दाउदनगर के इकलौते टाउन हॉल को देखनेवाला कोई नहीं

Updated at : 02 Aug 2018 3:55 AM (IST)
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दाउदनगर के इकलौते टाउन हॉल को देखनेवाला कोई नहीं

दाउदनगर : किसी भी शहर की पहचान वहां की सांस्कृतिक एवं रचनात्मक गतिविधियों से होती है. इसके लिए आवश्यक है कि शहर में एक टाउन हॉल भी हो, जहां छोटे-बड़े सांस्कृतिक, राजनीतिक व सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा सके. इन्हीं उद्देश्यों को लेकर करीब डेढ़ दशक पूर्व तत्कालीन विधायक राजाराम सिंह की ऐच्छिक निधि […]

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दाउदनगर : किसी भी शहर की पहचान वहां की सांस्कृतिक एवं रचनात्मक गतिविधियों से होती है. इसके लिए आवश्यक है कि शहर में एक टाउन हॉल भी हो, जहां छोटे-बड़े सांस्कृतिक, राजनीतिक व सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा सके. इन्हीं उद्देश्यों को लेकर करीब डेढ़ दशक पूर्व तत्कालीन विधायक राजाराम सिंह की ऐच्छिक निधि से दाउदनगर के मौलाबाग में टाउन हॉल का निर्माण कराया गया था. तब इसके निर्माण में करीब चार लाख खर्च किये गये थे. बाद में इसे बेहतर बनाने के लिए और भी राशि खर्च की गयी. कुछ वर्षों तक इस भवन का हाल तो सही रहा, लेकिन बाद में समुचित रखरखाव के अभाव में यह भवन जर्जर होता चला गया और आज स्थिति यह है कि इस भवन में कोई भी कार्यक्रम सही से नहीं हो सकता. छत से पानी टपकता है .

कमेटी भी गठित: जानकारी के अनुसार, इसकी देखरेख के लिए अनुमंडल पदाधिकारी की अध्यक्षता में टाउन हॉल की एक कमेटी भी है, जो काफी पुरानी हो चुकी है. समय-समय पर टाउन हॉल में कई कार्यक्रम भी कराया जाते है. जिसके बदले टाउन हॉल को आय भी होती है. लेकिन, फिर भी इसके जीर्णोद्धार की कहीं कोई चर्चा नहीं सुनी जाती और टाउन हॉल की स्थिति जर्जरता शिकार होती जा रही है. इसके उत्थान के लिए कोई सार्थक पहल होता नहीं दिख रहा है .

व्यक्तिगत स्तर पर कर रहे पहल

टाउन हॉल कमेटी के अध्यक्ष सह एसडीओ अनीस अख्तर ने कहा कि टाउन हॉल को विकसित करने के लिए व्यक्तिगत स्तर पर वे पहल कर रहे हैं .प्रयास किया जा रहा है कि टाउन हॉल का जीर्णोद्धार जल्द से जल्द कराया जाए ,ताकि टाउन हॉल का समुचित लाभ आम जनता को मिल सके.

दाउदनगर में टाउन हॉल का शिलान्यास ओबरा के तत्कालीन विधायक सह बिहार सरकार के तत्कालीन मंत्री रामविलास सिंह द्वारा 17 जुलाई 1993 को गोह के तत्कालीन विधायक राम शरण यादव की अध्यक्षता में आयोजित एक समारोह में किया गया था. लेकिन, इसका निर्माण कार्य 2002 के आसपास ओबरा के तत्कालीन विधायक राजाराम सिंह के विधायक ऐच्छिक निधि से शुरू कराया था. लोगों का कहना है कि तत्कालीन ओबरा विधायक के ऐच्छिक निधि से शहर में टाउन हॉल का निर्माण तो कर दिया गया, लेकिन उनके बाद के जनप्रतिनिधियों ने शायद इस ओर ध्यान नहीं दिया ,जिसके कारण एक ओर जहां टाउन हॉल का विकास होना चाहिए था. तो इसके विपरीत टाउन हॉल की स्थिति दिन-प्रतिदिन खराब होती जा रही है. यदि यही स्थिति रही तो आने वाले समय में यह भी एक जर्जर भवन में तब्दील होकर रह जाएगा.

देखरेख के अभाव में शहरवासियों को इसका समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है. टाउन हॉल की स्थिति दिन-प्रतिदिन खराब होती चली जा रही है. परिसर में बड़े-बड़े घास फूंस उग गए हैं .गंदगी का अंबार लगा हुआ है .लोगों का कहना है कि कोई भी सांस्कृतिक कार्यक्रम या अन्य कार्यक्रम करने लायक टाउन हॉल नहीं रह गया है .अंदर में साउंड गूंजते रहता है. छत से पानी टपकने की भी शिकायत मिलती है .कुल मिला कर यह कहा जाये, तो गलत नहीं होगा कि यह टाउन हॉल सरकारी उपेक्षा का दंश झेल रहा है.

काराकाट के वर्तमान सांसद सह केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री उपेंद्र कुशवाहा की सांसद ऐच्छिक निधि से टाउन हॉल के जीर्णोद्धार की चर्चा सुनने को मिली थी .लेकिन यहां सिर्फ चर्चा बन कर रह गयी. रालोसपा के एक नेता ने बताया कि एक बार सांसद निधि से राशि आवंटित की जा रही थी, लेकिन आवंटित की जा रही राशि की अपेक्षा एस्टीमेट की राशि अधिक थी. नये सिरे से एस्टीमेट बनवा कर कमेटी से मांग की गयी थी, लेकिन कमेटी के लोगों ने रुचि नहीं ली.

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