टीबी मरीजों की पहचान करने में बक्सर जिला का प्रदर्शन रहा बेहतर

टीबी मुक्त भारत का स्वप्न साकार करने के लिए स्वास्थ्य विभाग प्रयासरत है. इसी क्रम में ज्यादा से ज्यादा संदिग्ध मरीजों को चिन्हित करने की कवायद जिला में जारी है.

बक्सर. टीबी मुक्त भारत का स्वप्न साकार करने के लिए स्वास्थ्य विभाग प्रयासरत है. इसी क्रम में ज्यादा से ज्यादा संदिग्ध मरीजों को चिन्हित करने की कवायद जिला में जारी है. अक्तूबर महीने में जिला में 472 टीबी मरीज चिह्नित किये गये हैं. जिला को अक्टूबर महीने में 376 टीबी मरीज चिह्नित करने का लक्ष्य मिला था जिसके सापेक्ष में 125 फीसद उपलब्धि के साथ जिला में 472 मरीज चिन्हित किये गये. यह जिला के स्वास्थ्यकर्मियों की मेहनत और इमानदार सोच को दर्शाता है. चिन्हित मरीजों में सरकारी स्वास्थ्य संस्थाओं में 88 और निजी क्लिनिक और अस्पताल में 384 टीबी मरीज चिह्नित किये गये. डुमरांव प्रखंड में सर्वाधिक मरीज हुए चिह्नित : अधिकारिक आंकड़ों के अनुसार अक्टूबर महीने में डुमरांव प्रखंड में सर्वाधिक 304 टीबी मरीज चिह्नित किये गये. प्रखंड को अक्टूबर माह में 52 मरीज चिन्हित करने का लक्ष्य मिला था जिसके सापेक्ष में डुमरांव प्रखंड में 304 मरीज चिह्नित किये गये. इनमे 9 सरकारी स्वास्थ्य संस्थाओं में और 295 निजी क्लिनिक और अस्पताल में चिन्हित किये गए. इसके बाद बक्सर प्रखंड में 68 मरीज चिह्नित किये गये जो लक्ष्य का 106% है. प्रखंड को 64 मरीज चिह्नित का लक्ष्य मिला था जिसके सापेक्ष में 68 मरीज चिनित किये गये. ड्रग रेसिस्टेंट टीबी का सिर्फ एक मरीज चिह्नित : जिला में अक्तूबर माह में 1871 टीबी मरीजों की ट्रू नाट मशीन से जांच की गयी जिसमे 114 मरीज ड्रग सेंसिटिव टीबी और एक मरीज ड्रग रेसिस्टेंट टीबी का पाया गया है. सभी चिह्नित मरीजों का उपचार किया जा रहा है. जिला के सीनियर ट्रीटमेंट सुपरवाइजर गौरव कुमार ने बताया कि जिला में हर स्तर पर ज्यादा से ज्यादा टीबी मरीजों को चिह्नित कर उन्हें चिकित्सीय उपचार से जोड़ा जा रहा है. जनमानस को टीबी के लक्षणों की जानकारी, बीमारी से बचाव, ससमय जांच कराने का महत्त्व और बीमारी चिह्नित होने पर दवा के पूरे कोर्स का सेवन करने की महत्ता की जानकारी दी जा रही है. जिला संचारी रोग पदाधिकारी डॉ शालिग्राम पांडेय ने कहा कि सबके सामूहिक प्रयास से ही टीबी मुक्त बक्सर का स्वप्न साकार होगा. समुदाय के बीच में नियमित जागरूकता कार्यक्रम और हर स्तर पर निरंतर प्रयास जरुरी है ताकि लोग बीमारी की गंभीरता को समझते हुए तुरंत लक्षण नजर आते ही नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं, जो सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में निशुल्क किया जाता है. ससमय जांच और बीमारी की पुष्टि होने से उपचार तुरंत शुरू किया जाता है और मरीज दवा सेवन से पूरी तरह स्वस्थ हो जाता है.

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Published by: Amlesh prasad

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