रामकथा के तीसरे दिन मुरारी बापू ने श्रृंगी ऋषि का प्रसंग सुनाया

बिहार के देवघर के नाम से प्रसिद्ध अशोक धाम में शनिवार से चल रहे नौ दिवसीय रामकथा के तीसरे दिन सोमवार को मोरारी बापू ने एक बार फिर श्रृंगी ऋषि के नाम से प्रवचन आरंभ व समापन किया.

राम से मोहब्बत ना करो कोई बात नहीं रामकथा से मोहब्बत करो: मोरारी बापू कथा के दौरान नियमित अंतराल पर श्रृंगी ऋषि के दोहे को स्वयं के साथ श्रद्धालुओं से दोहराया लखीसराय. बिहार के देवघर के नाम से प्रसिद्ध अशोक धाम में शनिवार से चल रहे नौ दिवसीय रामकथा के तीसरे दिन सोमवार को मोरारी बापू ने एक बार फिर श्रृंगी ऋषि के नाम से प्रवचन आरंभ व समापन किया. इस दौरान ‘श्रृंगी ऋषि वशिष्ठ बुलावा, पुत्रकाम शुभ यज्ञ करावा, भगति सहित मुनि आहुति दीन्हें, प्रगटे अगिनी चरु कर लीन्हें, जो वशिष्ठ कछु हृदय बिचारा, सकल काजू भा सिद्ध तुम्हारा’ दोहे का पाठ करते हुए पूरी कथा के दौरान इस दोहे को श्रद्धालुओं के साथ बार-बार दोहराया. श्रृंगी ऋषि प्रसंग के इर्द-गिर्द पुरी कथा को संपन्न किया. उन्होंने अंधकार को प्रकाश का स्रोत बताते हुए भगवान सूर्य का जिक्र करते हुए कहा कि सूरज संकल्प करके नहीं निकलते हैं कि किसी का नाश करना है, मगर उनके उगने से अंधेरा का स्वत: नाश हो जाता है. कथा से क्या मिलता है, इसकी व्याख्या करना संभव नहीं है. आप कथा सुन रहे हैं यह आपके भगवान के प्रति आस्तिक होने का प्रमाण है. उन्होंने कहा राम से मोहब्बत ना करो कोई बात नहीं रामकथा से मोहब्बत करो. सब कुछ छोड़ो पर रामकथा मत छोड़ो. उन्होंने नियमित कथा सुनने के बजाय साल में एक बार ही मगर उसे पूरी ध्यान और श्रद्धा के साथ सुनने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि पहले गुरु की याद आती है या गुरु आते हैं. प्रश्न के जवाब में उन्होंने कहा इंसान को कहां ताकत है जो गुरु को याद कर सके. गुरु पहले आते हैं, उसके बाद अपनी याद दिलाते हैं. कथा में जो आते हैं उनकी छोटी बड़ी कामना या तो पूर्ण हो जाती है या शून्य हो जाती है. धर्म मिलता है, तो जीवन का घोर रहस्य खुल जाता है. संसार में भगवान राम व कृष्ण हैं जो हमसे प्रेम करते हैं. एक जिज्ञासु के प्रश्न का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उनसे पूछा गया कि आप राम, कृष्ण, हनुमान या अन्य भगवान का दर्शन करते हैं या दर्शन किये हैं तो उन्होंने कहा मैं खुद का दर्शन करता हूं कि मेरे अंदर कितनी कमजोरी है और कितनी समाप्त हुई है. उन्होंने कहा राम की दर्शन कि मुझे अभिलाषा भी नहीं है. ना कभी राम के दर्शन का प्रयास किया हूं यह करूंगा. महात्मा स्वयं यज्ञ होते हैं उनके आगमन मंत्र से क्षेत्र का कल्याण सुनिश्चित हो जाता है. उन्होंने श्रद्धालुओं से खुद भजन व दूसरों को भोजन करने का आग्रह किया. बोले प्रसाद के बिना कोई यज्ञ पूर्ण नहीं होता. पुत्र प्राप्ति के लिए पुत्र कामेष्टि यज्ञ की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि वशिष्ठ मुनि के सलाह पर श्रृंगी ऋषि को यज्ञ में आमंत्रित किया व उनके खीर रूपी प्रसाद से पुत्र रत्न को राजा दशरथ ने प्राप्त किया. ग्रंथ मुखी व गुरु मुखी की चर्चा करते हुए कहा कि ग्रंथमुखी से विद्वान बनोगे, पंडित बनोगे, मगर गुरुमुखी से बुद्ध पुरुष बन जाओगे. इसलिए उन्होंने ग्रंथमुखी से गुरुमुखी को श्रेष्ठ बताया. मौके पर डॉ कुमार अमित, डॉ प्रवीण कुमार सिन्हा, मंटू नटराज, गौतम गिरीयगे, सुनीता देवी, कविता देवी, बबीता देवी, बुलबुल देवी एवं पुतुल देवी सहित अन्य लोग मौजूद थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >