Shamho Diara Flood : बेगूसराय के शाम्हो दियारा क्षेत्र की तीन प्रमुख सड़कों पर पानी फैलने से आवागमन बाधित हो गया है. खासकर झगड़ाहा-जगनसैदपुर-पथुआ क्षेत्र के लोगों को मुख्य मार्ग से कटने की आशंका सताने लगी है. बाढ़ से निपटने के लिए सरकारी स्तर पर राशि और संसाधन उपलब्ध कराए जाने के बावजूद जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं को लेकर ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं. स्थानीय लोगों का आरोप है कि बाढ़ के दौरान नाव,सामुदायिक रसोई, स्वास्थ्य सुविधा, पशुओं के लिए चारा और सुरक्षित आवागमन जैसी मूलभूत व्यवस्थाएं अपेक्षा के अनुरूप नहीं दिखाई देतीं.
सड़कों पर पानी फैलने से हादसे की बढ़ी आशंका
कई सड़कों के दोनों ओर पानी फैल गया है.पानी के नीचे सड़क की वास्तविक स्थिति और गड्ढों का पता नहीं चलने से वाहन चालकों और राहगीरों के लिए दुर्घटना का खतरा बढ़ गया है. ग्रामीणों के अनुसार बाढ़ के दौरान सड़क किनारे बांस-बल्लियों से मार्ग की सीमा तय करने के साथ बैरिकेडिंग और संकेतक लगाए जाते थे, लेकिन इस वर्ष कई जगह ऐसी व्यवस्था नजर नहीं आ रही है. बाहर से आने वाले लोगों के लिए यह स्थिति और अधिक खतरनाक हो सकती है. वहीं हाल के वर्षों में बनी कुछ सड़कों पर बाढ़ के कारण कटाव की स्थिति उत्पन्न हो गई है.अधूरी और क्षतिग्रस्त सड़कों को लेकर भी ग्रामीणों ने शिकायत की है.उनका आरोप है कि निर्माण कार्य में लापरवाही के कारण बाढ़ के समय समस्या और गंभीर हो जाती है.
बाढ़ से बर्बाद हो गयी फसल, पशुचारे की चिंता
बाढ़ का सीधा असर किसानों और पशुपालकों पर पड़ रहा है.खेतों में पानी भरने से फसलों को नुकसान पहुंच रहा है,जबकि पशुओं के लिए चारे की समस्या भी सामने आने लगी है.ग्रामीणों का कहना है कि प्रभावित किसानों को राहत देने और पशुओं के लिए पर्याप्त चारे की व्यवस्था करने को लेकर अभी तक ठोस तैयारी दिखाई नहीं दे रही है. ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ की स्थिति का आकलन सिर्फ गंगा के जल स्तर से नहीं किया जाना चाहिए. बल्कि सहायक और बरसाती नदियों को भी ध्यान में रखना चाहिए. यदि अगले कुछ दिनों में लगातार बारिश हुई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है.
खानापूर्ति नहीं, स्थानीय समाधान की उठ रही मांग
बाढ़ प्रभावित इलाकों में जनप्रतिनिधियों के दौरे को लेकर भी ग्रामीणों में नाराजगी है.ग्रामीणों का कहना है कि हर वर्ष बाढ़ के दौरान नाव से क्षेत्र का भ्रमण कर आश्वासन दिया जाता है,लेकिन जमीनी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो पाता.लोगों की मांग है कि पिछली गलतियों से सीख लेते हुए बाढ़ से पहले ही आवश्यक तैयारियां पूरी की जाएं.
ग्रामीणों ने कहा- व्यवस्था तुरंत दुरुस्त करे प्रशासन
ग्रामीणों ने प्रशासन से बाढ़ प्रभावित सड़कों का तत्काल निरीक्षण कराने,खतरनाक स्थानों पर बैरिकेडिंग व संकेतक लगाने,पर्याप्त नाव उपलब्ध कराने,स्वास्थ्य एवं पशु चिकित्सा सेवाएं सुनिश्चित करने तथा सामुदायिक रसोई शुरू करने की मांग की है.साथ ही किसानों की फसल क्षति का आकलन कर राहत देने और पशुपालकों के लिए पर्याप्त चारे की व्यवस्था करने की मांग उठाई गई है.ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ की गंभीरता का इंतजार करने के बजाय मौजूदा हालात को देखते हुए अभी से राहत और बचाव की ठोस तैयारी जरूरी है.समय रहते व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई तो जलस्तर बढ़ने या लगातार बारिश की स्थिति में शाम्हो दियारा के लोगों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं.
