Begusarai Simaria Ganga Ghat : बेगूसराय जिले के सिमरिया गंगा घाट पर रविवार को एक दर्दनाक हादसा हो गया. गंगा स्नान करने गया 20 वर्षीय रोहित कुमार पानी के तेज बहाव में डूब गया. घटना के 24 घंटे बीत जाने के बाद भी एसडीआरएफ (SDRF) और स्थानीय गोताखोरों को उसका शव नहीं मिल सका है. इस घटना के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है. प्रशासन रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटा है.
सिमरिया घाट पर कैसे हुआ यह दर्दनाक हादसा
रोहित कुमार चकिया थाना क्षेत्र के रूपनगर वार्ड-4 के रहने वाले विनोद साह का पुत्र था. बताया जा रहा है कि वह सिमरिया घाट स्थित एक होटल में काम करता था. रविवार को अपना काम खत्म करने के बाद वह सीढ़ी घाट के पास गंगा में नहाने चला गया. नहाने के दौरान अचानक गंगा की तेज लहरों ने उसे अपनी चपेट में ले लिया और देखते ही देखते वह गहरे पानी में समा गया.
एसडीआरएफ और गोताखोरों का रेस्क्यू ऑपरेशन
युवक के डूबने की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और गोताखोरों की टीम मौके पर पहुंच गई. हालात को देखते हुए तुरंत एसडीआरएफ (SDRF) को भी मदद के लिए बुलाया गया. सोमवार को दूसरे दिन भी रेस्क्यू ऑपरेशन पूरे जोर-शोर से चलाया गया. गोताखोरों ने गंगा के चप्पे-चप्पे को छाना, लेकिन 24 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद भी शव बरामद करने में कोई कामयाबी हाथ नहीं लगी है.
तेज बहाव और बढ़ते जलस्तर से आ रही मुश्किल
शव खोजने के अभियान में जुटी टीम को कई प्राकृतिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है. स्थानीय गोताखोर अनिल कुमार ने बताया कि गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है. इसके साथ ही पानी का करंट (तेज बहाव) बहुत अधिक है. इसी तेज बहाव के कारण गहराई में जाकर सर्च ऑपरेशन चलाने में भारी परेशानी हो रही है और गोताखोरों को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है.
सीओ ने दिया लगातार सर्च अभियान का भरोसा
घटना की गंभीरता को देखते हुए बरौनी के अंचलाधिकारी (CO) हेमंत अंकुर भी सोमवार को सिमरिया घाट पहुंचे. उन्होंने घटनास्थल का जायजा लिया और अधिकारियों से रेस्क्यू की पल-पल की जानकारी ली. सीओ हेमंत अंकुर ने पीड़ित परिवार को सांत्वना देते हुए आश्वासन दिया कि जब तक शव नहीं मिल जाता, सर्च अभियान लगातार जारी रहेगा. प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद है.
घाट पर टकटकी लगाए बैठे हैं बेबस परिजन
इस हादसे ने रोहित के परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है. घटना के बाद से ही परिजन सुबह से भूखे-प्यासे गंगा घाट पर जमे हुए हैं. वे टकटकी लगाए इस आस में गंगा को निहार रहे हैं कि शायद उनके बेटे का शव पानी से बाहर आ जाए. लेकिन, जैसे-जैसे शाम ढलती गई, गोताखोरों के साथ-साथ परिवार के चेहरों पर भी निराशा गहराती चली गई.
