मधुबनी: जिले में कला-संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मिथिला चित्रकला संस्थान में ‘श्रृंगार मिथिला महोत्सव सीजन-1’ का भव्य आयोजन किया गया. जिले में इस तरह का यह पहला आयोजन था. महोत्सव का उद्घाटन मिथिला चित्रकला संस्थान के निदेशक चंद्रशेखर प्रसाद सिंह, पद्मश्री दुलारी देवी, पद्मश्री शिवन पासवान, कला एवं संस्कृति पदाधिकारी नितीश कुमार सहित अन्य अतिथियों ने किया.
महोत्सव का आयोजन मिथिला चित्रकला विकास एवं अन्वेषण परिषद, मधुबनी की ओर से किया गया. कार्यक्रम का नेतृत्व जूली झा और उदय भूषण प्रसाद निराला ने किया.
मिथिला पेंटिंग के परिधानों में रैंप वॉक रहा खास आकर्षण
कार्यक्रम में मेहंदी प्रतियोगिता, मिथिलाक्षर प्रतियोगिता और मिथिला पेंटिंग के वस्त्रों से सुसज्जित रैंप वॉक मुख्य आकर्षण रहे. मिथिला पेंटिंग की साड़ियों और परिधानों में सजी मॉडलों ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया.
मिथिला की पारंपरिक कला को आधुनिक फैशन के साथ जोड़कर प्रस्तुत किये गये रैंप वॉक को दर्शकों ने खूब सराहा.
महराय और पमरिया की प्रस्तुति ने बांधा समां
मंच पर महराय, पमरिया और लोकनृत्य जैसी पारंपरिक प्रस्तुतियों ने भी दर्शकों का मन मोह लिया. कलाकारों ने मिथिला की लोक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से जीवंत किया.
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मिथिला पेंटिंग कलाकार और स्थानीय लोग मौजूद रहे.
लुप्त होती कलाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की पहल
आयोजकों ने बताया कि महोत्सव का मुख्य उद्देश्य मिथिला की विलुप्त होती कलाओं मिथिलाक्षर, मेहंदी, महराय और पमरिया को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है. इसके साथ ही मिथिला पेंटिंग को फैशन के माध्यम से वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में भी पहल की जा रही है.
आयोजकों के अनुसार, कार्यक्रम को सफल बनाने में मालती मिश्रा, दुर्गेश कुमार, अम्बे मिश्रा, अतुल कुमार सहित कई सहयोगियों की अहम भूमिका रही.
