पटना में बाढ़ का विकराल रूप, 9 प्रखंडों की 2.32 लाख आबादी प्रभावित; कई गांवों का संपर्क भंग

पटना जिले में बाढ़ की स्थिति गंभीर है, गंगा और दरधा नदियों के उफान से कई इलाके जलमग्न हो गए हैं. 2.32 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हैं और कई गांवों का संपर्क टूट गया है. जिला प्रशासन द्वारा राहत कार्य चलाए जा रहे हैं.

पटना से अजय कुमार, अजीत कुमार और सुयेब खान की रिपोर्ट

Flood havoc in Patna : गंगा नदी के जलस्तर में लगातार वृद्धि से पटना जिले के निचले इलाकों में बाढ़ की स्थिति गंभीर होती जा रही है. जिले के नौ प्रखंडों की करीब 2.32 लाख आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई है. कई इलाकों में सड़कें पानी में डूब गयी हैं और आवागमन के लिए नाव ही एकमात्र सहारा रह गया है. बाढ़ के बीच जिला प्रशासन ने प्रभावित लोगों के लिए आठ सामुदायिक रसोई केंद्र शुरू किये हैं, जहां अब तक करीब 5900 थाली भोजन कराया जा चुका है. शुक्रवार से सात अन्य स्थानों पर भी सामुदायिक रसोई शुरू की जा रही है.

मसौढ़ी : गंगा-दरधा के उफान से कई इलाकों में संकट

गंगा के साथ दरधा नदी का जलस्तर बढ़ने से मसौढ़ी और धनरूआ क्षेत्र में भी स्थिति बिगड़ गयी है. धनरूआ में दरधा नदी अब तक के सर्वाधिक 56.12 मीटर जलस्तर तक पहुंच गयी है. इससे देवधा, बीर, सोनमई समेत चार पंचायतों के निचले इलाके जलमग्न हो गये हैं. देवधा पंचायत में करीब डेढ़ दर्जन घरों में पानी घुस गया है, जबकि सैकड़ों एकड़ में लगी फसल डूब गयी है.

बाढ़ नियंत्रण विभाग की टीम तटबंधों और संवेदनशील स्थानों पर लगातार निगरानी कर रही है. अधिकारियों के अनुसार पानी के दबाव को देखते हुए तटबंध टूटने या ओवरफ्लो की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता.

200 फीट सड़क पानी में बही, कई गांवों का संपर्क टूटा

फुलवारीशरीफ में बाढ़ के पानी से घिरा गांव

दरधा नदी के तेज बहाव में देवधा-इमलिया-मठिया पथ का करीब 150 से 200 फीट हिस्सा बह गया है. इसके कारण देवधा, इमलिया और मठिया गांवों का सड़क संपर्क पूरी तरह प्रभावित हो गया है. बीर-कुशवन मार्ग पर भी पानी चढ़ने से आवागमन ठप है.

बाढ़ का पानी बीर स्थित अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भी प्रवेश कर गया है. वहीं लीला टोला स्थित प्राथमिक विद्यालय और सामुदायिक भवन पूरी तरह जलमग्न हो गये हैं.

फुलवारीशरीफ: धनकी मुसहरी में घरों में घुसा पानी

राजधानी से करीब 15 किलोमीटर दूर फुलवारीशरीफ प्रखंड की सकरैचा पंचायत स्थित धनकी मुसहरी में भी बाढ़ का पानी लोगों की परेशानी बढ़ा रहा है. महादलित टोले के दो दर्जन से अधिक परिवारों के घरों में पानी प्रवेश कर चुका है. आने-जाने का रास्ता करीब छह फीट पानी में डूब गया है.

नाव के सहारे ग्रामीण, घरों में राशन की भी कमी

तेज बहाव के कारण ग्रामीणों को नाव और रस्सी के सहारे आवागमन करना पड़ रहा है. जलावन भीग जाने और घरों में राशन कम होने से लोगों के सामने खाना बनाने तक की समस्या उत्पन्न होने लगी है. ग्रामीणों ने पर्याप्त राहत नहीं मिलने की शिकायत की है. स्थानीय मुखिया की ओर से लोगों के आवागमन के लिए नाव की व्यवस्था करायी गयी है.

