Buxar News(ओंकार नाथ मिश्र): पश्चिम बंगाल के बेहद हाई-प्रोफाइल और चर्चित चंद्रनाथ रथ हत्याकांड के तार अब बिहार के बक्सर सेंट्रल जेल से जुड़ गए हैं. बिहार में शराबबंदी कानून का फायदा उठाकर एक छोटा तस्कर बनने का नाटक कर रहा यूपी का एक शातिर शूटर बक्सर की सलाखों के पीछे सेफ हाउस मानकर छिपा बैठा था. लेकिन दिल्ली से विशेष रूप से पहुंची केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की टीम ने गुरुवार को बक्सर सेंट्रल जेल में बंद उत्तर प्रदेश के गाजीपुर के शातिर अपराधी संजय राय को अपनी कस्टडी में ले लिया. बक्सर के एक्साइज कोर्ट-1 से प्रोडक्शन वारंट और रिमांड की कानूनी मंजूरी मिलने के बाद सुरक्षा के चाक-चौबंद घेरे में सीबीआई की टीम उसे कोलकाता लेकर रवाना हो गई है.
शराब तस्करी के पीछे छिपा था ₹20 हजार या लाखों की सुपारी लेने वाले किलर का चेहरा
गिरफ्तार आरोपी संजय राय उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जनपद अंतर्गत जमानियां थाना क्षेत्र के मतसा गांव का निवासी है. करीब 10 दिन पहले बक्सर जिले की राजपुर थाना पुलिस ने संजय राय को शराब तस्करी के एक छोटे मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजा था. शातिर शूटर ने सोचा था कि बिहार की जेल के भीतर महफूज रहकर वह बंगाल के इस सबसे चर्चित और बड़े हत्याकांड की आंच और जांच से आसानी से बच निकलेगा. लेकिन वह इस बात से अनजान था कि वह सीबीआई और बंगाल एसटीएफ (STF) की रडार पर लगातार बना हुआ था.
कौन थे चंद्रनाथ रथ, कैसे खुला बक्सर जेल का राज?
पश्चिम बंगाल के तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष एवं मौजूदा मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के पीए (PA) रहे पूर्व एयरफोर्स अधिकारी चंद्रनाथ रथ की हत्या बीते 6 मई की रात पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिला अंतर्गत मध्यमग्राम में सरेआम कर दी गई थी.
ऐसे खुली कड़ियां:
बंगाल एसटीएफ ने इस मामले में पूर्व में दबोचे गए पेशेवर अपराधियों और शार्प शूटरों को जब कड़े तेवर में रिमांड पर लेकर पूछताछ की, तो उन्होंने कड़ाई के आगे टूटते हुए संजय राय के नाम और उसकी भूमिका को उगल दिया.
इसके बाद सीबीआई और बंगाल पुलिस ने जब तकनीकी इनपुट, मोबाइल टावर लोकेशन और डिजिटल साक्ष्य खंगाले, तो कड़ियां सीधे बक्सर जेल की सलाखों से जाकर जुड़ गईं.
क्रॉस-क्वेश्चनिंग में टूटेंगे अपराधी, सिंडिकेट के मास्टरमाइंड का हटेगा नकाब
जांच अधिकारियों के अनुसार, इस हाई-प्रोफाइल मर्डर को अंजाम देने के लिए यूपी, बिहार और बंगाल के अपराधियों के एक बेहद खतरनाक और सुसंगठित अंतर्राज्यीय खूनी सिंडिकेट का इस्तेमाल किया गया था. जांच एजेंसी के पास संजय राय के खिलाफ ऐसे पुख्ता और अकाट्य डिजिटल साक्ष्य मौजूद हैं, जो वारदात के वक्त घटनास्थल पर उसकी मौजूदगी और मुख्य शूटरों के साथ उसके सीधे संपर्क को पूरी तरह प्रमाणित करते हैं. अब कोलकाता के विशेष पूछताछ केंद्र में इस शातिर को पहले से जेल में बंद इसके अन्य साथियों के आमने-सामने बिठाकर क्रॉस-क्वेश्चनिंग (क्रॉस-पूछताछ) कराई जाएगी. संजय राय को इस खूनी साजिश की आखिरी और सबसे मजबूत कड़ी माना जा रहा है, जिसके पास पूरी स्क्रिप्ट का ब्यौरा है. उससे यह उगलवाया जाएगा कि चंद्रनाथ रथ की हत्या की सुपारी किस सफेदपोश, बड़े राजनेता या माफिया ने दी थी और हत्या में इस्तेमाल किए गए अत्याधुनिक हथियार कहां छुपाए गए हैं.
सीबीआई के आने पर जेल प्रशासन भी रह गया दंग
बक्सर सेंट्रल जेल के अधिकारियों ने बताया कि मद्य निषेध की विभिन्न धाराओं में आरोपित संजय को 10 दिन पूर्व ही जेल में शिफ्ट किया गया था, तब वह एक सामान्य अपराधी की तरह बर्ताव कर रहा था.
मामले की पुष्टि करते हुए कारा उपाधीक्षक राघवेन्द्र सिंह ने कहा कि दिल्ली से सीबीआई की एक विशेष टीम बक्सर पहुंची थी. स्थानीय कोर्ट से रिमांड की प्रक्रिया पूरी करने के बाद टीम संजय राय को अपने साथ ले गई है. उन्होंने बताया कि सीबीआई की टीम के यहां पहुंचने और कागजात सौंपने के बाद ही जेल प्रशासन को भनक लगी कि शराब तस्करी के पीछे बंद यह कैदी असल में इतना बड़ा और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़ा शातिर शूटर है, जिसके खिलाफ कई अन्य राज्यों में भी संगीन मामले दर्ज हैं.
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