दोपहिया वाहनों की 60% बिक्री घटी
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 12 Sep 2019 7:39 AM
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आशीष, गया : ऑटोमोबाइल सेक्टर में पिछले कई महीनों से छायी मंदी का असर गया में भी दोपहिया वाहनों की बिक्री पर पड़ा है. यहां दोपहिया वाहनों की बिक्री 60 फीसदी घट गयी है. इस सेक्टर से जुड़े कारोबारी एक तरफ जहां आनेवाले त्योहारों के मौसम में मंदी का असर कम होने की बात कह […]
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आशीष, गया : ऑटोमोबाइल सेक्टर में पिछले कई महीनों से छायी मंदी का असर गया में भी दोपहिया वाहनों की बिक्री पर पड़ा है. यहां दोपहिया वाहनों की बिक्री 60 फीसदी घट गयी है. इस सेक्टर से जुड़े कारोबारी एक तरफ जहां आनेवाले त्योहारों के मौसम में मंदी का असर कम होने की बात कह रहे हैं, वहीं कई ऐसे भी हैं जिनका कहना है कि अब इस मंदी से उबरने में काफी समय लग सकता है.
कारोबारियों का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा वाहनों पर लगने वाले जीएसटी समेत, इंश्योरेंस, प्रदूषण जांच समेत कई मामलों में जो बदलाव किया गया है, उससे ग्राहकों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है. ऐसे में वे एजेंसी के शो-रूम में नहीं आ रहे हैं.
अगर सरकार को इस सेक्टर को उबारना है, तो कई ऐसे नियम बनाने होंगे जो एजेंसी के साथ-साथ कस्टमर के लिए भी फायदेमंद हो. यानी बाइक व स्कूटर बेचने वाले व इसे खरीदने वाले दोनों के आर्थिक हित बहुत ज्यादा प्रभावित न हो. वर्तमान में गया में दो दर्जन से अधिक दोपहिया वाहनों की एजेंसियां हैं. इस सेक्टर से जुड़े कारोबारियों की मानें तो गया में एक वर्ष में आठ हजार से ज्यादा दोपहिया वाहनों की बिक्री होती है.
एक एजेंसी से एक माह में लगभग 100 से 150 गाड़ियां निकलती हैं. त्योहार के समय यह बिक्री दोगुनी बढ़ जाती है. शायद यही कारण है कि पिछले दो से तीन वर्षों में यहां कई कंपनियों के शो-रूम खुले हैं. लेकिन, यह तस्वीर 2019 में काफी बदल गयी है. कारोबारियों की मानें तो वर्ष 2019 में दोपहिया वाहनों की बिक्री घट कर 60 फीसदी तक पहुुंच गयी है.
सरकार ऐसा रास्ता निकाले कि कस्टमर के साथ कारोबारियों का भी आर्थिक हित प्रभावित न हो
मंदी का सबसे ज्यादा असर ऑटोमोबाइल सेक्टर पर पड़ा है. हालांकि केंद्र सरकार द्वारा मंदी से निबटने के लिए कई घोषणाएं भी की गयी हैं. लेकिन, सरकार को ऐसा रास्ता निकालना चाहिए, जिससे इस सेक्टर को गति मिले और कस्टमर के साथ-साथ कारोबारियों के आर्थिक हित प्रभावित न हो.
नीरज गुप्ता, प्रोपराइटर, गुप्ता मोटर्स
यह वाकई इस सेक्टर के लिए काफी चुनौती भरा साल है. क्योंकि काफी समय बाद आर्थिक मंदी ने न सिर्फ कारोबार को प्रभावित किया है, बल्कि इस सेक्टर से जुड़े लोगों की नौकरियां भी छीन ली है. लेकिन, यह उम्मीद भी है कि सरकार इस सेक्टर को पुन: पटरी पर लाने के लिए बेहतर फैसले लेगी.
नीलेश गुप्ता, प्रोपराइटर, पार्वती यामाहा
काफी मुश्किल दौर से यह सेक्टर गुजर रहा है. इसका असर वाहनों की बिक्री पर बहुत पड़ा है. सरकार को यह चाहिए कि वाहन निर्माता, सड़क व परिवहन मंत्रालय, इंश्योरेंस सेक्टर आदि के साथ बैठ कर एक नीति बनाये, ताकि कस्टमर व कारोबारी दोनों को इसका लाभ मिले.
ओमप्रकाश, प्रोपराइटर, आरती सुजुकी
सबसे ज्यादा परेशानी, तो वाहनों पर लगनेवाला 28 फीसदी जीएसटी से है, जिसे सरकार को कम करना चाहिए. इसके अलावा ड्राइविंग लाइसेंस के नियमों में भी बदलाव करना चाहिए. ऐसा माहौल बनाया जाये, जिससे सबको लाभ हो.
सुधीर सिंह, प्रोपराइटर, कुसुम मोटर्स
इन कारणों से ऐसे हालात
दोपहिया वाहनों पर 28 फीसदी जीएसटी
थर्ड पार्टी बीमा महंगा
दोपहिया वाहनों के लिए थर्ड पार्टी बीमा पांच वर्षों के लिए
ड्राइविंग लाइसेंस मिलने में छह महीनों से अधिक का समय
मंदी से निबटने के सुझाव
दोपहिया वाहनों पर जीएसटी को एक समान करना
ड्राइविंग लाइसेंस बनाने के नियमों को सरल बनाना
थर्ड पार्टी बीमा को कम करना
चेकिंग प्वाइंट पर सभी कागजात के निर्माण की व्यवस्था
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