सिकटी. नवरात्र के दूसरे दिन शुक्रवार को मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की गयी. माता का यह स्वरूप अपने दाएं हाथ में माला व अपने बाएं हाथ में कमंडल धारण है. घर में स्थापित कलश के बीच देवी मंदिरों में सुबह से हीं श्रद्धालुओं की भीड़ रही. नवरात्र के दूसरे दिन मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना कर उन्हें प्रसन्न करने का प्रयास किया गया. माता के नाम का पहला अक्षर ब्रह्म होता है. जिसका मतलब होता है तपस्या व चारिणी का मतलब होता है आचरण करना. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां ब्रह्मचारिणी ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए 1000 वर्ष तक कठोर तपस्या की थी. जिसकी वजह से उनका नाम ब्रह्मचारिणी पड़ा. इस दिन जो साधक विधि-विधान पूर्वक देवी के इस स्वरूप की पूजा अर्चना करता है. उसकी कुंडलिनी शक्ति जागृत हो जाती है.
मां दुर्गा की भक्ति में लीन हुए श्रद्धालु
दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की हुई पूजा-अर्चना
