सोन नहर की जमीन पर बने 104 कटरा का किराया वसूलने को लेकर सोन नहर विभाग और नगर परिषद के बीच मामला उलझा

सोन नहर की भूमि पर नगर परिषद का कब्जा, 104 कटरा से वर्षों से अवैध वसूली

प्रशांत कुमार राय, बक्सर

सरकारी भूमि पर अतिक्रमण को लेकर एक ओर जहां जिला प्रशासन लगातार सख्ती बरत रहा है, वहीं दूसरी ओर सोन नहर विभाग की भूमि पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण का मामला सामने आया है. इस बार आरोप किसी निजी भू-माफिया पर नहीं, बल्कि नगर परिषद बक्सर पर है, जिस पर सोन नहर विभाग की भूमि पर अवैध रूप से 104 कटरा बनवाने और उनसे राजस्व वसूली करने का गंभीर आरोप लगाया गया है. सोन नहर विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, ज्योति चौक स्थित पुलिस चौकी के बगल में तथा जयप्रकाश नारायण बस स्टैंड परिसर में कुल 104 कटरा बनाये गये हैं. इन कटरा पर नगर परिषद बक्सर अपना मालिकाना हक जता रहा है और वर्षों से इनसे किराया व अन्य राजस्व की वसूली भी की जा रही है. हालांकि, सोन नहर विभाग का स्पष्ट कहना है कि यह पूरी भूमि जल संसाधन विभाग की है और बिना किसी वैध प्रक्रिया, बिना अनापत्ति प्रमाण पत्र तथा बिना स्वामित्व हस्तांतरण के इन कटरा का निर्माण कराया गया है.

सोन नहर विभाग ने कटरा खाली करने को ले नप के इओ को भेजा पत्र

सोन नहर विभाग के कार्यपालक अभियंता धर्मेंद्र कुमार भारती का कहना है कि नगर परिषद न केवल अवैध रूप से विभागीय भूमि पर कब्जा किए हुए है, बल्कि उससे होने वाली आय को भी अपने खाते में रखकर सरकार को आर्थिक नुकसान पहुंचा रहा है. विभाग ने कई बार नगर परिषद से लिखित रूप में यह स्पष्ट करने को कहा कि आखिर किस आदेश, किस अनुमति अथवा किस एनेक्सी स्वीकृति के आधार पर यह निर्माण कराया गया है, लेकिन आज तक नगर परिषद की ओर से कोई ठोस दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया गया है. कार्यपालक अभियंता धर्मेंद्र कुमार भारती ने बताया कि यदि नगर परिषद द्वारा किसी कटरा मालिक से एकरनामा या लीज समझौता किया गया है, तो उसकी सूची भी उपलब्ध कराने की मांग की गई थी. बावजूद इसके न तो कटरा धारकों की सूची सौंपी गई और न ही किसी प्रकार का वैधानिक प्रमाण दिया गया, जिससे यह साबित हो सके कि नगर परिषद को इस भूमि पर निर्माण या राजस्व वसूली का अधिकार है. इस मामले में सोन नहर विभाग ने पत्रांक 127, दिनांक 24 जनवरी 2025 को नगर परिषद बक्सर को लिखे गए पत्र में स्पष्ट रूप से कहा है कि जल संसाधन विभाग की भूमि पर बिना अनापत्ति प्रमाण पत्र के बनाए गए सभी 104 कटरा अवैध हैं. उसी पत्र के माध्यम से नगर परिषद से आग्रह किया गया कि तीन माह के भीतर इन सभी कटरा को खाली कराया जाये. इसके साथ ही तत्काल प्रभाव से इन कटरा से किसी भी प्रकार की वसूली पर रोक लगाने का आदेश भी दिया गया. इतना ही नहीं, सोन नहर विभाग ने सदर अंचल अधिकारी को भी पत्रांक 05, दिनांक 15 जनवरी 2025 को पत्र लिखकर जानकारी दी थी कि नगर परिषद द्वारा सिंचाई विभाग की भूमि पर अवैध कब्जा कर 104 कटरा का निर्माण कराया गया है और इसे अतिक्रमण मुक्त कराया जाना आवश्यक है.

