नालंदा : अतिक्रमण से फर्जी प्रमाणपत्र तक, डीएम ने कई मामलों में समयबद्ध जांच के दिए आदेश

नालंदा जिलाधिकारी ने 'सबका सम्मान-जीवन आसान' पहल के तहत आयोजित जन-सुनवाई में लोगों की समस्याओं पर सख्त रुख अपनाया. उन्होंने अतिक्रमण, पेंशन, फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र और भूमि विवाद जैसे विभिन्न मामलों में अधिकारियों को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए.

राज्य सरकार की जन-केंद्रित पहल "सबका सम्मान–जीवन आसान" के तहत नालंदा समाहरणालय में आयोजित "सेवा–संवाद–समाधान" कार्यक्रम में जिलाधिकारी उदिता सिंह ने आम लोगों की शिकायतों पर सख्त रुख अपनाया.

जन-सुनवाई के दौरान जिले के विभिन्न प्रखंडों एवं पंचायतों से पहुंचे 35 फरियादियों की समस्याओं को सुनते हुए उन्होंने संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की और प्रत्येक मामले के समयबद्ध निष्पादन के निर्देश दिए.

जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि जन-शिकायतों के निस्तारण में किसी भी स्तर पर लापरवाही, अनावश्यक विलंब या शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी. जन-सुनवाई के दौरान जिलाधिकारी ने फरियादियों से सीधे संवाद कर एक-एक आवेदन की समीक्षा की और संबंधित विभागों के अधिकारियों को ऑन-द-स्पॉट कार्रवाई के निर्देश दिए.

उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा है कि लोगों को कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ें और उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित हो.

सरकारी जमीन, अतिक्रमण और भूमि विवाद की जांच

जन-सुनवाई में सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने, भूमिहीन महादलित परिवारों को सरकारी भूमि उपलब्ध कराने, जमाबंदी पंजी में कथित छेड़छाड़, खरीदी गई जमीन पर अवैध कब्जा तथा कृषि सिंचाई के लिए ट्रांसफॉर्मर लगाने से संबंधित कई आवेदन प्राप्त हुए.

इन मामलों को गंभीर मानते हुए जिलाधिकारी ने अपर समाहर्ता-सह-जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी को विस्तृत जांच कर दोषी व्यक्तियों की पहचान करने तथा नियमानुसार कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि राजस्व से जुड़े मामलों का निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से निस्तारण होना चाहिए तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

पेंशन और दिव्यांग शिक्षक की प्रतिनियुक्ति के मामले

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना के एक लाभार्थी ने शिकायत की कि अभिलेख में पिता का नाम गलत दर्ज होने के कारण कई महीनों से पेंशन की राशि नहीं मिल रही है. इस पर जिलाधिकारी ने सहायक निदेशक, सामाजिक सुरक्षा कोषांग को रिकॉर्ड में आवश्यक संशोधन कर शीघ्र भुगतान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया.

उन्होंने कहा कि तकनीकी त्रुटियों के कारण पात्र लाभार्थियों को सरकारी योजनाओं से वंचित नहीं किया जा सकता. 80 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगता के आधार पर प्रतिनियुक्ति अवधि विस्तार से संबंधित आवेदन पर जिलाधिकारी ने जिला शिक्षा पदाधिकारी को नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई कर शीघ्र निर्णय लेने का निर्देश दिया.

फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र और पैक्स पुनर्गठन की जांच

फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र के आधार पर स्वच्छता पर्यवेक्षक के चयन तथा मेयार प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति (पैक्स), राजगीर के कथित अवैध पुनर्गठन से संबंधित शिकायतों पर भी जिलाधिकारी ने गंभीर रुख अपनाया.

उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया. पैक्स पुनर्गठन से जुड़े मामले के निष्पादन के लिए उप विकास आयुक्त को समयबद्ध जांच कर प्रतिवेदन उपलब्ध कराने को कहा गया.

आयुर्वेदिक अस्पताल निर्माण और विभागों को निर्देश

अधिग्रहित भूमि पर सामाजिक उपयोग के लिए प्रस्तावित आयुर्वेदिक अस्पताल निर्माण से संबंधित शिकायत पर जिलाधिकारी ने अपर समाहर्ता को स्थल की जांच कर विस्तृत प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया.

जन-सुनवाई में प्राप्त अन्य सभी आवेदनों को पुलिस, राजस्व, सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा एवं विकास विभागों के अधिकारियों को हस्तांतरित करते हुए जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक आवेदन की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी मामलों का निर्धारित समय सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण निष्पादन सुनिश्चित किया जाए.

उन्होंने कहा कि यदि किसी भी स्तर पर शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही या अनावश्यक विलंब पाया गया तो संबंधित अधिकारी की व्यक्तिगत जवाबदेही तय करते हुए नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.

प्रमुख शिकायतें

  • सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग.
  • भूमिहीन महादलित परिवारों को सरकारी भूमि उपलब्ध कराने का मामला.
  • जमाबंदी पंजी में कथित छेड़छाड़ की शिकायत.
  • फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र के आधार पर स्वच्छता पर्यवेक्षक चयन का मामला.
  • मेयार पैक्स, राजगीर के कथित अवैध पुनर्गठन की शिकायत.
  • कृषि सिंचाई के लिए ट्रांसफॉर्मर लगाने की मांग.
  • खरीदी गई भूमि पर अवैध कब्जे की शिकायत.
  • इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन में पिता का नाम गलत होने के कारण भुगतान नहीं मिलने का मामला.
  • 80 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगता के आधार पर प्रतिनियुक्ति अवधि विस्तार का आवेदन.
  • अधिग्रहित भूमि पर आयुर्वेदिक अस्पताल निर्माण से संबंधित शिकायत.

डीएम उदिता सिंह ने कहा कि जन-शिकायतों का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निष्पादन प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि आम नागरिकों की समस्याओं के समाधान में किसी भी स्तर पर शिथिलता या लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी. इसके साथ ही उन्होंने निर्देश दिया कि प्रत्येक अधिकारी अपने स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित करें और सभी मामलों का त्वरित निष्पादन करें.


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By Kanchan kumar

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