Kaimur News : सदर अस्पताल भभुआ सहित राज्य के सरकारी अस्पतालों में हड्डी रोग यानी ऑर्थोपेडिक उपचार को अधिक सुलभ, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण बनाने की कवायद शुरू हो गयी है. राज्य स्वास्थ्य समिति ने जिला अस्पतालों और चिन्हित स्वास्थ्य संस्थानों के ऑर्थोपेडिक ऑपरेशन थिएटर को भारतीय जन स्वास्थ्य मानक के अनुरूप आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित करने का निर्णय लिया है. इसके लिए सभी जिलों को उपलब्ध उपकरणों का आकलन कर कमी वाले उपकरणों की मांग जल्द भेजने का निर्देश दिया गया है.
पहले होगी गैप एनालिसिस, फिर मिलेंगे उपकरण
राज्य स्वास्थ्य समिति की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के कार्यक्रम क्रियान्वयन योजना 2025-30 के तहत अस्पतालों में विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है. इसी क्रम में ऑर्थोपेडिक सेवाओं के विस्तार और ऑर्थो ओटी के सुदृढ़ीकरण को प्राथमिकता दी गयी है. संचालित या प्रस्तावित ऑर्थो ओटी में पहले उपलब्ध संसाधनों की विस्तृत गैप एनालिसिस की जायेगी. इसके बाद आवश्यक उपकरणों की मांग निर्धारित प्रारूप में भेजी जायेगी. राज्य स्तर पर मांग का परीक्षण करने के बाद बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन लिमिटेड के माध्यम से उपकरण उपलब्ध कराने की प्रक्रिया होगी.
सी-आर्म और आर्थ्रोस्कोपी सिस्टम से बढ़ेगी सर्जरी की क्षमता
ऑर्थो ओटी के लिए ऑर्थोपेडिक अटैचमेंट युक्त ओटी टेबल, एनेस्थीसिया वर्कस्टेशन, इलेक्ट्रिकल सक्शन मशीन, ऑटोक्लेव, 12-चैनल ईसीजी मशीन, इन्फ्यूजन पंप, सी-आर्म मशीन, आर्थ्रोस्कोपी सिस्टम, क्रैश कार्ट, मरीज ट्रॉली और आईवी स्टैंड सहित कई उपकरण उपलब्ध कराने की योजना है. इन आधुनिक संसाधनों से जिला अस्पतालों में जटिल हड्डी संबंधी ऑपरेशन की क्षमता बढ़ेगी.
उपकरणों के रखरखाव पर भी रहेगा जोर
राज्य स्वास्थ्य समिति ने उपकरणों की खरीद के साथ उनके इंस्टॉलेशन और नियमित रखरखाव को भी अनिवार्य किया है. उपकरणों का स्टॉक रजिस्टर में अंकन और ई-उपकरण पोर्टल पर पंजीकरण कराया जायेगा. प्रत्येक उपकरण का एसेट आईडी दर्ज करने के साथ उसकी कार्यशील स्थिति की नियमित निगरानी की जायेगी, ताकि मरीजों को लगातार स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें.
दुर्घटना और फ्रैक्चर के मरीजों को जिला स्तर पर मिलेगा लाभ
जिला स्वास्थ्य समिति के जिला प्रबंधक ऋषिकेश जायसवाल ने बताया कि ऑर्थो ओटी के सुदृढ़ होने से सड़क दुर्घटना, फ्रैक्चर, खेल चोट और अन्य हड्डी संबंधी गंभीर मामलों के मरीजों को जिला स्तर पर ही बेहतर उपचार मिल सकेगा. इससे बड़े अस्पतालों पर मरीजों का अनावश्यक दबाव कम होगा और जरूरतमंद मरीजों को समय पर विशेषज्ञ सर्जरी उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी.
