Kaimur News: मरीजों की बढ़ती संख्या के बीच मोहनिया अनुमंडलीय अस्पताल चिकित्सकों की भारी कमी से जूझ रहा है. अस्पताल में सामान्य चिकित्सा व्यवस्था के लिए उपाधीक्षक को मिलाकर महज तीन एमबीबीएस डॉक्टर उपलब्ध हैं. इसका असर ओपीडी से लेकर इमरजेंसी सेवा तक दिखाई दे रहा है. डॉक्टरों की कमी के कारण अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में पदस्थापित आयुष चिकित्सकों की भी अस्पताल में ड्यूटी लगायी जा रही है.
सामान्य ओपीडी के लिए सिर्फ तीन एमबीबीएस डॉक्टर
मोहनिया अनुमंडलीय अस्पताल में उपाधीक्षक समेत केवल तीन एमबीबीएस चिकित्सक सामान्य चिकित्सा व्यवस्था संभाल रहे हैं. इसके अलावा दो शिशु रोग विशेषज्ञ और पांच महिला चिकित्सक पदस्थापित हैं, जो मुख्य रूप से शिशु और महिला ओपीडी में सेवाएं देते हैं. ऐसे में सामान्य ओपीडी और इमरजेंसी के लिए एमबीबीएस डॉक्टरों की कमी बनी हुई है.
इमरजेंसी सेवा में भी आयुष चिकित्सकों की ड्यूटी
अस्पताल की सबसे गंभीर स्थिति इमरजेंसी सेवा को लेकर सामने आ रही है. अस्पताल और एपीएचसी में पदस्थापित आयुष चिकित्सकों की ड्यूटी भी इमरजेंसी में लगायी गयी है. यहां गोली लगने, सांप काटने, सड़क दुर्घटना में घायल होने और अन्य गंभीर मामलों के मरीज पहुंचते हैं. ऐसे मरीजों को कई बार तत्काल विशेषज्ञ चिकित्सा की जरूरत होती है.
पहली बार इमरजेंसी में आयुष डॉक्टरों से ली जा रही सेवा
स्थानीय जानकारी के अनुसार, मोहनिया अनुमंडलीय अस्पताल के इतिहास में पहली बार आयुष चिकित्सकों की ड्यूटी इमरजेंसी सेवा में लगायी गयी है. इससे पहले इमरजेंसी में एमबीबीएस डॉक्टरों की ही ड्यूटी लगायी जाती थी. चिकित्सकों की कमी बढ़ने के बाद अस्पताल प्रशासन को वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर आयुष चिकित्सकों की सेवा लेनी पड़ रही है.
पहले सिर्फ ओपीडी तक सीमित थी आयुष डॉक्टरों की ड्यूटी
अस्पताल में पहले आयुष चिकित्सकों की ड्यूटी मुख्य रूप से ओपीडी तक सीमित रहती थी. अब चिकित्सकों की कमी के कारण उन्हें इमरजेंसी सेवा में भी लगाया जा रहा है. गंभीर मरीजों के इलाज में इस व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं और पर्याप्त एमबीबीएस डॉक्टरों की उपलब्धता की मांग तेज हो गयी है.
मरीजों ने की पर्याप्त डॉक्टरों की तैनाती की मांग
स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग से मोहनिया अनुमंडलीय अस्पताल में पर्याप्त संख्या में एमबीबीएस चिकित्सकों की तैनाती करने की मांग की है. लोगों का कहना है कि इमरजेंसी जैसी महत्वपूर्ण सेवा में चौबीसों घंटे पर्याप्त एमबीबीएस डॉक्टर उपलब्ध होने चाहिए. साथ ही विशेषज्ञ चिकित्सकों की संख्या बढ़ाने की भी जरूरत है.
आसपास के प्रखंडों के मरीजों का भी बड़ा सहारा
मोहनिया अनुमंडलीय अस्पताल स्थानीय मरीजों के अलावा आसपास के प्रखंडों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण सरकारी स्वास्थ्य केंद्र है. ऐसे में यहां चिकित्सकों की कमी का सीधा असर बड़ी संख्या में आने वाले मरीजों की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है.
क्या कहते हैं अस्पताल उपाधीक्षक
अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. अभिनाश कुमार सिंह ने चिकित्सकों की कमी की बात स्वीकार की. उन्होंने कहा कि डॉक्टरों की कमी के बावजूद किसी तरह ओपीडी और इमरजेंसी सेवा संचालित की जा रही है. अस्पताल की ओर से विभाग से अतिरिक्त चिकित्सकों की मांग की गयी है.
