धूप खिलते ही रबी फसलों की सिंचाई में जुटे किसान

जिन किसानों के पास निजी बोरिंग है, वे किसी तरह फसलों को बचा पा रहे हैं, लेकिन छोटे और सीमांत किसानों को दूसरे की बोरिंग से महंगे दाम पर पानी लेना पड़ रहा है

महनार. मौसम साफ होते ही महनार क्षेत्र के किसान रबी फसलों की सिंचाई में पूरे दमखम के साथ जुट गए है. अहले सुबह से लेकर देर रात तक किसान खेतों में पानी चला कर फसलों को सिंचाई कर रहे है. कहीं अगात बोआई वाले गेहूं में दूसरी पटवन चल रही है, तो कहीं पछात बोआई वाली फसलों में पहली सिंचाई की जा रही है.

सोमवार को महनार प्रखंड के विभिन्न गांवों में गेहूं, तेलहन, दलहन और सब्जियों की फसलों में सिंचाई होती दिखी. किसान निजी बोरिंग मशीनों के सहारे खेतों में पानी पहुंचा रहे है. बीते चार दिनों से मौसम खुलने के बाद सिंचाई कार्य में तेजी आई है. इससे पहले शीतलहर और घने कुहासे के कारण कड़ाके की ठंड में पटवन करना किसानों के लिए बेहद मुश्किल हो गया था, जिससे रबी फसलों की सिंचाई प्रभावित हो रही थी.

रबी फसल पूरी तरह सिंचाई पर निर्भर

किसानों का कहना है कि रबी की फसल पूरी तरह मेहनत और सिंचाई पर आधारित होती है. गेहूं की बेहतर पैदावार के लिए कम से कम तीन बार सिंचाई जरूरी होती है. इसके साथ ही तेलहन फसलों में सरसों, राई, तोड़ी, दलहन में अरहर, मसूर, मटर तथा किराना फसलों में तंबाकू, हरी मिर्च और अन्य हरी सब्जियों की भी नियमित सिंचाई की जा रही है. किसानों के अनुसार यह फसल प्रकृति पर नहीं बल्कि पूरी तरह उनके परिश्रम पर निर्भर करती है.

नहर सूखी, नलकूप बंद, किसान परेशान

रबी उत्पादक किसानों को इस समय सिंचाई के लिए गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. क्षेत्र की नहरों में पानी नहीं छोड़ा जा रहा है और सभी सरकारी नलकूप बंद पड़े है. जिन किसानों के पास निजी बोरिंग है, वे किसी तरह फसलों को बचा पा रहे हैं, लेकिन छोटे और सीमांत किसानों को दूसरे की बोरिंग से महंगे दाम पर पानी लेना पड़ रहा है. कई किसानों को रात के समय अपनी बारी आने पर पटवन करनी पड़ती है.किसानों का कहना है कि जब सरकार फसल उत्पादन बढ़ाने और कृषि क्रांति की बात करती है, तो फिर सरकारी नलकूप बंद क्यों है. महनार क्षेत्र से गुजरने वाली घाघरा नदी सहित अन्य सिंचाई स्रोतों में पानी नहीं होने से किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है.

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