डेढ़ वर्ष पूर्व 62 यात्री समेत त्रिशूली नदी में बह गई थी बस, अब मिले उसके टुकड़े
नेपाल के चितवन जिला के सिमलताल क्षेत्र के पास त्रिशूली नदी किनारे बस जैसी किसी सवारी वाहन के टुकड़े दिखाई दिए हैं.
रक्सौल. नेपाल के चितवन जिला के सिमलताल क्षेत्र के पास त्रिशूली नदी किनारे बस जैसी किसी सवारी वाहन के टुकड़े दिखाई दिए हैं. रविवार की सुबह सिमलताल से कुछ नीचे तनहुं की ओर पड़ने वाले नदी किनारे क्षेत्र में बालू में दबी अवस्था में वाहन के पार्ट्स मिलने की सूचना पुलिस को प्राप्त हुई. जिला पुलिस कार्यालय चितवन के डीएसपी रविन्द्र खनाल के अनुसार, सिमलताल से करीब 200 मीटर नीचे तनहु की ओर नदी किनारे बस जैसी किसी सवारी गाड़ी के टुकड़े देखे गए हैं. सूचना मिलने के बाद पुलिस की टीम मौके पर पहुंचकर जांच में जुटी हुई है. बालू को हटाकर बस के टुकड़े को निकालने का काम शुरू किया गया है. डीएसपी श्री खनाल के अनुसार 12 जुलाई 2024 को सिमलताल के पास भूस्खलन के कारण गणपति डिलक्स और एंजल डिलक्स दो बसे एक साथ त्रिशुली नदी के तेज धार में बह गई थी. फिलहाल नदी किनारे मिले इन अवशेषों की पहचान और यह स्पष्ट करने के लिए कि ये किस बस के हैं, आगे की जांच जारी है. घटना ने एक बार फिर उस भयावह हादसे की याद ताजा कर दी है, जिसने कई परिवारों को गहरे शोक में डाल दिया था. इस दर्दनाक हादसे के करीब डेढ़ साल बाद, दुर्घटनाग्रस्त बस बालू में दबी अवस्था में मिली है. इस भीषण दुर्घटना में बस में सवार बारा जिले के 6 यात्रियों सहित कुल 62 यात्री लापता हो गए थे, जबकि 3 यात्रियों ने नदी पार कर किसी तरह अपनी जान बचाई थी. लंबे समय तक चले खोज एवं बचाव अभियान के दौरान केवल 24 यात्रियों के शव ही बरामद किए जा सके थे. रविवार को जिस बस का अवशेष मिला है, उसके गणपति डिलक्स बस होने की आशंका जताई जा रही है. संबंधित निकायों के अनुसार, बस की पुष्टि और दुर्घटना से जुड़े अन्य पहलुओं को लेकर आगे की जांच जारी है. इस घटना ने एक बार फिर उस भयावह हादसे की याद ताजा कर दी है, जिसने दर्जनों परिवारों को आज भी गहरे शोक और पीड़ा में डूबा कर रखा है. यहां बता दे कि 12 जुलाई 2024 को तेज बारिश के बीच नारायणघाट और मुग्लिंग बाजार के बीच सिमलताल के समीप भूस्खलन हुआ था. बस में नेपाली नागरिकों के साथ-साथ 7 भारतीय नागरिक भी सवार थे. बस के नदी में गिरने के बाद से भारत के तरफ से एनडीआरफ की टीम के द्वारा नदी में गिरे हुए बस को खोजने के लिए तलाशी अभियान चलाया गया था. जबकि कई देशों की टीम भी नदी में गिरे हुए बस को खोजने के लिए आई थी, लेकिन किसी को उल्लेखनीय सफलता नहीं मिली थी. बस में सवार जिन लोगों का शव नहीं मिल सका, उनके परिजनों ने कुश का शव बनाकर उनका अंतिम संस्कार भी किया था. इस बस हादसे ने पूरे नेपाल ही नहीं भारत को भी झकझोर कर रख दिया था. इस हादसे के बाद से नेपाल सरकार ने सड़क सुरक्षा को लेकर कई तरह के नियम भी बनाए थे, जिसमें खराब मौसम की सूचना होने पर रात के समय बस के परिचालन पर रोक लगाने संबंधित कानून भी शामिल है. फिलहाल, रविवार को बस का जो अवशेष मिला है, उसके आसपास के इलाके में खोजी अभियान नेपाल पुलिस के द्वारा फिर से शुरू कर दिया गया है.
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