Kaimur News : जिले में पिछले सप्ताह हुई भारी बारिश के कारण बाढ़ प्रभावित छांव पंचायत, दुर्गावती पंचायत, खामीदौरा पंचायत समेत विभिन्न इलाकों में डूबी धान और अन्य फसलों का कैमूर किसान यूनियन के प्रतिनिधिमंडल ने जायजा लिया. बड़े पैमाने पर फसल नुकसान को देखते हुए यूनियन ने बिहार के मुख्यमंत्री, कृषि मंत्री, सरकार के सचिव, जिलाधिकारी कैमूर एवं जिला कृषि पदाधिकारी को पत्र भेजकर किसानों को फसल क्षति का मुआवजा देने की मांग की है.
भारी बारिश और नदियों के उफान से पैदा हुई बाढ़ की स्थिति
यूनियन ने पत्र में कहा है कि कैमूर जिले में पिछले 10 दिनों से हो रही भारी बारिश, पहाड़ी नदियों के उफान तथा दुर्गावती जलाशय डैम से पानी छोड़े जाने के कारण भीषण बाढ़ की स्थिति पैदा हो गयी. इससे जान-माल के खतरे की आशंका के साथ जिले के चांद, चैनपुर, नुआंव, रामगढ़, भभुआ, मोहनियां आदि प्रखंडों में हजारों एकड़ में लगी धान की फसल जलमग्न हो गयी है. इससे किसानों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है.
35 से 40 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजे की मांग
कैमूर किसान यूनियन ने सरकार से किसानों की फसल क्षति के लिए वर्तमान दर के अनुसार 35 से 40 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा देने की मांग की है. यूनियन का कहना है कि बाढ़ के कारण किसानों को बड़े पैमाने पर आर्थिक नुकसान हुआ है, ऐसे में प्रभावित किसानों को जल्द राहत दिया जाना जरूरी है.
बिजली और फसल ऋण माफ करने की भी मांग
यूनियन ने सरकार से बाढ़ प्रभावित किसानों का बिजली बिल और फसल ऋण माफ करने की भी मांग की है. प्रतिनिधिमंडल में यूनियन के अध्यक्ष हरिजी सिंह, संस्थापक सदस्य विकास सिंह, बिंदु पांडेय, पंकज राय आदि शामिल थे.
पिछले साल भी फसल नुकसान के बावजूद नहीं मिला मुआवजा
यूनियन ने सरकार को भेजे पत्र में कहा है कि पिछले वर्ष भी जिले के विभिन्न इलाकों में बाढ़ के कारण बड़े पैमाने पर धान की फसल क्षतिग्रस्त हुई थी, लेकिन किसानों को फसल नुकसान का कोई क्षतिपूर्ति भुगतान नहीं किया गया. यूनियन ने कहा कि यदि सरकार की बेरुखी इसी तरह कायम रही, तो किसानों के सामने परिवार की रोजी-रोटी चलाने के लिए कर्ज लेने की स्थिति उत्पन्न होगी और कर्ज नहीं मिलने पर वे आत्महत्या जैसे गंभीर कदम उठाने को मजबूर हो सकते हैं.
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नकद पर खेत लेने वाले किसानों को भी मुआवजा देने की मांग
यूनियन ने पत्र में कहा है कि ऐसे रैयत किसान, जिन्होंने नकद राशि देकर खेत लिया है, उन्हें भी सरकारी कर्मियों के माध्यम से चिन्हित किया जाए. फसल क्षति का मुआवजा वास्तविक रूप से खेती करने वाले किसान को ही भुगतान करने की मांग की गयी है.
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जल्द लागू हो फसल बीमा योजना
कैमूर किसान यूनियन ने बिहार में फसल बीमा की व्यवस्था जल्द से जल्द लागू कराने की भी मांग की है. यूनियन का कहना है कि ऐसी भीषण प्राकृतिक आपदा की स्थिति में फसल बीमा होने से बीमा कंपनियों के माध्यम से किसानों को फसल क्षति की भरपाई मिल सकेगी.
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