सभी मर्ज की एक दवा पारासिटामोल

Published at :23 Aug 2015 4:03 AM (IST)
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सभी मर्ज की एक दवा पारासिटामोल

बांका : सदर अस्पताल में घंटों इंतजार के बाद कुछ घंटों के लिए ही मरीजों को चिकित्सकों के दर्शन होते हैं. इस दौरान आप जांच करा लिये तो,समझ लीजिए आप खुशकिस्मत हैं. शनिवार की शाम 4. 30 बजे तक महिला ओपीडी में चिकित्सक नहीं थे. दोपहर से ही कई मरीज शाम की ओपीडी शुरू होने […]

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बांका : सदर अस्पताल में घंटों इंतजार के बाद कुछ घंटों के लिए ही मरीजों को चिकित्सकों के दर्शन होते हैं. इस दौरान आप जांच करा लिये तो,समझ लीजिए आप खुशकिस्मत हैं.

शनिवार की शाम 4. 30 बजे तक महिला ओपीडी में चिकित्सक नहीं थे. दोपहर से ही कई मरीज शाम की ओपीडी शुरू होने का इंतजार कर रहे थे. बच्चों के साथ महिलाएं अस्पताल के बरामदे में दिन भर इसी इंतजार में रही कि चिकित्सक से जांच कराने के बाद ही घर जायेंगे,

लेकिन चिकित्सक तो यहां अपनी मरजी से आते हैं और कुछ घंटे बाद वापस चले जाते हैं. और दूर-दराज के मरीज रहते है तो वो महिला चिकित्सक को छोड़ कर पुरुष चिकित्सक से दिखा कर वापस लौट जाते हैं. मरीज करते हैं डॉक्टर का इंतजार

पुरुष चिकित्सक कक्ष दरवाजा खुला था और अंदर में चिकित्सक मौजूद थे. बाहर में महिला एवं पुरुष मरीजों की लंबी कतार लगी थी. चिकित्सक सिर्फ मरीजों की आवाज सुन कर उन्हें दवाई लिख कर बाहर निकाल देते हैं. मरीज अगर बुखार या चोट लगे शरीर को देखने की बात करते हैं तो चिकित्सक का जवाब एक ही रहता है कि दवाई लिख दिये हैं लेकर खाइये सब ठीक हो जायेगा.

चिकित्सक कक्ष के बाहर खड़े रामपुर गांव निवासी पप्पू सिंह, चुटिया निवासी प्रकाश कुमार, सुनील कुमार, महेंद्र दास सहित अन्य मरीजों का कहना था कि चिकित्सक को आने जाने का कोई समय नहीं है. अगर कुछ समय इंतजार करने के बाद चिकित्सक से दिखाते है तो वो बीना जांच किये दवा खिल देते है. वो भी करीब-करीब लोगों को एक ही दवाई दे देते है. जिससे ऐसा लगता है विभिन्न रोगों में एक ही दवाई काम करता रहे.

वहीं महिला चिकित्सक कक्ष की रख वाली कर रहे होमगार्ड के जवान से महिला चिकित्सक के वारे पूछे जाने पर उन्हें बताया कि मैडम आयी थी चली गयी. अब कितने देर या कब आयेगी पता नहीं. इससे कई मरीज का कहना था कि सुबह से दोपहर हो गया लेकिन अब तक जांच नहीं करा सके.

यहां इलाज कराने का मतलब पूरा दिन खराब होना. हम लोग मजदूर किस्म के आदमी हैं. रोज कमाते हैं और रोज खाते हैं. यहां आने पर हमेशा पूरा दिन बरबाद हो जाता हैं. इस संबंध में बातचीत करने के लिए जब सीएस जितेंद्र कुमार के फोन पर संपर्क किया गया तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया.

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