डीएम से भी सोन नहर के अधिकारियों ने लगाया था गुहार :

मामले की गंभीरता को देखते हुए सोन नहर विभाग ने जिलाधिकारी को भी पत्रांक 127, दिनांक 24 जनवरी 2025 को सूची सहित पूरी जानकारी उपलब्ध करायी गयी थी. इसके बावजूद जब कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो पुनः पत्रांक 691, दिनांक 16 मई 2025 को जिला प्रशासन को स्मरण पत्र भेजा गया. विभाग का कहना है कि बार-बार पत्राचार के बावजूद जिला प्रशासन की ओर से कोई निर्णायक कदम नहीं उठाया गया, जिससे विभाग को लगातार राजस्व की हानि हो रही है. हालिया घटनाक्रम में सोन नहर के एसडीओ द्वारा पत्रांक 02, दिनांक 5 जनवरी 2026 को नगर परिषद को एक और पत्र भेजा गया है, जिसमें कहा गया है कि 104 कटरा से अवैध रूप से की जा रही वसूली की राशि सिंचाई विभाग के कोष में जमा करायी जाये. इस पत्र में भी नगर परिषद को स्पष्ट निर्देश दिया गया कि वह अब तक की वसूली का ब्यौरा दे और संबंधित राशि विभाग के खाते में जमा करे.

हालांकि, सोन नहर विभाग का आरोप है कि आज तक न तो उनके किसी पत्र का नगर परिषद द्वारा लिखित जवाब दिया गया है और न ही एक रुपये की राशि विभाग के खाते में जमा करायी गयी है. इससे यह सवाल उठता है कि आखिर सरकारी विभागों के बीच चल रहे इस विवाद का समाधान कब और कैसे होगा.

क्या कहता है कानून

बिहार सार्वजनिक भूमि अतिक्रमण अधिनियम, 1956 किसी भी सरकारी भूमि पर बिना वैध अनुमति कब्जा अतिक्रमण माना जाता है,अतिक्रमण पाए जाने पर सक्षम पदाधिकारी को तत्काल हटाने का अधिकार है, दोषी संस्था/व्यक्ति से क्षतिपूर्ति और जुर्माना वसूलने का प्रावधान है,सोन नहर विभाग के अनुसार, 104 कटरा इसी अधिनियम के तहत अवैध हैं बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007 नगर परिषद को किसी अन्य विभाग की भूमि पर निर्माण से पहले लिखित स्वीकृति और हस्तांतरण आवश्यक है, बिना स्वीकृति किया गया निर्माण अवैध निर्माण की श्रेणी में आता है,ऐसे मामलों में निर्माण हटाने और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने का प्रावधान है.

क्या कहते हैं अधिकारी

नगर परिषद समेत सीओ और जिला अधिकारी को बार- बार पत्र दिया गया है. विभाग के भूमि पर नगर परिषद के द्वारा अतिक्रमण किया गया है उसे मुक्त कराया जाये. साथ ही साथ कहा गया है. कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा. वहीं नगर परिषद से कहा गया है और कि आपके पास कोई कटरा संबंधित कोई ठोस साक्ष्य है तो उसे उपलब्ध कराया नहीं तो कटरा से वसूली गई राशि विभाग के कोष जमा करें.

धर्मेंद्र कुमार भारती, कार्यपालक अभियंता, सोन नहर, बक्सर

क्या कहते हैं इओ

सोन नहर की जमीन पर बने कटरा का हैंडओवर नगर परिषद को किया गया है. जिस कारण उसकी एकरारनामा से लेकर राशि वसूलने की जवाबदेही नगर परिषद की है. एनओसी का कही मामला नहीं बनता है. फिर भी इसे लेकर बोर्ड की बैठक में कागजी कार्रवाई को लेकर निर्णय लिया जायेगा.

कुमार ऋत्विक, इओ, नगर परिषद, बक्सर

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लेखक के बारे में

Author: Parshant Kumar Rai

Published by: Janardan Pandey

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