बार-बार नहीं पहुंचे गवाह, कोर्ट ने DM-SP को लिखा पत्र, कहा- नहीं आए तो आरोपी हो सकते हैं बरी

पश्चिम चंपारण व्यवहार न्यायालय ने सत्र वादों में गवाहों की लगातार अनुपस्थिति पर चिंता जताई है. जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजकर गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया है.

Bettiah News: पश्चिम चंपारण व्यवहार न्यायालय के जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश-11 प्रेम चंद्र वर्मा ने लंबे समय से लंबित सत्र वादों में अभियोजन पक्ष के गवाहों की लगातार अनुपस्थिति पर कड़ा रुख अपनाया है. न्यायालय ने पश्चिम चंपारण के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजकर गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है.

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि यदि अभियोजन पक्ष समय पर गवाहों को प्रस्तुत नहीं करता है तो साक्ष्य के अभाव में आरोपितों के बरी होने की स्थिति बन सकती है. ऐसी स्थिति में इसकी जिम्मेदारी अभियोजन पक्ष की होगी.

बार-बार आदेश के बाद भी नहीं पहुंचे गवाह

न्यायालय ने कहा कि कई बार प्रक्रिया और वारंट जारी किए जाने के बावजूद न तो गवाहों को न्यायालय में प्रस्तुत किया गया और न ही अनुपालन प्रतिवेदन उपलब्ध कराया गया. इससे मामलों के निष्पादन में लगातार देरी हो रही है.

इसी वजह से पुलिस अधीक्षक को संबंधित पुलिस पदाधिकारियों को आवश्यक निर्देश देने और स्वयं व्यक्तिगत स्तर पर पहल कर गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित कराने को कहा गया है.

2014 के सत्र वाद में 27 जुलाई को अगली सुनवाई

पहला मामला सत्र वाद संख्या 2733/2014 से जुड़ा है, जो बेतिया मुफस्सिल थाना कांड संख्या 228/2007 का है. इस मामले में 20 जनवरी 2026 को गैर-परीक्षित गवाहों के लिए प्रक्रिया जारी की गई थी, लेकिन अब तक वे न्यायालय में उपस्थित नहीं हुए.

इस मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है.

दूसरे मामले में 21 जुलाई को होगी सुनवाई

दूसरा मामला सत्र वाद संख्या 477/2024 से संबंधित है, जो सिकटा थाना कांड संख्या 111/2022 का है. इस मामले में 17 नवंबर 2025 को गवाहों की उपस्थिति के लिए प्रक्रिया जारी की गई थी, लेकिन उसका भी अनुपालन नहीं हो सका.

इस मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई 2026 को निर्धारित है.

कोर्ट ने दी स्पष्ट चेतावनी

न्यायालय ने दोनों मामलों को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि अभियोजन पक्ष गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित करने में विफल रहता है तो साक्ष्यों के अभाव में आरोपितों के बरी होने की स्थिति बन सकती है, जिसकी जवाबदेही अभियोजन पक्ष की होगी.


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लेखक के बारे में

अवध किशोर तिवारी तीन दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. इन्होंने हिंदी दैनिक राष्ट्रीय सहारा के दिल्ली संस्करण से करियर की शुरुआत की. वर्तमान में वर्ष 2018 से प्रभात खबर के बेतिया ब्यूरो कार्यालय से जुड़े हैं. सामाजिक, अपराध, राजनीतिक एवं जनसरोकार से जुड़ी खबरों पर उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है

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