Hajipur News : सावन माह में भगवान शिव के जलाभिषेक को लेकर वैशाली का ऐतिहासिक चौमुखी महादेव मंदिर भव्य और आकर्षक ढंग से सजाया जा रहा है. मंदिर में रंग-रोगन का कार्य अंतिम चरण में है. श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए प्रशासन और मंदिर समिति की ओर से व्यापक तैयारियां की गई हैं. सावन की प्रत्येक सोमवारी पर मुजफ्फरपुर, वैशाली, समस्तीपुर, सारण समेत आसपास के कई जिलों से हजारों श्रद्धालु यहां जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं.
गर्भगृह में जलनिकासी और श्रद्धालुओं की सुविधा पर विशेष ध्यान
मंदिर के प्रधान पुजारी आचार्य अमीरनाथ मिश्र ने बताया कि भगवान भोलेनाथ का गर्भगृह जमीन की सतह से नीचे स्थित है. जलाभिषेक के दौरान यहां जलजमाव हो जाता है. इसे देखते हुए जलनिकासी की विशेष व्यवस्था की जा रही है. श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए गर्भगृह में पंखा, कूलर और पर्याप्त प्रकाश की व्यवस्था भी की गई है. वहीं मंदिर परिसर से वैशाली हाई स्कूल चौक तक सड़क के दोनों ओर आकर्षक लाइटिंग कराई गई है.
सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था रहेगी चाक-चौबंद
थानाध्यक्ष राज कुमार ने बताया कि सावन में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं. मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में दंडाधिकारी, पुलिस बल, चौकीदार और दफादारों की तैनाती रहेगी. प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. सीमा सरोज ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए स्वास्थ्य विभाग की मेडिकल टीम भी मंदिर परिसर में मौजूद रहेगी.
चार सोमवारी पर अलग-अलग बैरिकेडिंग की व्यवस्था
आचार्य अमीरनाथ मिश्र ने बताया कि प्रत्येक सोमवारी की रात्रि 12 बजे सरकारी पूजा के बाद कांवरियों के जलाभिषेक के लिए मंदिर के कपाट खोल दिए जाएंगे. इस वर्ष सावन में चार सोमवारी पड़ रही हैं. भीड़ को व्यवस्थित करने के लिए महिला और पुरुष श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग बैरिकेडिंग की व्यवस्था की जा रही है.
चौमुखी शिवलिंग की अनूठी संरचना बनाती है मंदिर को खास
आचार्य अमीरनाथ मिश्र ने बताया कि चौमुखी शिवलिंग अपनी अनूठी संरचना के कारण देशभर में प्रसिद्ध है. इसके दक्षिण मुख पर भगवान शिव, उत्तर मुख पर भगवान विष्णु, पूर्व मुख पर भगवान सूर्य और पश्चिम मुख पर भगवान ब्रह्मा की प्रतिमाएं अंकित हैं. लगभग 11 फीट ऊंची और 5 फीट गोलाई वाली यह दुर्लभ प्रतिमा सृष्टि के सृजन, पालन, ऊर्जा और ज्ञान का प्रतीक मानी जाती है.
गंगाजल लेकर पहुंचते हैं हजारों श्रद्धालु
मान्यता है कि बाबा चौमुखी महादेव के दरबार से कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता. श्रद्धालु सोनपुर, पहलेजा, बसंता घाट और मुजफ्फरपुर के रेवा घाट समेत विभिन्न स्थानों से गंगाजल लेकर यहां जलाभिषेक करने पहुंचते हैं. पटना से लगभग 55 किलोमीटर तथा हाजीपुर और मुजफ्फरपुर से करीब 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह ऐतिहासिक मंदिर धार्मिक आस्था के साथ-साथ वैशाली आने वाले पर्यटकों के लिए भी प्रमुख आकर्षण का केंद्र बना हुआ है.
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