दिया है.विभाग ने इसके लिए 12 जनवरी तक की समय सीमा तय की है. इस योजना के धरातल पर उतरने से इ-रिक्शा चालकों और निजी इलेक्ट्रिक वाहन मालिकों को बड़ी राहत मिलेगी.इलेक्ट्रिक वाहनों (इवी) को बढ़ावा मिलेगा. चार्जिंग की समस्या को दूर होगी. इसको ले पेट्रोल-डीजल की निर्भरता कम करने और पर्यावरण को बचाने के लिए केंद्र सरकार की पीएम इ-ड्राइव योजना अब धरातल पर उतरने वाली है. इस योजना के धरातल पर उतरने से इ-रिक्शा चालकों और निजी इलेक्ट्रिक वाहन मालिकों को बड़ी राहत मिलेगी.

घर के बजाय सड़क किनारे सुरक्षित चार्जिंग की सुविधा

जिले में वर्तमान में इ-वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ी है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जिले में करीब 10 हजार,इलेक्ट्रिक वाहन रजिस्टर्ड हैं. इनमें सबसे बड़ी संख्या ऑटो व इ-रिक्शा की है. इसके अलावा कार, बाइक और स्कूटी भी सड़कों पर दौड़ रही हैं. अभी चार्जिंग स्टेशन की कमी के कारण इ-रिक्शा चालकों को घरेलू बिजली या अवैध पॉइंट पर निर्भर रहना पड़ता है, अब सरकारी स्टेशन बनने से उन्हें सस्ती और सुरक्षित चार्जिंग की सुविधा मिलेगी. नगर निगम को निर्देश दिया गया है कि वे अपने नियंत्रण वाले क्षेत्रों में ऐसी जमीनें तलाशें जहां वाहन आसानी से पहुंच सकें. शहर के अंदर बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन के पास, प्रमुख बाजार और नगर निगम की खाली जमीनों पर स्टेशन बनेंगे. इसके अलावा मुजफ्फरपुर से गुजरने वाले एनएच पर भी जमीन चिन्हित की जा रही है. ताकि, दूसरे शहरों से आने वाले वाहन भी चार्ज हो सकें.

विभाग ने दो श्रेणियों में मांगी है रिपोर्टपरिवहन विभाग ने दो प्रपत्रों में जमीन का विवरण मांगा है. प्रपत्र-ए में नगर निगम और शहरी क्षेत्रों के अंदर उपलब्ध स्थल का ब्योरा देना है. वहीं, प्रपत्र-बी में नेशनल हाइवे (एनएच) और एक्सप्रेस-वे के किनारे स्थित उपयुक्त स्थान के बारे में ब्योरा देना है.

क्या है पीएम इ-ड्राइव योजना

केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का कुल बजट 10,900 करोड़ रुपये हैं. इसमें से 2,000 करोड़ रुपये सिर्फ चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर (बुनियादी ढांचे) के विकास के लिए रखे गये हैं. बिहार में परिवहन विभाग को इस योजना के क्रियान्वयन के लिए “नोडल विभाग ” बनाया गया है. नगर निकायों से रिपोर्ट मिलने के बाद प्रस्ताव को भारत सरकार के भारी उद्योग मंत्रालय (एमएचआइ) के पोर्टल पर अपलोड किया जायेगा, जिसके बाद चार्जिंग स्टेशनों के निर्माण की प्रक्रिया शुरू होगी.

क्या कहते हैं अधिकारी

जिले में इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन समय की मांग है. सरकार के पत्र के आलोक में शहरी क्षेत्रों और हाइवे पर लोकेशन मिलते ही प्रस्ताव केंद्र को भेजा जायेगा. इसके लिए जमीन चिह्नित कर आगे की कार्रवाई की जायेगी.

निशांत सिहारा, प्रभारी नगर आयुक, मोतिहारीB

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