पितृपक्ष मेले से पहले गयापालों की 10 सूत्री मांग, देवघाट पर फल्गु में पानी और गंदे पानी का बहाव रोकने की मांग

विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेले के सुचारू संचालन के लिए गयापाल तीर्थवृत्ति सुधारिणी सभा ने प्रशासन से 10 सूत्री मांगें की हैं. इसमें देवघाट पर फल्गु नदी में पानी की उपलब्धता और गंदे पानी पर रोक लगाना शामिल है.

विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेले की शुरुआत 25 सितंबर से हो रही है. जिसे सुचारू और सफल बनाने के लिए गयापाल तीर्थवृत्ति सुधारिणी सभा के एक प्रतिनिधिमंडल ने कृषि मंत्री सह जिले के प्रभारी मंत्री विजय कुमार सिन्हा से मुलाकात कर उन्हें 10 सूत्री मांगों से युक्त ज्ञापन सौंपा है.

मेले की बुनियादी और प्रशासनिक व्यवस्थाएं

मांग पत्र में देश-विदेश से गयाधाम आने वाले लाखों पिंडदानियों और तीर्थयात्रियों को किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े, इसके लिए बुनियादी और प्रशासनिक व्यवस्थाएं मेला शुरू होने से पूर्व सुनिश्चित करने की मांग की गई है. नगर निगम और जिला प्रशासन मिलकर देवघाट के समीप फल्गु नदी में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने, देवघाट के पास आ रहे गंदे व बदबूदार पानी के बहाव पर पूरी तरह रोक लगाने, फल्गु के जल को देवघाट की ओर मोड़ने, पानी, बिजली, सफाई, यातायात व अन्य सभी बुनियादी जरूरत की समुचित व्यवस्था करने की बात मुख्य रूप से शामिल है.

पार्किंग और ऑनलाइन पिंडदान पर प्रतिबंध की मांग

इसके अलावा गदालोल तालाब की घेराबंदी कर उसे यात्री वाहन पार्किंग के रूप में विकसित करने का सुझाव भी दिया गया है. साथ ही, ऑनलाइन पिंडदान पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की भी मांग की गयी है.

मांस-मछली की दुकानों पर रोक और प्रतिनिधिमंडल के सदस्य

मेला क्षेत्र व शहर के अन्य हिस्सों में खुलेआम बिकने वाली मांस-मछली की दुकानों के संचालन पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गयी है. इस प्रतिनिधिमंडल में संगठन के अध्यक्ष गजाधर लाल कटियार, मणिलाल बारिक, अमरनाथ धोकड़ी, प्रेमनाथ टईया, मनीष विट्ठल सहित कई अन्य लोग शामिल थे.

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By नीरज कुमार

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