बक्सर में शराबबंदी तार-तार: रात होते ही ‘जवहीं दियर’ और ‘बलुआ घाट’ पर चलता है माफिया का सिक्का

Buxar Liquor Smuggling News: बक्सर जिले के ब्रह्मपुर थाना क्षेत्र के जवहीं दियर और गोकुल जलाशय के बलुआ घाट पर शराब माफिया का नेटवर्क चरम पर है. यूपी के रास्ते जलमार्ग से आ रही खेप को रोकने में पुलिस का रिपोर्ट कार्ड शून्य है. डुमरांव एसडीपीओ पोलस्त कुमार ने मैनेजिंग संस्कृति के आरोपों पर जांच और विशेष गश्ती दल के गठन की बात कही है. पढ़ें खोजी रिपोर्ट.

बक्सर से संतोष कांत की रिपोर्ट

Buxar Liquor Smuggling News: बिहार में पूर्ण शराबबंदी कानून को लागू हुए लंबा वक्त बीत चुका है, लेकिन बक्सर जिले के ब्रह्मपुर थाना क्षेत्र से धरातल की हकीकत बयां करने वाली एक बेहद चौंकाने वाली खोजी रिपोर्ट सामने आई है. ब्रह्मपुर थाना क्षेत्र के सीमावर्ती इलाकों में शराब तस्करों का सिंडिकेट इस कदर हावी हो चुका है कि रात ढलते ही यहाँ कानून व्यवस्था पूरी तरह दम तोड़ देती है. ‘जवहीं दियर’ से लेकर ‘गोकुल जलाशय के बलुआ घाट’ तक पूरी तरह शराब माफियाओं का सिक्का चलता है. सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि पिछले एक साल में स्थानीय पुलिस के खाते में एक भी बड़ी मछली या अंतरराज्यीय गिरोह को दबोचने की कामयाबी दर्ज नहीं हुई है, जिससे स्थानीय लोगों में पुलिस की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं.

सांकेतिक तस्वीर

तस्करों का अभेद्य किला बना ‘जवहीं दियर’

स्थानीय सूत्रों और तटीय इलाकों से मिली खुफिया जानकारी के अनुसार, ब्रह्मपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले जवहीं दियर की जटिल भौगोलिक बनावट का तस्कर भरपूर फायदा उठा रहे हैं. दियर के उबड़-खाबड़ रास्तों और घने झाड़-झंखाड़ों के बीच तस्करों ने किलोमीटर दूर तक अपने निजी मुखबिर (इन्फॉर्मर) तैनात कर रखे हैं. दिन के समय यहाँ पूरी तरह सन्नाटा पसरा रहता है, लेकिन जैसे ही सूरज ढलता है, इस टापू नुमा इलाके में शराब माफियाओं की गाड़ियां और गुर्गे पूरी तरह सक्रिय हो जाते हैं.

यूपी के रास्ते जलमार्ग से बलुआ घाट पर उतरती है खेप

तस्करों ने पुलिस की गश्ती से बचने के लिए उत्तर प्रदेश से लगती जलीय सीमा का सहारा लिया है. रात के अंधेरे में बड़ी नावों पर विदेशी और देसी शराब की पेटियाँ लादकर गोकुल जलाशय के बलुआ घाट के पास बनी कच्ची सड़क पर उतारी जाती हैं. सूत्रों का दावा है कि माल उतरने से पहले बकायदा ‘लाइन क्लियर’ कराई जाती है. तस्करों और खाकी के मददगारों के बीच कोडवर्ड में बात होती है, जिसके बाद पुलिस की गश्ती गाड़ियां या तो मुख्य मार्ग से नदारद हो जाती हैं या उनका रूट बदल दिया जाता है.

सांकेतिक तस्वीर

दिखावे की छापेमारी और कड़े तेवर

कलेक्ट्रेट और वरीय पुलिस अधिकारियों के दबाव में यदि कभी दियर इलाके में छापेमारी की रणनीति बनती भी है, तो महकमे के भीतर बैठे ‘विभीषण’ इसकी भनक तस्करों तक पहले ही पहुंचा देते हैं. नतीजा यह होता है कि पुलिस के पहुंचने से पहले ही घाट खाली हो जाता है. एक साल के भीतर पुलिस ने केवल कुछ लीटर शराब के साथ छोटे करियरों को पकड़कर कागजी खानापूर्ति की है.

क्या कहते हैं अधिकारी?

डुमरांव के एसडीपीओ पोलस्त कुमार का कहना है कि मैनेजिंग संस्कृति के आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं. लेकिन, अगर किसी भी स्तर पर स्थानीय पुलिसकर्मी या अधिकारी की शराब माफियाओं के साथ सांठगांठ की थोड़ी सी भी भनक या सबूत मिले, तो उसे कतई बख्शा नहीं जाएगा. ऐसे पुलिसकर्मियों के खिलाफ न सिर्फ विभागीय कार्रवाई होगी, बल्कि उन्हें सीधे जेल भेजा जाएगा. हम बलुआ घाट और जवहीं दियर क्षेत्र के लिए एक विशेष गश्ती दल का गठन कर रहे हैं, जो सीधे मेरी निगरानी में काम करेगा. जल्द ही क्षेत्र में इसके बड़े परिणाम देखने को मिलेंगे.”

एसडीपीओ के इस कड़े आश्वासन के बाद अब देखना यह होगा कि कलेक्ट्रेट और डुमरांव पुलिस की स्पेशल टीम इस अभेद्य किले को कब तक ध्वस्त कर पाती है. फिलहाल इस खोजी खुलासे के बाद ब्रह्मपुर पुलिस और तस्करों के बीच हड़कंप मचा हुआ है.

यह भी पढ़ें: रोहतास के आरा लाइन नहर में स्नान के दौरान 12 वर्षीय किशोर डूबा, परिवार में मचा कोहराम

गोपालगंज के कटेया इनरवा पुल पर अज्ञात वाहन की टक्कर से बाइक सवार की मौत

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Aditya Kumar Ravi

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >