Darbhanga News: बिहार सरकार द्वारा दरभंगा सहित सात जिलों में 50-50 बेड के एकीकृत आयुष अस्पतालों के निर्माण के निर्णय का राजकीय महारानी रामेश्वरी भारतीय चिकित्सा विज्ञान संस्थान, दरभंगा के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष वैद्य लेखनाथ झा ने स्वागत किया है. उन्होंने इसे राज्य की पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया.
पारंपरिक चिकित्सा को मिलेगा बढ़ावा
वैद्य लेखनाथ झा ने कहा कि आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी जैसी चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा मिलने से आम लोगों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी. साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार होगा.
उन्होंने कहा कि एकीकृत आयुष अस्पतालों की स्थापना से आधुनिक चिकित्सा और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा. इससे मरीजों को उपचार के अधिक विकल्प मिलेंगे और प्राकृतिक एवं समग्र चिकित्सा पद्धतियों के प्रति लोगों का विश्वास भी बढ़ेगा.
आउटसोर्सिंग कर्मियों को नियमित करने की मांग
वैद्य लेखनाथ झा ने सरकार का ध्यान राजकीय महारानी रामेश्वरी भारतीय चिकित्सा विज्ञान संस्थान, दरभंगा में कार्यरत आउटसोर्सिंग कर्मियों की ओर भी आकृष्ट कराया. उन्होंने मांग की कि संस्थान में दो वर्ष या उससे अधिक समय से लगातार सेवा दे रहे आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को नियमित किया जाए.
उन्होंने कहा कि ये कर्मचारी लंबे समय से संस्थान की स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें स्थायी सेवा का लाभ नहीं मिल सका है.
