महान साहित्यकार एवं उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती के अवसर पर किलकारी बिहार बाल भवन, गया में भव्य साहित्यिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को प्रेमचंद के साहित्य, मानवीय मूल्यों और सामाजिक सरोकारों से परिचित कराना था.
कार्यक्रम का शुभारंभ मूर्ति कला के बच्चों द्वारा तैयार मुंशी प्रेमचंद की मिट्टी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया. अंबिका ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की. इसके बाद बच्चों ने मुंशी प्रेमचंद के जीवन, संघर्ष और साहित्यिक योगदान पर आधारित प्रेरक डॉक्यूमेंट्री फिल्म देखी.
'बड़े भाई साहब' की किस्सागोई और 'मंत्र' का पाठ
कार्यक्रम में नाटक विधा के बच्चों ने 'किस्सागोइ' शैली में प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी 'बड़े भाई साहब' का कथा-वाचन प्रस्तुत किया, जिसने शिक्षा, अनुशासन और भाइचारे का संदेश दिया. वहीं, प्रमंडल कार्यक्रम समन्वयक राजीव रंजन श्रीवास्तव ने प्रेमचंद की चर्चित कहानी 'मंत्र' का भावपूर्ण वाचन कर बच्चों को साहित्य की संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों से जोड़ने का प्रयास किया.
कविता पाठ और साहित्यकारों के विचार
पुस्तकालय प्रभारी चंदन मुखर्जी ने मुंशी प्रेमचंद को समर्पित अपनी स्वयं रचित कविता का पाठ किया. सहायक कार्यक्रम पदाधिकारी आकाश कुमार ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य आज भी समाज को मानवीयता, समानता और नैतिक मूल्यों का संदेश देता है. उन्होंने प्रत्येक माह किसी प्रमुख साहित्यकार, लेखक या कवि की रचनाओं के वाचन का आयोजन करने की घोषणा की.
कार्यक्रम में उपस्थित प्रशिक्षक एवं अन्य लोग
मौके पर गुड़िया कुमारी, सोनम कुमारी, नृत्य प्रशिक्षक गौतम कुमार, कंप्यूटर प्रशिक्षिका निशि खान तथा नाटक प्रशिक्षक नंदकिशोर कुमार सहित अन्य थे.
