Bhojpur Upgraded Middle School : भोजपुर जिले के सहार प्रखंड में शिक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं. जनकपुरिया, जनकपुरिया टोला और महावीरगंज में संचालित तीन उत्क्रमित मध्य विद्यालयों के बीच की दूरी करीब एक किलोमीटर बताई जा रही है. वहीं, उपलब्ध जानकारी के अनुसार मध्य विद्यालयों की स्थापना के लिए तीन किलोमीटर की दूरी का मानक है. इन स्कूलों में छात्रों की संख्या कम होने के बावजूद शिक्षकों की पदस्थापना को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं.
एक किलोमीटर के दायरे में तीन उत्क्रमित मध्य विद्यालय
सहार प्रखंड के जनकपुरिया, जनकपुरिया टोला और महावीरगंज में तीन उत्क्रमित मध्य विद्यालय संचालित हैं. बताया जा रहा है कि इन विद्यालयों के बीच की दूरी करीब एक किलोमीटर है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि कम दूरी पर अलग-अलग मध्य विद्यालयों की स्थापना की जरूरत क्यों पड़ी और इससे शिक्षा व्यवस्था तथा सरकारी खर्च पर क्या असर पड़ रहा है.
तीन किलोमीटर दूरी के मानक को लेकर उठे सवाल
मध्य विद्यालय की स्थापना के लिए तीन किलोमीटर की दूरी का सरकारी मानक होने की बात कही जा रही है. इसके बावजूद सहार प्रखंड में करीब एक किलोमीटर के दायरे में तीन उत्क्रमित मध्य विद्यालय संचालित होने से विभागीय व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं. स्थानीय स्तर पर इस व्यवस्था की जरूरत और इसके औचित्य की समीक्षा किए जाने की मांग भी उठ रही है.
कम छात्रों वाले स्कूलों में शिक्षकों की संख्या पर सवाल
इन विद्यालयों में छात्रों की संख्या और शिक्षकों की पदस्थापना के आंकड़े भी चर्चा में हैं. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जनकपुरिया के उत्क्रमित मध्य विद्यालय में पांच शिक्षक 75 छात्रों को पढ़ा रहे हैं. वहीं, जनकपुरिया टोला में चार शिक्षक 30 छात्रों के लिए पदस्थापित हैं, जबकि महावीरगंज में छह शिक्षक 35 छात्रों को पढ़ा रहे हैं.
33 छात्रों पर एक शिक्षक का नियम
शिक्षा विभाग के निर्धारित छात्र-शिक्षक अनुपात के अनुसार 33 छात्रों पर एक शिक्षक की व्यवस्था का प्रावधान बताया गया है. इसी आधार पर इन स्कूलों में शिक्षकों की संख्या को लेकर सवाल उठ रहे हैं. खासकर महावीरगंज और जनकपुरिया टोला में छात्रों की कम संख्या के मुकाबले शिक्षकों की पदस्थापना पर विभागीय स्तर पर समीक्षा की जरूरत बताई जा रही है.
महावीरगंज में करीब 20 से 25 घर होने का दावा
स्थानीय जानकारी के अनुसार महावीरगंज में करीब 20 से 25 घर ही हैं और गांव की आबादी लगभग 150 के आसपास बताई जा रही है. इसके बावजूद यहां उत्क्रमित मध्य विद्यालय संचालित हो रहा है. कम आबादी वाले क्षेत्र में विद्यालय के संचालन और छात्रों की संख्या के अनुपात में संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं.
जनकपुरिया और महावीरगंज की आबादी करीब 1500
बताया गया है कि जनकपुरिया और महावीरगंज गांव की कुल आबादी करीब 1500 के आसपास है. दोनों गांवों को मिलाकर मतदाताओं की संख्या करीब 800 बताई जा रही है. ऐसे में स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि वर्षों पहले इन इलाकों में तीन मध्य विद्यालयों की स्थापना किस आवश्यकता और आकलन के आधार पर की गई थी.
सरकारी खर्च और संसाधनों के इस्तेमाल पर सवाल
विद्यालयों में शिक्षकों की पदस्थापना के साथ वेतन और अन्य संसाधनों पर सरकार का खर्च होता है. ऐसे में यदि आसपास के स्कूलों में छात्रों की संख्या कम है और विद्यालयों के बीच दूरी भी कम है, तो विभागीय स्तर पर संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल की समीक्षा की जा सकती है. हालांकि, स्कूलों के विलय, पुनर्गठन या शिक्षकों के स्थानांतरण का फैसला संबंधित विभागीय नियमों और वास्तविक स्थिति की जांच के बाद ही हो सकता है.
स्थापना के पीछे राजनीतिक प्रभाव का आरोप
जिला स्तर के एक शिक्षा अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि कई बार स्थानीय राजनीतिक प्रभाव के कारण गांवों में विद्यालय स्थापित कराने के प्रयास किए जाते हैं. आरोप है कि चुनाव के दौरान बूथों की संख्या बढ़ाने जैसे स्थानीय हितों के लिए भी विद्यालय स्थापना का दबाव बनाया जाता है. हालांकि, किसी विशेष विद्यालय की स्थापना के पीछे यही कारण था, इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है.
आंकड़े खुद बता रहे स्कूलों की स्थिति
सहार प्रखंड के इन तीन उत्क्रमित मध्य विद्यालयों के उपलब्ध आंकड़े स्थिति को स्पष्ट करते हैं. जनकपुरिया में 75 छात्रों पर पांच शिक्षक, जनकपुरिया टोला में 30 छात्रों पर चार शिक्षक और महावीरगंज में 35 छात्रों पर छह शिक्षक पदस्थापित हैं. इन आंकड़ों के आधार पर स्कूलों की आवश्यकता, छात्र संख्या और शिक्षक पदस्थापन की विभागीय समीक्षा जरूरी नजर आती है.
शिक्षा की गुणवत्ता पर भी उठ सकता है सवाल
कम छात्र संख्या वाले अलग-अलग विद्यालयों में पर्याप्त संख्या में शिक्षकों की पदस्थापना होने से संसाधनों के वितरण पर सवाल उठ सकते हैं. वहीं, यदि आसपास के स्कूलों में छात्र संख्या अधिक हो और वहां शिक्षकों की जरूरत हो, तो विभाग को उपलब्ध मानव संसाधन के संतुलित इस्तेमाल पर भी विचार करना पड़ सकता है.
विभागीय समीक्षा से साफ हो सकती है तस्वीर
इन विद्यालयों की स्थापना किस नियम और किस आधार पर की गई, वर्तमान में कितने छात्र नामांकित हैं, कितने शिक्षक स्वीकृत पदों के तहत कार्यरत हैं और स्कूलों के बीच वास्तविक दूरी कितनी है, इन बिंदुओं की विभागीय जांच से स्थिति स्पष्ट हो सकती है. साथ ही छात्र-शिक्षक अनुपात और विद्यालयों की जरूरत का भी आकलन किया जा सकता है.
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