Gopalganj News: फुलवरिया प्रखंड के सेमरबारी गांव के समीप झरही नदी पर बन रहे अमवां घाट पुल का निर्माण करीब साढ़े छह वर्षों के लंबे इंतजार के बाद एक बार फिर पटरी पर लौट आया है. फरवरी 2026 से नये संवेदक द्वारा काम संभाले जाने के बाद निर्माण स्थल पर गतिविधियां तेज हो गयी हैं. संबंधित विभाग ने जुलाई के अंत तक पुल का निर्माण पूरा कर इसे आम लोगों के लिए खोलने का लक्ष्य रखा है. पुल निर्माण शुरू होने से वर्षों से इंतजार कर रहे ग्रामीणों के चेहरे पर भी रौनक लौट आयी है.
2019 में अधूरा छोड़कर चला गया था ठेकेदार
पथ निर्माण विभाग के अनुसार, अमवां घाट पुल का शिलान्यास 21 जनवरी 2017 को किया गया था. परियोजना की स्वीकृत लागत 3 करोड़ 2 लाख 52 हजार रुपये थी. पुल निर्माण की जिम्मेदारी गुजरात की साई अंबे ऑर्गनाइजर प्राइवेट लिमिटेड को दी गयी थी.
विभाग के अनुसार, संबंधित कंपनी को करीब 1.34 करोड़ रुपये का भुगतान भी किया गया था. हालांकि, अगस्त 2019 में ठेकेदार निर्माण कार्य अधूरा छोड़कर चला गया. इसके बाद पुल निर्माण की महत्वाकांक्षी परियोजना लंबे समय तक ठप पड़ी रही. पुल का निर्माण रुकने से क्षेत्र के लोगों को आवागमन में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था.
1.66 करोड़ की शेष राशि से पूरा होगा निर्माण
करीब साढ़े छह साल तक काम बंद रहने के बाद फरवरी 2026 में नये संवेदक गोपालगंज कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड ने निर्माण कार्य की जिम्मेदारी संभाली. अब शेष 1.66 करोड़ रुपये की लागत से पुल के बचे हुए कार्य को पूरा कराया जा रहा है.
परियोजना अभियंता हामिद रजा ने बताया कि तय समय सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण तरीके से निर्माण पूरा करने के लिए अतिरिक्त मजदूरों और मशीनों को लगाया गया है. निर्माण कार्य को युद्ध स्तर पर आगे बढ़ाया जा रहा है, ताकि निर्धारित समय में पुल को पूरा कर आम लोगों को समर्पित किया जा सके.
दर्जनभर गांवों को मिलेगा सीधा संपर्क
अमवां घाट पुल के निर्माण से झरही नदी के दोनों ओर बसे गांवों की तस्वीर बदलने की उम्मीद है. पुल तैयार होने के बाद भोरे प्रखंड के मोतीपुर एराजी और फुलवरिया प्रखंड के सेमरबारी, कोयलादेवा व तीनतोलवा समेत करीब दर्जनभर गांवों के बीच सीधा संपर्क स्थापित हो जायेगा.
इसके अलावा भोरे-मीरगंज मुख्य मार्ग के समानांतर एक मजबूत और जाममुक्त वैकल्पिक रास्ता भी उपलब्ध होगा. इससे भोरे, फुलवरिया और विजयीपुर प्रखंड के लोगों को अनुमंडल मुख्यालय हथुआ पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी.
व्यापार और स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच होगी आसान
पुल निर्माण पूरा होने के बाद ग्रामीणों को आवागमन की सुविधा मिलने के साथ ही क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. ग्रामीणों का कहना है कि अभी नदी पार करने के लिए कई लोगों को चचरी पुल या नाव का सहारा लेना पड़ता है. इससे खासकर बरसात के दिनों में काफी परेशानी होती है.
पुल बनने से विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए आने-जाने में सुविधा होगी. वहीं, गंभीर बीमारी या आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने में भी समय कम लगेगा.
पुल का काम शुरू होने से ग्रामीणों में खुशी
निर्माण कार्य दोबारा शुरू होने से स्थानीय ग्रामीणों में खुशी की लहर है. स्थानीय ग्रामीण एवं जदयू नेता संदीप कुमार, फिरोज अंसारी, रमेश सिंह कुशवाहा, विशाल प्रसाद, अनवर अली, अभिषेक कुमार और मृत्युंजय प्रसाद ने खुशी जतायी.
ग्रामीणों ने कहा कि वर्षों से वे चचरी या नाव के सहारे जान जोखिम में डालकर झरही नदी पार करते थे. पुल का निर्माण पूरा होने से उनकी वर्षों पुरानी समस्या खत्म हो जायेगी. लोगों का कहना है कि पुल सिर्फ आवागमन का साधन नहीं होगा, बल्कि आसपास के गांवों के विकास, व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच को भी आसान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा.
जुलाई के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य
करीब साढ़े छह वर्षों तक बंद रहने के बाद अमवां घाट पुल का निर्माण फिर से शुरू होना क्षेत्र के लोगों के लिए बड़ी राहत है. विभाग और नये संवेदक की ओर से जुलाई के अंत तक निर्माण पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. अब ग्रामीणों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि निर्धारित समय सीमा में पुल का निर्माण पूरा होकर आवागमन के लिए कब शुरू होता है.
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