Kaimur News : कैमूर जिले के सरस्वती विद्या निकेतन (मॉडल स्कूलों) में विज्ञान शिक्षा को अधिक प्रभावी और प्रयोगात्मक बनाने के लिए शिक्षा विभाग ने सख्त निर्देश जारी किए हैं. जिला शिक्षा पदाधिकारी साकेत रंजन की अध्यक्षता में शुक्रवार को बिहार शिक्षा परियोजना कार्यालय के सभा कक्ष में मॉडल विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों और विज्ञान शिक्षकों की बैठक हुई. बैठक में विज्ञान प्रयोगशालाओं को नियमित रूप से विद्यार्थियों के उपयोग में लाने, आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने और प्रत्येक प्रयोग का दस्तावेजीकरण करने पर विशेष जोर दिया गया. कैमूर में 2026 में 11 सरस्वती विद्या निकेतन (आदर्श विद्यालय) शुरू किए गए हैं, जिनमें विज्ञान एवं कंप्यूटर प्रयोगशालाओं समेत आधुनिक शैक्षणिक सुविधाएं विकसित की गयी हैं.
किताबों तक सीमित नहीं रहेगी विज्ञान की पढ़ाई
बैठक में स्पष्ट किया गया कि विज्ञान की पढ़ाई केवल किताबों और कक्षा तक सीमित नहीं रहनी चाहिए. विद्यार्थियों को वैज्ञानिक अवधारणाओं को समझने के लिए नियमित रूप से प्रयोग, गतिविधि और मॉडल आधारित शिक्षण का अवसर दिया जाए. प्रयोगशालाओं को सिर्फ उपकरण रखने की जगह के बजाय विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, जिज्ञासा, तार्किक क्षमता, समस्या समाधान और नवाचार की भावना विकसित करने वाले सक्रिय केंद्र के रूप में विकसित करने का निर्देश दिया गया.
एक सप्ताह में पूरी करनी होगी प्रायोगिक सामग्री की कमी
विद्यालयों में विज्ञान विषय के प्रायोगिक कार्यों के लिए निर्धारित सामग्री की विद्यालयवार समीक्षा करने को कहा गया है. यदि किसी विद्यालय में जरूरी उपकरण या सामग्री उपलब्ध नहीं है और इसके कारण विद्यार्थियों का प्रयोगात्मक कार्य प्रभावित हो रहा है, तो प्रधानाध्यापक और संबंधित विज्ञान शिक्षक प्राथमिकता के आधार पर एक सप्ताह के भीतर उसकी उपलब्धता सुनिश्चित करेंगे.
इसके साथ ही प्रयोगशाला में मौजूद उपकरणों और अन्य सामग्रियों को व्यवस्थित रखने तथा उपलब्ध संसाधनों के अनुसार विद्यार्थियों से नियमित प्रयोग कराने का निर्देश दिया गया. शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया कि संसाधन उपलब्ध होने के बावजूद प्रयोगशाला का उपयोग नहीं किया गया तो इसका उद्देश्य ही विफल हो जाएगा.
हर प्रयोग का बनेगा रिकॉर्ड, निरीक्षण में मांगे जाएंगे साक्ष्य
जिला शिक्षा पदाधिकारी ने निर्देश दिया कि विद्यालय में होने वाले प्रत्येक प्रायोगिक कार्य का अनिवार्य रूप से दस्तावेजीकरण किया जाए. इसके लिए प्रयोगशाला में निर्धारित रजिस्टर या अभिलेख संधारित करना होगा. इसमें प्रयोग की तिथि, प्रयोग का नाम, संबंधित अध्याय, कक्षा और सेक्शन, विज्ञान शिक्षक का नाम, विद्यार्थियों की संख्या, इस्तेमाल की गयी सामग्री और उपकरण, प्रयोग का उद्देश्य, विद्यार्थियों का अधिगम और निष्कर्ष दर्ज किया जाएगा.
जरूरत के अनुसार विद्यार्थियों की गतिविधियों के फोटो और अन्य साक्ष्य भी सुरक्षित रखने होंगे. विद्यालय निरीक्षण के दौरान अब केवल प्रयोगशाला की भौतिक स्थिति नहीं देखी जाएगी, बल्कि यह भी जांचा जाएगा कि उसका वास्तविक उपयोग विद्यार्थियों के लिए हो रहा है या नहीं.
लैब बंद मिली तो तय होगी शिक्षक की जिम्मेदारी
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया कि प्रयोगशाला सुव्यवस्थित नहीं मिलने या उपलब्ध संसाधनों के बावजूद नियमित प्रयोग नहीं कराने पर संबंधित प्रधानाध्यापक और विज्ञान शिक्षक की जिम्मेदारी तय की जाएगी. विशेष रूप से प्रयोगशाला बंद मिलने अथवा प्रायोगिक कार्यों से जुड़े अभिलेख और साक्ष्य उपलब्ध नहीं होने पर संबंधित विज्ञान शिक्षक के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है.
‘करके सीखने’ की पद्धति पर रहेगा जोर
बैठक में विज्ञान शिक्षकों से विद्यार्थियों को ‘लर्निंग बाय डूइंग’ यानी करके सीखने का अवसर देने को कहा गया. शिक्षकों को प्रत्येक पाठ और वैज्ञानिक अवधारणा के अनुसार प्रयोग, गतिविधि, मॉडल, स्थानीय संसाधन या सरल वैज्ञानिक उपकरणों के माध्यम से बच्चों को समझाने पर जोर दिया गया.
प्रयोग के दौरान अधिक से अधिक विद्यार्थियों की भागीदारी सुनिश्चित करने को कहा गया, ताकि बच्चे केवल प्रयोग देखें नहीं, बल्कि स्वयं प्रयोग करें, परिणामों का अवलोकन करें, उसे दर्ज करें और निष्कर्ष तक पहुंचें.
प्रधानाध्यापकों को नियमित अनुश्रवण की जिम्मेदारी
प्रधानाध्यापकों को प्रयोगशाला की स्थिति, आवश्यक सामग्री की उपलब्धता और प्रायोगिक कार्यों की नियमितता की लगातार निगरानी करने का निर्देश दिया गया. अधिकारियों ने कहा कि प्रयोगशाला केवल निरीक्षण के समय खोलने की व्यवस्था नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसे विद्यालय की नियमित शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा बनाया जाए.
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, एसएसए/माध्यमिक शिक्षा ने सभी प्रधानाध्यापकों और विज्ञान शिक्षकों से बैठक में दिए गए निर्देशों का गंभीरता से पालन करने की अपेक्षा की. अधिकारियों ने कहा कि मॉडल स्कूलों की प्रयोगशालाएं ऐसे सक्रिय शिक्षण केंद्र बनें, जहां विद्यार्थी स्वयं प्रयोग कर वैज्ञानिक अवधारणाओं को समझें और उनमें वैज्ञानिक सोच, जिज्ञासा तथा तार्किक क्षमता विकसित हो. बैठक में मृत्युंजय शर्मा सहित अन्य अधिकारी और शिक्षक मौजूद थे.
