राजपुर से पंकज कमल की रिपोर्ट
BPSC 70th Result Final : प्रखंड के बन्नी गांव की रहने वाली सिब्बा कौसर ने बीपीएससी (BPSC) की परीक्षा में सफलता हासिल कर अपने परिवार और पूरे जिले का नाम रोशन किया है. परीक्षा का रिजल्ट घोषित होते ही परिजनों के बीच खुशी का माहौल छा गया. यह खबर पूरे गांव में तेजी से फैल गई, जिसके बाद स्थानीय समाजसेवियों और बुद्धिजीवियों ने उनके घर पहुंचकर बधाई देना शुरू कर दिया है.
सिब्बा की शुरुआती पढ़ाई गांव से ही हुई, जिसके बाद उन्होंने बक्सर के एमपी हाई स्कूल से आगे की पढ़ाई की. उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद उन्होंने पटना के हज भवन द्वारा संचालित शिक्षा केंद्र से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू की थी.
पूर्व DM रमन कुमार से मिली थी आगे बढ़ने की प्रेरणा
सिब्बा कौसर ने बताया कि साल 2014 में उन्होंने एमपी हाई स्कूल से मैट्रिक (10वीं) की परीक्षा पास की थी. उस दौरान स्कूल के एक कार्यक्रम में पहुंचे बक्सर के तत्कालीन जिलाधिकारी (डीएम) रमन कुमार ने बच्चों को आगे पढ़ने के लिए प्रेरित किया था और सरकारी योजनाओं को बारीकी से समझाया था.
डीएम रमन कुमार की बातों से प्रेरित होकर सिब्बा के मन में प्रशासनिक सेवा में जाने का हौसला जागा. इस सपने को पूरा करने में उनके पिता मीर सफीउल्लाह और माता साफिया खातून का बहुत बड़ा योगदान रहा.
सेल्फ स्टडी से पाई सफलता
सिब्बा ने बताया कि वे साल 2020 से ही इस परीक्षा की तैयारी में जुटी थीं. उनका सबसे पसंदीदा विषय इतिहास (History) है, जिससे पढ़कर वे आगे चलकर आईएएस (IAS) अधिकारी बनने का सपना देख रही हैं. इस दिशा में उन्हें यह पहली सफलता मिली है. उन्होंने बताया कि मन में मजबूत इच्छाशक्ति रखकर उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और इसके लिए किसी कोचिंग संस्थान का सहारा नहीं लिया.
उन्होंने लगातार दो वर्षों तक खुद से पढ़ाई (सेल्फ स्टडी) करके यह मुकाम हासिल किया है. उनका मानना है कि किताबों को अपना दोस्त बनाकर और घर पर रहकर भी पढ़ाई का अच्छा माहौल बनाया जा सकता है, बशर्ते उसमें परिवार का पूरा सहयोग मिले.
पांच बहनों में चौथे नंबर पर हैं सिब्बा
सिब्बा कौसर ने अपनी सफलता का आदर्श अपने पिता को बताया है. वे पांच बहनों में चौथे नंबर पर हैं. उनसे बड़ी तीन बहनें सरकारी स्कूल में शिक्षक हैं, जबकि उनकी सबसे छोटी बहन अभी बीएड (B.Ed) कर रही है. उनके पिता मीर सफीउल्लाह साल 2001 से 2006 तक और माता साफिया खातून साल 2006 से 2016 तक अपने पंचायत की मुखिया रही हैं.
परिवार में खुशी का माहौल
मुखिया रहने के दौरान इन लोगों ने पंचायत का विकास तो किया ही, साथ ही अपनी बेटियों को भी कभी बोझ नहीं समझा. पिता के सपने और मां की इच्छा को पूरा करने के लिए ही सिब्बा अधिकारी बनी हैं. उनके पिता ने खुशी जताते हुए कहा कि उनकी बेटी हमेशा देश और महिलाओं के लिए कुछ अच्छा करने की बात करती थी, आज उसने पूरे जिले का मान बढ़ा दिया है.
ग्रामीण क्षेत्र की छात्राओं को दिया संदेश: चुनौतियों से न हारें, प्रयास जारी रखें
सिब्बा कौसर ने परीक्षा की तैयारी कर रही दूसरी छात्राओं के लिए कहा कि ग्रामीण इलाकों में गरीबी या पारिवारिक सपोर्ट न मिलने की वजह से कई बेटियां पढ़ाई छोड़ देती हैं, लेकिन उन्हें हिम्मत नहीं हारनी चाहिए और अपनी पढ़ाई जारी रखनी चाहिए. उन्होंने माता-पिता से भी अपनी बेटियों को सपोर्ट करने की अपील की. सिब्बा ने कहा कि मेहनत करने वालों का नाम अगली बार इस लिस्ट में जरूर आएगा, इसलिए प्रयास जारी रखें.
राजस्व अधिकारी बनने के बाद आने वाली चुनौतियों और जिम्मेदारियों को वे स्वीकार करती हैं और अपने कर्तव्य को हमेशा सबसे ऊपर रखेंगी.