फुलवारीशरीफ में बाढ़ के पानी से घिरा गांव

बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंचे विधायक श्याम रजक

फुलवारी विधानसभा क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति का जायजा लेने विधायक श्याम रजक ने धनुकी, चिहुट, सलालपुर, बकपुर सहित फुलवारीशरीफ और पुनपुन के कई प्रभावित इलाकों का दौरा किया. उन्होंने बाढ़ पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं.

विधायक ने अधिकारियों से राहत व्यवस्था की जानकारी लेते हुए प्रभावित इलाकों में नाव, बालू की बोरियों, आवश्यक सामग्री और सामुदायिक रसोई की व्यवस्था करने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि आपदा की इस घड़ी में प्रभावित लोगों को अकेला नहीं छोड़ा जायेगा और बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है.

मनेर दियारा का मुख्यालय से संपर्क भंग

मनेर में भी बाढ़ का पानी बढ़ने से दियारा क्षेत्र का मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह भंग हो गया है. हल्दी छपरा, बदल टोला, पुराना टोला, नया टोला, सात आना, धजवा टोला, महावीर टोला और रतन टोला समेत कई गांवों के घरों में पानी प्रवेश कर गया है. कई परिवार सुरक्षित स्थानों और मनेर की ओर पलायन करने लगे हैं.

हाथी टोला, मुंजी टोला, छिहत्तर, सुअर मरवा, हुलासी टोला, पतीला, चौरासी और प्रेम टोला समेत कई गांव भी बाढ़ के पानी से घिर गये हैं. मुख्य मार्गों के डूब जाने से नाव लोगों के आवागमन का प्रमुख साधन बन गयी है.

14 नावें चलायी गयीं, दो राहत कैंप शुरू

मनेर अंचल प्रशासन के अनुसार बाढ़ प्रभावित गांवों में राहत के लिए 14 नावों का परिचालन किया जा रहा है. गांधी मैदान में पशुओं के ठहराव के लिए टेंट लगाया गया है और किसानों के बीच पशुचारा भी वितरित किया गया है. मनेर में दो राहत कैंप भी शुरू किये गये हैं.

मनेर के गांव में आयी बाढ़

15 सामुदायिक रसोई से मिल रहा भोजन

जिला प्रशासन के अनुसार बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए पहले से आठ सामुदायिक रसोई केंद्र संचालित किये जा रहे हैं. इनके माध्यम से अब तक करीब 5900 थाली भोजन उपलब्ध कराया गया है. शुक्रवार से सात और स्थानों पर सामुदायिक रसोई शुरू की जा रही है. प्रशासन का फोकस प्रभावित आबादी तक भोजन, नाव, राहत सामग्री और पशुचारा पहुंचाने पर है.

तटबंधों की 24 घंटे निगरानी का निर्देश

बाढ़ नियंत्रण विभाग ने तटबंधों की 24 घंटे निगरानी करने और कटावरोधी कार्य युद्धस्तर पर चलाने का निर्देश दिया है. राहत शिविर, सामुदायिक रसोई, पशुओं के लिए चारा और स्कूलों में जरूरत पड़ने पर लोगों के ठहरने की व्यवस्था तैयार रखने को कहा गया है. गंगा और दरधा के बढ़ते जलस्तर के बीच प्रशासन संवेदनशील इलाकों पर लगातार नजर रख रहा है.

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मूल रूप से बिहार के पूर्वी चंपारण के बाबा सोमेश्वरनाथ नगरी रहने वाले राजीव कुमार ने महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय मोतिहारी से मास कम्युनिकेशन में पारास्नातक की डिग्री हासिल किया. काम करने के दौरान बेतहर हेडिंग और एनओडी पैकेज पर दो-दो पुरस्कार प्राप्त है.

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