Gopalganj News : बिहार ग्रामीण विकास सेवा संघ (बीआरडीएसए) के आह्वान पर जिले के सभी प्रखंडों के प्रखंड विकास पदाधिकारियों (बीडीओ) ने सोमवार से काली पट्टी बांधकर शासकीय कार्यों का निर्वहन शुरू कर दिया. यह विरोध 25 जुलाई को सारण में विधि-व्यवस्था ड्यूटी के दौरान दो बीडीओ के गंभीर रूप से घायल होने की घटना के प्रतिरोध में किया जा रहा है.
सारण घटना के विरोध में शुरू हुआ आंदोलन
संघ का कहना है कि सारण में ड्यूटी के दौरान घायल हुए दोनों अधिकारी अभी भी जीवन और मौत से जूझ रहे हैं. संघ के अनुसार, एक अधिकारी की आंखों की रोशनी भी चली गई है. इस घटना के विरोध में राज्यभर के बीडीओ काली पट्टी बांधकर अपनी ड्यूटी कर रहे हैं.
मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को सौंपा गया ज्ञापन
बिहार ग्रामीण विकास सेवा संघ ने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंपकर अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है. संघ ने स्पष्ट किया है कि मांगों पर सकारात्मक निर्णय होने तक राज्यभर में विरोध जारी रहेगा. हालांकि, इस दौरान सभी सरकारी कार्य नियमित रूप से संचालित होते रहेंगे.
सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की प्रमुख मांगें
संघ ने राज्य सरकार से सभी बीडीओ को बॉडी प्रोटेक्टर एवं अन्य सुरक्षात्मक उपकरण उपलब्ध कराने की मांग की है. साथ ही प्रत्येक बीडीओ के साथ स्थायी रूप से दो प्रशिक्षित सुरक्षाकर्मियों की प्रतिनियुक्ति करने और सरकारी दायित्व या विधि-व्यवस्था ड्यूटी के दौरान घायल होने पर समुचित इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग उठाई है.
क्षतिपूर्ति और सुरक्षा नीति बनाने की मांग
संघ ने ड्यूटी के दौरान किसी अधिकारी की मृत्यु होने पर विशेष क्षतिपूर्ति, पर्याप्त बीमा सुरक्षा तथा आश्रितों के लिए सहायता नीति बनाने की भी मांग की है. इसके अलावा विधि-व्यवस्था ड्यूटी से पहले पर्याप्त पुलिस बल की उपलब्धता सुनिश्चित करने और सारण की घटना में प्रशासनिक स्तर पर जिम्मेदारी तय करने की भी मांग की गई है.
मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा विरोध
पंचदेवरी के बीडीओ आयुष राज आलोक और फुलवरिया के बीडीओ मनीष कुमार श्रीवास्तव सहित अन्य अधिकारियों ने बताया कि बीआरडीएसए के निर्णय के अनुसार जब तक राज्य सरकार घायल अधिकारियों के उपचार, सुरक्षा और अन्य मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती, तब तक काली पट्टी बांधकर विरोध जारी रहेगा. संघ ने यह भी मांग की है कि पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराए जाने तक बीडीओ को विधि-व्यवस्था संबंधी ड्यूटी से अलग रखा जाए.
