मधुबनी: जिले में मलेरिया की रोकथाम को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी बढ़ाने के साथ संदिग्ध मरीजों की जांच और समय पर इलाज पर जोर दिया है. जिले में वर्ष 2025 में मलेरिया के 45 मरीज मिले थे, जबकि 15 सितंबर 2026 तक 26 मरीज प्रतिवेदित हुए हैं. स्वास्थ्य विभाग की ओर से संभावित मामलों की पहचान, जांच और उपचार के साथ बीमारी के प्रसार को रोकने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है.
मलेरिया फैलाने वाले एनोफिलीज मच्छर के प्रजनन को रोकना भी नियंत्रण अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है. यह मच्छर ठहरे हुए पानी में प्रजनन करता है. ऐसे में घरों, खेतों, नालियों, गड्ढों और अन्य स्थानों पर जलजमाव कम करने पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है.
संदिग्ध मरीजों की जांच और समय पर इलाज पर जोर
स्वास्थ्य विभाग मलेरिया के संभावित मामलों की पहचान के लिए निगरानी व्यवस्था को मजबूत कर रहा है. बुखार से पीड़ित लोगों की जांच की जा रही है. मलेरिया की पुष्टि होने पर निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार उपचार उपलब्ध कराया जाता है.
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार बुखार और मलेरिया से जुड़े लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. बुखार, ठंड लगना, कंपकंपी, सिरदर्द या कमजोरी जैसे लक्षण होने पर स्वयं दवा लेने के बजाय नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जांच करानी चाहिए.
जलजमाव वाले स्थानों की पहचान पर भी नजर
स्वास्थ्य विभाग की टीम क्षेत्र में बीमारी की स्थिति की निगरानी के साथ मच्छरों के प्रजनन स्थलों की पहचान और आवश्यक नियंत्रण गतिविधियों पर काम कर रही है. घर और आसपास पानी जमा नहीं होने देना मलेरिया की रोकथाम में अहम माना जा रहा है.
बेकार पड़े डिब्बे, टायर, टूटे बर्तन और अन्य सामान में पानी जमा नहीं होने देना चाहिए. नालियों की नियमित सफाई के साथ जलजमाव की सूचना संबंधित स्तर पर देने की भी अपील की गयी है.
रात में मच्छरदानी का करें इस्तेमाल
मलेरिया से बचाव के लिए रात में सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करने की सलाह दी गयी है. स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि व्यक्तिगत स्तर पर मच्छरों से बचाव के उपायों के साथ आसपास के वातावरण को साफ रखना भी जरूरी है.
सामूहिक प्रयास से कमजोर होगी संक्रमण की श्रृंखला
सिविल सर्जन डॉ हरेंद्र कुमार ने कहा कि सामुदायिक स्तर पर स्वच्छता, जलजमाव की रोकथाम, मच्छरों से बचाव और समय पर जांच कराने से मलेरिया नियंत्रण के प्रयासों को और प्रभावी बनाया जा सकता है. उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था के साथ समुदाय भी अपने आसपास मच्छरों के प्रजनन स्थलों को खत्म करने में सहयोग करे, तो मलेरिया के संक्रमण को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है.
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