लीड : उद्यान विभाग की नर्सरियां खत्म होने के कगार पर, बची जमीन पर भी निर्माण का खतरा

उद्यान विभाग की नर्सरी पर संकट, सात गायब, एक पर निर्माण की तैयारी

जिले की आठ में से सात नर्सरियां गायब, एकमात्र बची नर्सरी पर भी अतिक्रमण

सचिव और जिला उद्यान पदाधिकारी के आदेशों के बाद भी नहीं रुका निर्माण

फोटो-4– उद्यान विभाग का नर्सरी वेयरहाउस

फोटो –5- उद्यान विभाग की नर्सरी भूमि पर बन रहा प्रखंड कार्यालय

प्रशांत कुमार राय, बक्सर

एक समय जिले में उद्यान विभाग की आठ नर्सरियां थीं. इनका उद्देश्य किसानों को सस्ती दर पर फलदार, छायादार और औषधीय पौधे उपलब्ध कराना था, ताकि बागवानी को बढ़ावा मिले और आय बढ़े. वर्तमान में आठ में से सात नर्सरियों का अस्तित्व समाप्त हो चुका है और बची एक नर्सरी भी अतिक्रमण की चपेट में है. जानकारी के अनुसार, प्रखंडों की स्थापना के समय प्रत्येक प्रखंड में उद्यान नर्सरी के लिए दो एकड़ भूमि अधिग्रहित की गयी थी. यह भूमि सरकारी अभिलेखों में दर्ज कर उद्यान विभाग के लिए सुरक्षित रखी गयी थी. आठ प्रखंडों में नर्सरियां स्थापित कर किसानों को पौधे उपलब्ध कराये जाते थे, लेकिन समय के साथ ये नर्सरियां सरकारी उदासीनता और विभागीय लापरवाही की भेंट चढ़ गयीं. वर्तमान में विभागीय अधिकारियों को भी स्पष्ट जानकारी नहीं है कि सात नर्सरियों की भूमि कहां गयी. प्रभात खबर की पड़ताल में सामने आया कि सिमरी, नवानगर और ब्रह्मपुर प्रखंडों की नर्सरी भूमि की पहचान और मापी के लिए 17 फरवरी 2021 से अंचल कार्यालय को आवेदन दिये जा रहे हैं. इसके बावजूद न मापी हुई और न सीमांकन. डुमरांव प्रखंड की दो एकड़ नर्सरी भूमि कृषि विश्वविद्यालय निर्माण के दौरान हस्तांतरित कर दी गयी, जिसके बाद वहां नर्सरी के लिए भूमि नहीं बची. राजपुर और इटाढ़ी प्रखंडों की नर्सरी भूमि वन विभाग को लीज पर दी गयी थी, लेकिन लीज अवधि की जानकारी किसी विभाग के पास स्पष्ट नहीं है. स्थिति यह है कि वन विभाग ने भूमि पर स्थायी कब्जा जमा लिया है और उद्यान विभाग वर्षों से उसे वापस पाने का प्रयास कर रहा है. सदर प्रखंड में जिले की एकमात्र बची नर्सरी भी संकट में है. वर्ष 2016 में इसके एक हिस्से को वीवीपैट वेयरहाउस निर्माण के लिए चयनित किया गया था. उद्यान विभाग ने आपत्ति दर्ज करायी. 27 नवंबर 2019 को जिला उद्यान पदाधिकारी ने निर्माण रोकने का पत्र भेजा. 16 सितंबर 2020 को कृषि विभाग के सचिव ने जिलाधिकारी को निर्देश दिया कि उद्यान नर्सरी की भूमि चिन्हित कर उद्यान निदेशालय के नाम दर्ज की जाये. इसके बाद 13 जुलाई 2025 को भूमि अधिग्रहण अधिनियम 1894 के तहत नजरी नक्शा तैयार कर भूमि उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया, लेकिन अंचल स्तर पर आदेशों की अनदेखी होती रही. सचिव ने स्पष्ट आदेश दिया था कि नर्सरी भूमि पर भविष्य में कोई निर्माण नहीं होगा. इसके बावजूद वहां प्रखंड कार्यालय निर्माण की गतिविधियां देखी जा रही हैं. जिला उद्यान पदाधिकारी किरण भारती ने कहा कि ऐसी स्थिति रही तो बागवानी योजनाएं प्रभावित होंगी और किसानों को सस्ते पौधे उपलब्ध कराना मुश्किल हो जायेगा. उद्यान विकास योजनाएं कागजों तक सीमित रह जायेंगी.

जिलाधिकारी को भेजा गया है पत्र

सदर प्रखंड स्थित उद्यान नर्सरी की भूमि का नजरी नक्शा और सीमांकन कर रजिस्टर-2 में दर्ज करने के लिए कई बार पत्र भेजा गया, लेकिन अब तक कार्रवाई नहीं हुई. इसी कारण नर्सरी भूमि पर प्रखंड सह अंचल कार्यालय का निर्माण कराया जा रहा है. निर्माण रोकने और सीमांकन कराने के लिए विभाग व जिलाधिकारी को पत्र भेजा गया है.

किरण भारती, जिला उद्यान पदाधिकारी, बक्सर

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