पुस्तकालय में नये सिलेबस की एक भी किताब नहीं

Published at :07 Oct 2016 7:34 AM (IST)
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पुस्तकालय में नये सिलेबस की एक भी किताब नहीं

नवीनगर : एक ओर बिहार सरकार शिक्षा विभाग में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने पर जोर दे रही है तथा शिक्षकों को लगतार यह चेतावनी भी दी जा रही है कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले. वही, विद्यालय में अवस्थित अधिकतर पुस्तकालयों में नये सिलेबस की एक भी पुस्तक उपलब्ध नहीं है और शिक्षक बिना किताब के […]

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नवीनगर : एक ओर बिहार सरकार शिक्षा विभाग में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने पर जोर दे रही है तथा शिक्षकों को लगतार यह चेतावनी भी दी जा रही है कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले. वही, विद्यालय में अवस्थित अधिकतर पुस्तकालयों में नये सिलेबस की एक भी पुस्तक उपलब्ध नहीं है और शिक्षक बिना किताब के ही बच्चों को पढ़ाने पर विवश हैं.
ऐसा ही एक मामला सत्येंद्र नारायण सिंह (एसएनएस) उच्च विद्यालय प्लस टू नवीनगर रोड का प्रकाश में आया है. इस विद्यालय में अवस्थित पुस्तकालय में नये सिलेबस की एक भी पुस्तक उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण छात्र- छात्राओं को पढ़ाई करने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और उनका कोर्स पूरा होने पर सवालिया निशान लगा हुआ है. सन 1961 में स्थापित इस विद्यालय को वर्ष 2002 में ही प्लस टू की मान्यता प्राप्त हो गयी है.
इसके बावजूद यह विद्यालय 14 वर्षों से संसाधनों की कमी से जूझ रहा है. बाउंड्री से लेकर भवन, चापाकल, शौचालय, लैब रूम तथा शिक्षक का अभाव समेत न जाने कितनी समस्याओं से जूझ रहा है. जिसके कारण विद्यालय में पढ़नेवाले 646 छात्र- छात्राओं का भविष्य अंधकारमय बना हुआ है. इसकी सुधि लेने वाला कोई नहीं है. कहने को तो, विद्यालय के पुस्तकालय में एक हजार पुस्तकें उपलब्ध हैं. लेकिन, सभी पुस्तकें पुराने कोर्स की हैं या फिर उपन्यास, कहानी, रामायण, महाभारत, गीता आदि की हैं. नये सिलेबस की पुस्तकें नहीं होने के कारण सबसे ज्यादा परेशानी गरीब मेधावी छात्र-छात्राओं को हो रही है. साधन संपन्न बच्चे तो किसी तरह बाजार से पुस्तकें खरीद लेते हैं, पर गरीब बच्चे बिना किताब के ही पढ़ाई करने को विवश हैं.
छात्र डौली कुमारी, पूजा, पिंकी आदि का कहना है कि कई बार पुस्तक उपलब्ध कराने के लिए विद्यालय प्रबंधक से गुहार लगायी गयी, पर कोई फायदा नहीं हुआ. वहीं छात्र मनीष कुमार, लवकुश कुमार ने बताया कि जर्जर भवन की छत से बरसात के दिनों में हमेशा पानी टपकता रहता है. जिसके नीचे बैठ कर दशहत भरे माहौल में सभी छात्र- छात्राएं शिक्षा ग्रहण करते हैं. इस संबंध में पुस्तकालय अध्यक्ष रेणुका कुमारी से पूछने पर उन्होंने बताया कि नये सिलेबस की पुस्तकें उपलब्ध कराने के लिए कई बार विद्यालय प्रबंधक का ध्यान आकृष्ट कराया गया है.
इसके बावजूद स्थिति ज्यों का त्यों कायम है. वहीं प्रधानाध्यापक महेंद्र भगत से पूछने पर कहा कि पुस्तक उपलब्ध कराने के साथ-साथ विद्यालय में व्याप्त संसाधनों की सारी कमियों से संबंधित सूचना विभाग के उच्च अधिकारियों को लिखित रूप में दी गयी है. इसके अलावे कई बार मौखिक रूप से भी मिल कर संसाधन उपलब्ध कराने का गुहार भी लगायी गयी है, लेकिन हर बार आश्वासन के सिवाय और कुछ भी नहीं मिल सका है.
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