बार-बार चक्कर आना हो सकता है ब्रेन टीबी का शुरुआती लक्षण
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 01 Aug 2024 9:51 PM
विभाग ने वर्ष 2025 तक देश से टीबी उन्मूलन का रखा है लक्ष्य
जमुई. वर्ष 2025 तक भारत को टीबी मुक्त बनाने को लेकर देश के साथ-साथ जिले में भी युद्धस्तर पर प्रयास किया जा रहा है. विभाग ने वर्ष 2025 तक देश से टीबी उन्मूलन का लक्ष्य रखा है. हालांकि जानकारी के अभाव में आज भी लोगों में यह धारणा है कि टीबी सिर्फ सांस से जुड़ी बीमारी है लेकिन लोगों को यह समझना होगा कि फेफड़ों के अलावा भी टीबी की बीमारी कई प्रकार की होती है. इसमें से ही एक होती है दिमाग की टीबी की बीमारी. ऐसे तो ब्रेन टीबी एक पीड़ित से दूसरे में नहीं फैलती, लेकिन जब फेफड़ों की टीबी से संक्रमित व्यक्ति खांसता-छींकता है तो उसके मुंह से निकले छींटे दूसरे व्यक्ति के मुह के माध्यम से अंदर प्रवेश कर जाती हैं. ये यदि दिमाग में प्रवेश कर जाती हैं तो व्यक्ति को ब्रेन टीबी होने की आशंका बढ़ जाती है. जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ अरविंद कुमार ने बताया कि टीबी उन्मूलन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए समाज के सभी वर्ग के लोगों को जागरूक होने की जरूरत है. सभी की सहभागिता से ही टीबी को हराया जा सकता है. जिला यक्ष्मा पदाधिकारी ने बताया ब्रेन टीबी के मरीजों को प्रारंभिक दौर में सुबह उठने पर चक्कर और उल्टी आने जैसा महसूस होता है. हमेशा सिर दर्द बना रहता है और यह दर्द दवा खाने के बाद भी नहीं जाता. ब्रेन टीबी किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है. ब्रेन टीबी बच्चों में भी हो सकता है. इसके बारे में पता लगते ही व्यक्ति को तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल में दिखाना चाहिये, क्योंकि इसमें लापरवाही से जान का खतरा हो सकता है. जैसे ही मरीज में ब्रेन टीबी के लक्षण दिखे, उसे तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिये. वहीं टीबी मेनिनजाइटिस के लक्षण आमतौर पर धीरे-धीरे दिखाई देते हैं, जो हफ्ते दर हफ्ते गंभीर होते जाते हैं. शुरुआत में यह लक्षण सामान्य लगते हैं, जिन्हें पहचान पाना थोड़ा मुश्किल हो जाता है. चक्कर आना, कमजोरी महसूस होना, हल्का फीवर रहना, बीमारी बढ़ने पर गर्दन में अकड़न, लगातार सिरदर्द होना, उलझन महसूस होना, अधिक गुस्सा करना आदि लक्षणों को मरीज मामूली न समझें. बताते चलें कि पहले टीबी मरीजों के चिह्नित होने के बाद निक्षय पोषण योजना के तहत टीबी रोगियों को लगातार 6 महीने तक प्रति माह 500 रुपये डीबीटी के रूप में उनके बैंक खाता में भुगतान किया जाता था ताकि उक्त राशि से रोगी समुचित पोषाहार कर सकें. अब इसमें बड़ा बदलाव करते हुए चिह्नित होने के तत्काल बाद रोगी के खाते में निक्षय पोषण योजना के तहत तीन महीने की अग्रिम राशि भेजने का प्रावधान किया गया है. राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत जारी नये नोटिफिकेशन में इसे लेकर स्वास्थ्य अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिये गये हैं. नये गाइडलाइन के मुताबिक मरीजों का उपचार शुरू होने के 84 दिनों के बाद दूसरी किस्त के रूप में 1500 रुपये का भुगतान किया जायेगा. मरीज का उपचार 6 माह से अधिक चलने पर प्रतिमाह 500 रुपये का भुगतान किया जायेगा.
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