Buxar News : डुमरांव ग्रिड की बिजली व्यवस्था को स्थायी रूप से दुरुस्त करने की दिशा में विभाग ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है. तकनीकी खराबी के कारण बेकार पड़े 80 एमवीए पावर ट्रांसफार्मर को हटाकर मरम्मत के लिए गुजरात भेज दिया गया. शुक्रवार को कई चरणों में डिसमेंटल करने के बाद करीब 200 टन वजनी ट्रांसफार्मर को विशेष ट्रॉली के माध्यम से सड़क मार्ग से गुजरात रवाना किया गया. विभागीय अधिकारियों के अनुसार, अप्रैल में करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित यह ट्रांसफार्मर कुछ ही महीनों में तकनीकी खराबी की चपेट में आ गया था.
कई दिनों के प्रयास के बाद हटाने का लिया गया निर्णय
विभागीय अभियंताओं ने खराब ट्रांसफार्मर को दुरुस्त कर चालू करने का कई दिनों तक प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली. इसके बाद कंपनी स्तर पर जांच और मरम्मत के लिए इसे गुजरात भेजने का निर्णय लिया गया. ग्रिड के सहायक कार्यपालक अभियंता अभिषेक कुमार ने बताया कि अधिक वजन के कारण ट्रांसफार्मर को सीधे बाहर निकालना संभव नहीं था. इसके ऊपरी हिस्सों को अलग कर इसकी चौड़ाई कम की गयी. इसके बाद तकनीकी टीम ने इसे कई चरणों में डिसमेंटल कर विशेष ट्रॉली के माध्यम से रवाना किया. पूरी प्रक्रिया में सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखा गया.
वैकल्पिक व्यवस्था से 11 फीडरों में जारी रही बिजली आपूर्ति
ट्रांसफार्मर हटाने के दौरान बिजली आपूर्ति बाधित न हो, इसके लिए विभाग ने वैकल्पिक व्यवस्था की है. वर्तमान में देवकुली ग्रिड से करीब 30 मेगावाट और बक्सर ग्रिड से 18 मेगावाट बिजली ली जा रही है. वहीं, पुराने 50 एमवीए ट्रांसफार्मर से ओवरलोड की स्थिति में करीब 45 मेगावाट बिजली की आपूर्ति की जा रही है. इससे सभी 11 फीडरों में बिजली आपूर्ति जारी है. हालांकि, कुछ इलाकों में लो वोल्टेज और हल्की ट्रिपिंग की शिकायतें मिल रही हैं.
हरनौत ग्रिड से रवाना हुआ नया 80 एमवीए ट्रांसफार्मर
एईई अर्जुन वर्मा ने बताया कि 80 एमवीए क्षमता का नया ट्रांसफार्मर नालंदा जिले के हरनौत ग्रिड से डुमरांव के लिए रवाना हो चुका है. अटलांटा कंपनी द्वारा निर्मित यह ट्रांसफार्मर भी करीब 200 टन वजनी है. इसे विशेष ट्रेलर से लाया जा रहा है और चार-पांच दिनों में डुमरांव पहुंचने की उम्मीद है. हालांकि, बारिश के कारण परिवहन में देरी की संभावना बनी हुई है.
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तेल की जांच के बाद ही चार्ज होगा ट्रांसफार्मर
नये ट्रांसफार्मर के पहुंचने के बाद इंस्टॉलेशन की प्रक्रिया कई चरणों में पूरी की जायेगी. इसमें करीब 26 हजार लीटर इंसुलेटिंग ऑयल भरा जायेगा. इसके बाद तेल का सैंपल पटना स्थित प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा जायेगा. जांच रिपोर्ट आने में तीन-चार दिन लगने की संभावना है. सभी तकनीकी मानकों की पुष्टि के बाद ही ट्रांसफार्मर को चार्ज कर लोड दिया जायेगा.
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10 दिनों में चालू होने की उम्मीद
विभाग का अनुमान है कि यदि सभी प्रक्रियाएं निर्धारित समय के अनुसार पूरी हुईं, तो नये ट्रांसफार्मर के डुमरांव पहुंचने के करीब 10 दिनों के भीतर इसे चालू कर दिया जायेगा. इसके बाद अनुमंडल क्षेत्र में लो वोल्टेज, ट्रिपिंग और ओवरलोड की समस्या से काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है.
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