Buxar News : गंगा के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि ने बक्सर जिले में बाढ़ की स्थिति को गंभीर बना दिया है. नदी खतरे के निशान को पार कर तटवर्ती इलाकों में तबाही मचाने लगी है. केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के अनुसार शुक्रवार सुबह आठ बजे गंगा का जलस्तर 60.49 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 60.32 मीटर से 17 सेंटीमीटर ऊपर था. दोपहर दो बजे तक जलस्तर बढ़कर 60.51 मीटर पर पहुंच गया. जल आयोग के अनुसार नदी पांच घंटे में एक सेंटीमीटर की रफ्तार से लगातार बढ़ रही है.
खतरे के निशान को पार कर लगातार बढ़ रही गंगा
एक दिन पहले गुरुवार सुबह आठ बजे गंगा का जलस्तर 60.30 मीटर था, जो खतरे के निशान से महज दो सेंटीमीटर नीचे था. इसके बाद दोपहर एक बजे तक जलस्तर बढ़कर 60.39 मीटर और शाम चार बजे 60.41 मीटर तक पहुंच गया. शुक्रवार सुबह से नदी खतरे के निशान से काफी ऊपर बह रही है. जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि से प्रशासन की चिंता बढ़ गयी है.
विवाह मंडप तक पहुंचा बाढ़ का पानी
गंगा के उफान के कारण रामरेखाघाट स्थित विवाह मंडप के ऊपरी हिस्से तक पानी पहुंच गया है. प्रमुख घाट भी पानी में डूबने की कगार पर हैं. वहीं, कर्मनाशा, ठोरा और धर्मावती जैसी सहायक नदियों के बैकवाटर ने ग्रामीण क्षेत्रों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. इन नदियों का पानी तट की सीमा को पार कर खेतों और गांवों में प्रवेश कर रहा है. इससे सैकड़ों एकड़ में लगी धान और मक्के की फसल बर्बाद हो गयी है.
कई गांवों का सड़क संपर्क हुआ भंग
गंगा में आयी बाढ़ के कारण ठोरा नदी भी उफान पर है. इसके चलते सदर प्रखंड के करहंसी, जरिगांवा, इजरी श्रीराम, गोविंदपुर, लरई कोड़रवा समेत कई गांवों का सड़क संपर्क भंग हो गया है. इन इलाकों में सैकड़ों एकड़ धान की फसल पानी में डूब गयी है. इटाढ़ी प्रखंड के अतरौना और सिकटौना गांवों का भी प्रखंड मुख्यालय से सड़क संपर्क टूट गया है.
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चौसा-मोहनिया सड़क पर तीन फीट तक पानी
चौसा प्रखंड के बनारपुर, सकरौल समेत आसपास के कई गांवों में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. चौसा-मोहनिया सड़क पर करीब ढाई से तीन फीट तक पानी बह रहा है. कई गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है, जिससे लोगों के सामने आवागमन के साथ-साथ दैनिक जरूरतों को लेकर भी परेशानी बढ़ गयी है.
बांध पर शरण लेने को मजबूर ग्रामीण
जिले के सिमरी, चक्की और ब्रह्मपुर के दियारा इलाकों में बाढ़ का संकट गहरा गया है. कई गांव टापू में तब्दील हो गये हैं और सड़कों पर नावों का परिचालन करना पड़ रहा है. ग्रामीणों के अनुसार, लोग अपने बच्चों और मवेशियों के साथ ऊंचे बांधों और सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हैं. हजारों लोगों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है.
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हाई अलर्ट पर जिला प्रशासन
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी साहिला ने हाई अलर्ट जारी किया है. एसडीआरएफ की टीमों को मोटरबोट के साथ बाढ़ प्रभावित अंचलों में तैनात किया गया है. जिलाधिकारी ने बक्सर-कोइलवर तटबंध की 24 घंटे निगरानी करने का निर्देश दिया है. जिला प्रशासन की ओर से 19 नावों का परिचालन कराया जा रहा है. साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचाने का काम भी तेज कर दिया गया है.
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